प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Hindi Short Stories with moral

Hindi Short Stories with moral Value
Review of: Ravindra Mahta

Reviewed by:
Rating:
5
On May 16, 2018
Last modified:July 12, 2018

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प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Hindi Short Stories with moral


डर अच्छे-अच्छों के छक्के छुडा देता है| एक बहुत पुरानी कहावत हैं जो “डर गया वह मर गया”, और इसी कहावत पर आधारित है हमारी यह कहानी “भय | Hindi Short Stories with moral”

                        भय | Hindi Short Stories with moral

बहुत पुरानी बात है| एक बार एक गाँव से चार मित्र व्यापर करने के उद्देश्य से शहर की और रवाना हुए| शहर गाँव से काफी दूर था| शहर के रास्ते में एक लम्बा जंगल पड़ता था| चलते-चलते चारों थक गए तो कहीं रुकने का आसरा देखने लगे| थोड़ी दूर पर ही एक गाँव था| जैसे-तैसे चारों गाँव की सीमा तक पहुंचें| थोड़ी दूर चलने पर ही उन्हें एक झोंपड़ी दिखाई दी| चारों झोपडी तक पहुंचे और यह सोचकर दरवाजा खटखटाया की यहाँ जो भी रहता होगा वह उन्हें दो रोटी और पानी के लिए मना नहीं करेगा| उन्होंने दरवाजा खटखटाया| द्वार एक वृद्धा ने खोला| राहगीरों को भूखा जानकर वृद्धा ने बड़े स्नेह से चारों को छाछ के साथ भोजन करवाया| वृद्धा को धन्यवाद कहकर चारों फिर अपने रास्ते चल दीये|

राहगीरों के जाने के बाद वृद्धा ने स्वयं के खाने के लिए जैसे ही छाछ उठाई उसे छाछ का रंग लाल नजर आया| उसने दही बिलोंने वाले बर्तन को देखा तो उसे उसमें एक मृत सांप नज़र आया| मृत सांप को देखकर वृद्धा को बहुत दुःख हुआ| उसने सोचा, उन चारों राहगीरों की जान मेरे कारण आज चली गई होगी| अनजाने में मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया है| रात-दिन वृद्धा इसी गम में घुलती रही की उसकी लापरवाही की वजह से चार राहगीरों की जान चली गई|

इधर वे चारों मित्र सकुशल थे| कुछ दिनों में ही काफी धन अर्जित करने के बाद चारों ने अपने गाँव लौटने का निश्चय किया| मार्ग में वे फिर उसी वृद्धा के घर भोजन के लिए रुके| भोजन करने के बाद उन्होंने वृद्धा से कहा – माई! तू हमें भूल गई! हम वे ही है जो कुछ दिनों पहले शहर जाते हुए तेरे घर भोजन के लिए रुके थे|

वृद्धा चारों को जीवित देखकर बहुत खुश हुई और बोली- “में तुम लोगों को सकुशल देखकर आज बहुत खुश हूँ| में तो इतने दिन तुम्हारी चिंता में ही घुले जा रही थी| चारों ने उत्सुकतावश इसका कारण पुछा तो वृद्धा ने कहा – “मेरी असावधानी से उस दिन तुम्हारी छाछ में एक सांप मथा गया था|” वृद्धा के इतना करने पर ही चारों की घबराहट चरम पर पहुँच गई और चारों एक साथ गिरकर म्रत्यु को प्राप्त हो गए|

इसीलिए कहा गया है, “दो डर गया वो मर गया”

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संघठन की शक्ति | Hindi Short Stories with moral

एक बार एक गाँव में एक पिता की चार पुत्र थे| लेकिन चारों की एक दुसरे के साथ जमती ना थी| चारों में हमेशा झगडा होता रहता था| इन झगड़ों की वजह से चारों की शारीरिक और आर्थिक स्थिथि के साथ-साथ बोद्धिक और मानसिक स्थिथि भी ख़राब होती जा रही थी| यह सब देखकर उनके पिता बहुत दुखी थे| पिता ने मरते वक़्त चारों पुत्रों को अपने पास बुलाया और  उन्हें लकड़ी का एक गट्ठर देते हुए कहा, “तोड़ो इसे” | लड़कों ने गट्ठर  इ का भरकस प्रयास किया लेकिन वे गट्ठर को तौड़ ना सके|

अंत में पिता ने चारों को अपने पास बुलाया और गट्ठर की एक-एक लकड़ी को तोड़ने को कहा| लड़कों ने इस बार लकड़ियों को बड़े आराम से तौड़ दिया| तब पिता ने लड़कों को समझाया, कि “यदि लकड़ी के गट्ठर की तरह मिल कर रहोगे तो कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा” और अगर तुम्हारे बिच में फुट रही तो लकड़ियों की तरह ही एक क्षण में नष्ट हो जाओगे|

लड़कों को पिता की बात समझ आ गई और उसी दिन से चारों मिलकर रहने लगे|

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