Hindi Short Stories for Kids
Hindi Short Stories for Kids

Hindi Short Stories for Kids

Hindi Short Stories for Kids


साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए कुछ खास “Hindi Short Stories for Kids” लेकर आएं हैं जिन्हें आप अपने घर परिवार के बच्चों को सुनाकर उन्हें ज़िन्दगी की बड़ी सिख दे सकते हैं| आशा है आपको हमारा यह संकलन पसंद आएगा|


“सोच समझ कर बोल | Hindi Short Stories with Moral”

एक बार की बात है एक संपन्न राज्य में एक राजा निवास करता था| राज्य में सभी सुख-संपन्न थे लेकिन राजा के कोई संतान नहीं थी| संतान सुख न पाकर हमेशा राजा दुखी रहता था|

एक बार राज्य में एक बहुत ही जाने माने साधू अपने साधुओं की टोली के साथ आए| राजा को जब साधू-महात्मा के आने की खबर मिली तो राजा बहुत प्रसन्न हुआ|

अगले दिन ही राजा सुबह-सुबह साधू-महात्मा की कुटीया में पुछा और संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करने लगा| राजा की बात सुनकर साधू ने कहा – “राजन! आपके प्रारब्ध में संतान नहीं लिखी है| आपकी इस समस्या के लिए में आपकी कोई मदद नहीं कर सकता|

साधू की बात सुनकर राजा उदास हो गया और उदास मन से ही साधू की कुटिया से लौट गया| इधर साधू-महात्मा के एक शिष्य ने जब राजा को अपने लाव-लश्कर के साथ कुटिया से लौटते देखा तो राजा से यहाँ आने का कारन पूछा|

राजा ने अपनी समस्या साधू के शिष्य के समक्ष रखी| शिष्य ने राजा को आश्वाशन दिया की राजन आप चिंता न करें आपकी मनोकामना जरुर पूरी होगी| शिष्य की बात सुनकर राजा प्रसन्न मन से महल में लौट गया|

इधर साधू-महात्मा को जब शिष्य और राजा की वार्ता का पता चला तो वह  शिष्य पर बहुत नाराज़ हुए की जब राजा के भाग्य में संतान प्राप्ति नहीं थी तो तुमने राजा को संतान प्राप्ति का आश्वाशन क्यों दिया|

गुरूजी की बात सुनकर शिष्य बोला, “गुरूजी! राजा को उदास देखकर मेरे मुह से निकल गया| अब में क्या करूँ”

गुरूजी ने शिष्य को कहा, “अब अपने वचन के कारण तुम्हें ही राजा के घर पुत्र बनकर जन्म लेना पड़ेगा|”

समय पाकर राजा के घर एक पुत्र का जन्म हुआ| राजा का पुत्र सब शुभ लक्षणों से संपन्न था, पर उसमें एक दोष था की वह मुह से कुछ नहीं बोलता था|

राजा ने दूर दूर से कई जाने माने वैध-हकिम बुलाए लेकिन कोई फायदा न हुआ| राजा ने पुरे राज्य में खबर करवा दी की जो भी राजकुमार को बुलवाएगा उसे एक लाख रूपए का इनाम दिया जाएगा|

कई लोग महल में आए, उन्होंने कई तरह के उपाए किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ|

समय बीतता रहा| समय के साथ-साथ राजकुमार भी बड़ा हुआ| एक दिन राजकुमार कुछ सैनिकों के साथ जंगल में शिकार के लिए गया| वहां एक शिकारी शिकार की तलाश में बैठा था| शिकारी काफी देर से शिकार के लिए पक्षी खोज रहा था लेकिन उज़े कोई भी पक्षी दिखाई नहीं दे रहा था|

आप पढ़ रहे हैं “Hindi Short Stories for Kids | सोच समझ कर बोल”

तभी पास ही के पेड पर बैठा एक पक्षी बोल पड़ा| पक्षी की आवाज़ सुनकर शिकारी की नज़र पक्षी पर पड गई और उसने तीर से निशाना लगा कर पक्षी को मार गिराया|

राजकुमार पास ही से इस पुरे वाकिये को देख रहा था| पक्षी के शिकार बनते ही राजकुमार बोल पड़ा, “बोला तो मरा”| राजकुमार के बोलने पर सब आश्चर्यचकित हो उठे और तुरंत राजकुमार को लेकर राजा के पास पहुंचे|

राजा के पास पहुंचकर सैनिकों से सारी बात महाराज को बता दी| राजा को सैनिकों की बात पर बिलकुल भी यकीन नहीं हुआ| उसे लगा सैनिक एक लाख के इनाम के लिए राजा को राजकुमार के बोलने की झूंठी कहानी बता रहें हैं|

राजा ने सैनिकों की बात को झूठा मानकर सैनिकों को फांसी का हुक्म सुना दिया|

सैनिकों को फांसी का हुक्म सुनकर राजकुमार फिल बोल उठा, “बोला तो मरा”

राजकुमार की बात सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ| राजा ने राजकुमार से साफ-साफ पूरी बात बताने का आग्रह किया|

राजकुमार ने  महाराज को प्रणाम किया और बोला, “महाराज! में वही साधू हूँ जिसने आपको संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था| आपके भाग्य में संतान नहीं थी लकिन में बोल गया और मुझे आपके घर संतान बनकर जन्म लेना पड़ा|

अगर में न बोलता तो मुझे मरकर पुनः जन्म न लेना पड़ता| ऐसे ही शिकार के वक़्त अगर वह पक्षी न बोलता तो वह भी नहीं मरता|

अगर सैनिक मेरे बोलने का समाचार आपको न सुनते तो उन्हें भी फांसी की सजा न होती| यह सब बिना सोचे समझे बोलने का परिणाम है|

इसीलिए मेरे मुह से निकला “बोला तो मरा”

अब में भी जाता हूँ क्यों की में भी बोल गया| बस इतना कहकर राजकुमार मर गया|

इसलिए कहा गया है की “बिना सोच विचार के कभी भी नहीं बोलना चाहिए|”

Hindi Short Stories for Kids | लालची राजा


“सो रूपए की एक बात | Hindi Kahani”

एक नगर में एक सेठ रहता था| सेठ बड़ा ही इमानदार और धार्मिक प्रवृत्ति का इन्सान था| एक दिन सेठ के यहाँ विचरण करते हुए एक पंडित जी आए| पंडित जी के चहरे से झलकते तेज़ से प्रभावित होकर सेठ पंडित से प्रभावित हो गया|

पंडित ने आदरपूर्वक साधू महात्मा को बैठाया और उनकी अच्छे से आवभगत की| जब पंडित जी पुनः जाने लगे तो सेठ ने उनसे अपने व्यापार में लाभ के लिए कुछ बाते बताने का आग्रह किया|

सेठ की बात सुनकर पंडित जी बोले, “सेठ जी! बात तो में आपको बता दूंगा लेकिन एक बात के सो रूपए लूँगा|”

सेठ जी ने पंडित की बात मान ली और बोले, “पंडित जी आप बात बताएं, रुपयों की चिंता आप न करें! आपको रूपए मिल जाएँगे”

पंडित ने पहली बात बताई, “छोटा आदमी यदि बड़ा बन जाए तो उसे बड़ा ही मानना चाहिए, छोटा नहीं समझना चाहिए”

सेठ ने मुनीम जी को पंडित जी को सो रूपए देने का कह दिया| सेठ की बात मानकर मुनीम जी ने पंडित को सो रूपए दे दीए|

पंडित ने आगे और बात बताने का आग्रह किया| पंडित जी बोले, “दुसरे के दोष को प्रकट नहीं करना चाहिए”

सेठ के कहने पर मुनीम ने इस बात के भी सो रुपाए दे दीए|

सेठ बोला, “पंडित जी और कोई बात बताएं”

पंडित जी बोले, “जो काम नोकर से हो जाए उसे करने में अपना समय नहीं लगाना चाहिए” मुनीम ने इस बात के भी सो रूपए दे दीए|

सेठ जी ने पण्डित जी से एक और बात बताने का आग्रह किया| पण्डित जी बोले, “जहाँ एक बार मन फट जाए उस स्थान पर फिर नहीं रहना चाहिए” मुनीम ने इस बात के भी सो रूपए पंडित जी को दे दिए|

सेठ जी ने पंडित की बताई चारों बातों को याद कर लिया और उनको घर और दुकान में कई जगह लिखवा दिया|

कुछ समय बाद सेठ को व्यापार मेंभारी नुकसान हो गया| नुकसान इतना भारी था की सेठ जी का पूरा व्यापार ठप्प हो गया और उन्हें नगर छोड़कर दुसरे नगर व्यापार के लिए जाना पड़ा|

सेठ जी के साथ उनका मुनीम भी था| चलते-चलते वे एक शहर के पास पहुंचे| सेठ ने मुनीम को शहर से कुछ खाने-पिने का सामान लेन के लिए भेजा| सेठ की बात सुनकर मुनीम शहर में खाना लेने के लिए गया|

देवयोग से उस शहर के राजा की म्रत्यु हो गई थी| राजा की कोई संतान नहीं थी और राजगद्दी का कोई भी वारिस न था|

अतः शहर के लोगों ने फैसला किया की जो भी व्यक्ति सुबह की  पहली किरण के साथ शहर में प्रवेश करेगा उसे ही राजा बना दिया जाएगा|

इधर सेठ जी का मुनीम शहर में खाने पिने का सामान लेने के लिए पहुंचा| मुनीम ने जैसे ही शहर में प्रवेश किया लोग उसे हठी पर बिठाकर महल में ले गए और राजगद्दी पर बिठा दिया|

इधर बहुत समय तक मुनीम के वापस न लौटने पर सेठ जी को चिंता हुई और वे मुनीम को ढूंढने शहर में पहुचे| शहर पहुंचकर सेठ जी को पता चला की मुनीम तो अब राजा बन गया है|

सेठ जी महल में जाकर राजा बने मुनीम से मिले| मुनीम ने सारी कथा सेठ को सुना दी| तभी सेठ जी को पंडी जी की कही बात याद आई, “छोटा आदमी यदि बड़ा बन जाए तो उसे बड़ा ही मानना चाहिए , छोटा नहीं समझना चाहिए”

सेठ ने राजा बने मुनीम को प्रणाम किया| मुनिम ने राजा को मंत्री बना दिया|

राजा के घुडसाल का जो अध्यक्ष था उसका रानी के साथ अनेतिक सम्बन्ध था| एक दिन संयोग से सेठ ने राजी को घुड़साल के साथ शयन करते देख लिया|

दोनों को नींद आई हुई थी| सेठ को तभी पंडित की बाद याद आई, “दुसरे के दोष को प्रकट नहीं करना चाहिए” यही सोचकर सेठ ने रस्सी पर अपनी शाल डाल दी ताकि कोई ओर उनको न देख सके|

जब रानी की नींद खुली तो उसने रस्सी पर शाल पड़ी हुई देखि| रानी ने अपने सैनिकों से पता लगवाया की यह किसकी शाल है| सैनिकोंने पता लगाया की यह शाल तो सेठ बने मंत्री की है|

रानी ने सोचा राजा और सेठ में घनी मित्रता है कहीं ऐसा न हो की यह मंत्री राजा के सामने मेरी पोल खोल दे| मुझे पहले ही कुछ ऐसा काम करना चाहिए की मंत्री पहले ही फास जाए|

रानी सेठ की शाल लेकर राजा के पास गई और बोली आज रात को आपका मंत्री बुरी नियत से मेरे पास आया था| लेकिन में उसकी नियत को भांप गई और चिल्लाने लगी| मेरे चिल्लाने से डर के मारे वह भागने लगा और उसकी शाल मेरे हाथ में आ गई|

राजा ने देखा की यह तो वही शाल है जो उसने कभी अपने सेठ को उपहार में दी थी| राजा शाल को पहचान गया और रानी के झांसे में आ गया| राजा की बुद्धि फिर गई और उसने रानी की सलाह से राजा को ख़त्म करने का विचार कर लिया|

राजा ने अगले दिन ही मंत्री को कसी के यहाँ मांस लेन के लिए भेज दिया| इधर राजा ने कसी को पहले ही बोल दिया की महल से जो आदमी मांस लेने के लिए आएगा उसे मार देना है|

इधर सेठ ने सोचा की राजा को पता है की में मांस को चूता तक नहीं लेकिन फिर भी राजा मुझे मांस लेन के लिए कसी के पास भेज रहें हैं जरुर इस बात में कुछ न हेतु है| तभी राजा को पंडित की कही तीसरी बात याद आ गई, की “जो काम नौकर के द्वारा हो सकता है वह काम कभी भी खुद नहीं करना चाहिए|”

सेठ ने मांस लेन के लिए अपने नोकर को भेज दिया| कसाई ने राजा की आज्ञा अनुसार राजा के महल से आए आदमी को मार दिया|

इधर राजा को अपने गुप्तचरों द्वारा पता चला की घुडसाल और रानी के अनेतिक सम्बन्ध है| राजा को अपनी भूल पर बड़ा पश्च्याताप हुआ| बेवजह उसने रानी की बातों में आकर सेठ जी को मरवा दिया|

बाद में राजा को पता चला की सेठ जी तो जिन्दा है| राजा को बड़ी प्रसन्नता हुई| वह एकांत में सेठ जी के पास गया और उनसे अपने किए पर क्षमा मांगी|

आप पढ़ रहे हैं “Hindi Short Stories for Kids | सो रूपए की एक बात”

राजा ने सेठ से पुचा की आपकी शाल रानी के पास कैसे आई| तब राजा ने पूरी बात बताई की जब उसने रानी और घुडसाल को शयन करते देखा तो उसे पंडित जी कि कही बात याद आई की,  “किसी के भी दोष को प्रकट नहीं करना चाहिए|” मेने इसी बात का अनुसरण किया और अपनी शाल को रस्सी पर ढँक दिया ताकि दोनों को कोई देख न पाए|

वही शाल रानी आपके पास उठा लाई और अपनी मनघडंत कहानी से आप से मुझे मरवाने का प्रयत्न किया|

राजा ने ओने किए पर सेठ से क्षमा मांगी और राजा से पुनः अपना मंत्री पद सम्हालने का अनुरोध किया| तभी राजा को पंडित की कही चौथी बात यद् आई की, “अगर एक बार कहीं से मन फट जाए तो उस स्थान पर दुबारा नहीं रहना चाहिए”

सेठ ने राजा से क्षमा मांगी और कहा, “महाराज! अब में यहाँ नहीं रुक सकता” बस इतना कहकर सेठ जी महल छोड़कर वहां से चले गए|

आप पढ़ रहे थे “Hindi Short Stories for Kids | सो रूपए की एक बात”


साथियों आपको “Hindi Short Stories for Kids” हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं और हमारा फेसबुक पेज जरुर LIKE करें!

साथियों अगर आपके पास कोई भी रोचक जानकारी या कहानी, कविता हो तो हमें हमारे ईमेल एड्रेस hindishortstories2017@gmail.com पर अवश्य लिखें!

यह भी पढ़ें:-

children story in hindi | कहानी बच्चों की

Baccho ki Kahani | बच्चों की कहानियां 

About Hindi Short Stories

Hi, My Self Mohit Rathore. I am an Professional Anchor(2012) & Blogger (2017). I have three years experience in the field of writing. I am also writing a novel along with Blagging, whose publication information will be published on the website soon! Thank you for being here.... Mohit Rathore

Check Also

Kahaniya in Hindi

Kahaniya in Hindi | जादुई वस्त्र – लालची सेठ

Kahaniya in Hindi साथियों, प्रेरणादायक कहानियां ( Kahaniya in Hindi ) हमारे जीवन में एक …

3 comments

  1. बहुत ही अच्छी बातें बताई गई हैं इस कहानी में मुझे वो बात सबसे अच्छी लगी कि जहां से मन हट जाए वहां से चले जाना चाहिए।

    • बिलकुल सही कहा आपने| आदरणीय आपने जिस तन्मयता केसाथ कहानी को पढ़ा है उसके लिए हम आपके आभारी हैं|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *