प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Hindi Short Stories with moral

Hindi Short Stories with Moral Value

प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Hindi Short Stories with moral


डर अच्छे-अच्छों के छक्के छुडा देता है| एक बहुत पुरानी कहावत हैं जो “डर गया वह मर गया”, और इसी कहावत पर आधारित है हमारी यह कहानी “भय | Hindi Short Stories with moral”

 भय | Hindi Short Stories

बहुत पुरानी बात है| एक बार एक गाँव से चार मित्र व्यापर करने के उद्देश्य से शहर की और रवाना हुए| शहर गाँव से काफी दूर था| शहर के रास्ते में एक लम्बा जंगल पड़ता था| चलते-चलते चारों थक गए तो कहीं रुकने का आसरा देखने लगे| थोड़ी दूर पर ही एक गाँव था| जैसे-तैसे चारों गाँव की सीमा तक पहुंचें| थोड़ी दूर चलने पर ही उन्हें एक झोंपड़ी दिखाई दी| चारों झोपडी तक पहुंचे और यह सोचकर दरवाजा खटखटाया की यहाँ जो भी रहता होगा वह उन्हें दो रोटी और पानी के लिए मना नहीं करेगा| उन्होंने दरवाजा खटखटाया| द्वार एक वृद्धा ने खोला| राहगीरों को भूखा जानकर वृद्धा ने बड़े स्नेह से चारों को छाछ के साथ भोजन करवाया| वृद्धा को धन्यवाद कहकर चारों फिर अपने रास्ते चल दीये|

राहगीरों के जाने के बाद वृद्धा ने स्वयं के खाने के लिए जैसे ही छाछ उठाई उसे छाछ का रंग लाल नजर आया| उसने दही बिलोंने वाले बर्तन को देखा तो उसे उसमें एक मृत सांप नज़र आया| मृत सांप को देखकर वृद्धा को बहुत दुःख हुआ| उसने सोचा, उन चारों राहगीरों की जान मेरे कारण आज चली गई होगी| अनजाने में मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया है| रात-दिन वृद्धा इसी गम में घुलती रही की उसकी लापरवाही की वजह से चार राहगीरों की जान चली गई|

इधर वे चारों मित्र सकुशल थे| कुछ दिनों में ही काफी धन अर्जित करने के बाद चारों ने अपने गाँव लौटने का निश्चय किया| मार्ग में वे फिर उसी वृद्धा के घर भोजन के लिए रुके| भोजन करने के बाद उन्होंने वृद्धा से कहा – माई! तू हमें भूल गई! हम वे ही है जो कुछ दिनों पहले शहर जाते हुए तेरे घर भोजन के लिए रुके थे|

वृद्धा चारों को जीवित देखकर बहुत खुश हुई और बोली- “में तुम लोगों को सकुशल देखकर आज बहुत खुश हूँ| में तो इतने दिन तुम्हारी चिंता में ही घुले जा रही थी| चारों ने उत्सुकतावश इसका कारण पुछा तो वृद्धा ने कहा – “मेरी असावधानी से उस दिन तुम्हारी छाछ में एक सांप मथा गया था|” वृद्धा के इतना करने पर ही चारों की घबराहट चरम पर पहुँच गई और चारों एक साथ गिरकर म्रत्यु को प्राप्त हो गए|

इसीलिए कहा गया है, “दो डर गया वो मर गया”

Hindi Short Stories with moral

पढ़ें कहानी- भगवान् का सत्कार 


कहानी-संघठन की शक्ति

एक बार एक गाँव में एक पिता की चार पुत्र थे| लेकिन चारों की एक दुसरे के साथ जमती ना थी| चारों में हमेशा झगडा होता रहता था| इन झगड़ों की वजह से चारों की शारीरिक और आर्थिक स्थिथि के साथ-साथ बोद्धिक और मानसिक स्थिथि भी ख़राब होती जा रही थी| यह सब देखकर उनके पिता बहुत दुखी थे| पिता ने मरते वक़्त चारों पुत्रों को अपने पास बुलाया और  उन्हें लकड़ी का एक गट्ठर देते हुए कहा, “तोड़ो इसे” | लड़कों ने गट्ठर  इ का भरकस प्रयास किया लेकिन वे गट्ठर को तौड़ ना सके|

अंत में पिता ने चारों को अपने पास बुलाया और गट्ठर की एक-एक लकड़ी को तोड़ने को कहा| लड़कों ने इस बार लकड़ियों को बड़े आराम से तौड़ दिया| तब पिता ने लड़कों को समझाया, कि “यदि लकड़ी के गट्ठर की तरह मिल कर रहोगे तो कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा” और अगर तुम्हारे बिच में फुट रही तो लकड़ियों की तरह ही एक क्षण में नष्ट हो जाओगे|

लड़कों को पिता की बात समझ आ गई और उसी दिन से चारों मिलकर रहने लगे|

Hindi Short Stories with moral

पढ़ें हिंदी की 5 सर्वश्रेष्ट कहानियां


बुद्धिमान व्यक्ति | हिंदी कहानी 

एक गाँव में एक बुढा व्यक्ति रहता था| अपनी उम्र में उस व्यक्ति ने बहुत सारी यात्राएं की, बहुत सरे व्यापार किए, परिवार का भरण पोषण किया, कई सारे व्यक्तियों से मिला| उम्र के साथ-साथ उस व्यक्ति को इतना तजुर्बा हो गया था की गाँव भर के लोग उस से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आते!

धीरे-धीरे गाँव वालों के साथ-साथ आस-पास के गाँव वाले भी उस बूढ़े व्यक्ति के पास अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आने लगे| आलम यह था की अब वह बुढा व्यक्ति दिन भर लोगों की समस्याओं को सुलझाने में ही लगा रहता|

धीरे-धीरे समस्याओं को लेकर आने वाले लोगों की संख्या इतनी बढ़ गई की अब वह व्यक्ति खुद परेशान रहने लगा|

एक दिन उसने सभी लोगों को एक साथ बुलाया| उसने सबको एक जगह पर बिठाकर सबको एक चुटकुला सुनाया और सभी लोग ख़ुशी से झूम उठे|

उसने फिर वही चुटकुला दुबारा सुनाया| इस बार कुछ लोग मुस्कुराए|

उसने फिर वही चुटकुला तीसरी बार सुनाया| इस बार एक व्यक्ति भी नहीं हँसा|

बुद्धिमान व्यक्ति सभी को देख मुस्कुराया और बोला- जब आप एक ही चुटकुले को सुनकर बार-बार मुस्कुरा नही सकते तो फिर एक ही समस्या के बारे में सोच-सोच कर बार बार परेशान क्यों होते हैं|

गाँव वालों को बूढ़े व्यक्ति की बात समझ आ गई और वे सारी चिंताएं छोड़कर ख़ुशी-ख़ुशी जीवन यापन करने लगे!

पढ़ें हास्य कहानी-कानपूर के दामाद 


किस्मत महरबान तो गधा पहलवान

एक गाँव में एक गधा रहता था| गधे का मालिक रोज गधे पर नमक की बोरियां लड़ कर शहर ले जाता और बेच आता था|

हर दिन की तरह गधे का मालिक गधे की पीठ पर नमक की बोरियां लाद कर शहर की और निकला| गाँव से शहर के रास्ते में एक नाहर पढ़ती थी| अचानक नाहर के रस्ते में फिसलन होने के कारण गधा नहर में गिर पड़ा|

नहर में गिरने के कारण गधे के पीठ पर लदी बोरियों में से नमक नहर में घुल गया और गधे की पीठ पर बोझ हल्का हो गया|

फिर क्या था अब गधा रोज शहर जाते वक़्त नहर में डूबकी लगा देता जिससे उसका वजन हल्का हो जाता

एक दिन गधे के मालिक को गधे की इस चाल का पता चल गया| गधे को सबक सिखाने के लिए उसने एक तरकीब सोची|

अगले दिन गधे के मालिक ने गधे की पीठ पर नमक की जगह कपास की बोरियों को लाद दिया| अब गधे ने हमेंशा की तरह नहर के आते ही सोचा की नहर  में डुबकी लगते ही मेरा बोझ हल्का हो जाएगा|

नहर के आते ही इस बार जैसे ही गधे ने नहर में डुबकी लगाई कपास की बोरियां पानी को सोखकर और भरी हो गई| अब गधे का चलना भी भारी हो गया|

इस घटना के बाद गधे ने नहर में डुबकी लगाना तो देय नहर की और पलट कर भी नहीं देखा|

तो साथियों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें हमेशा हमारा काम पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना चाहिए|


कहानियों के खजाने के लिए यहाँ क्लिक करें!

तो दोस्तों आपको हमारा यह आर्टिकल “ प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Hindi Short Stories with moral कैसा लगा हमें Comment Section में ज़रूर बताएं और हमारा फेसबुक पेज  जरुर Like करें|

अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ शेयर करें!
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply