नई कहानियां | जीवन का मूल्य

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 नई कहानियां | जीवन का मूल्य

साथियों नमस्कार, Hindi Short Stories के कहानियों के इस खजाने में हम हर बार कुछ नई कहानियां लेकर आते हैं| इस बार भी हम एक नई कहानी “जीवन का मूल्य” आपके लिए लेकर आएं है जिसे पढ़कर आपको भी जीवन के बारे में कुछ अलग पहलु देखने को मिलेगा| हमारी वेबसाइट पर अपना अमूल्य समय बिताने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…


नई कहानियां में एक और कहानी

“जीवन का मूल्य”

नई कहानियां | किसी गाँव में एक जौहरी  रहता था| वह काफी बुद्धिमान था| हमेशा अपने काम में लगा रहता| लेकिन नियति में उसके कुछ और ही लिखा था| अपनी जवानी के दिनों में ही किसी बीमारी के चलते वह चल बसा| वह अपने पीछे अपनी पत्नी और एक लड़के को छोड़ गया| लोगों ने जब उसकी पत्नी को अकेला देखा तो उसका सारा धन धीरे-धीरे हड़प लिया| धन के नाम पर अब जौहरी की पत्नी के पास बस एक मोती बचा था जो मरते समय जौहरी ने अपनी पत्नी को दिया था| उस मोती की कीमत का कोई मोल नहीं था|

जौहरी का लड़का जब बड़ा हुआ तो उसकी विधवा पत्नी ने वह मोती अपने बेटे को दिया और कहा…
बेटा! यह मोती मुझे तुम्हारे पिताजी ने मरते समय दिया था| इसकी कीमत का मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है लेकिन तुम्हारे पिताजी ने कहा था की यह एक अनमोल मोती है| जो कोई भी व्यक्ति इस मोती का मोल लगाएग वह अपनी बुद्धि का मूल्य तुम्हे बताएगा, यानी की जैसी उस इन्सान की बुद्धि होगी ठीक वैसा ही इस मोती का मूल्य होगा|

अब तुम इस मोती को लेकर बाज़ार में जाओ और इस मोती का मूल्य पता करो, लेकिन ध्यान रहे इस मोती को उसी व्यक्ति को देना जहाँ तुम्हें इसका सही मूल्य मिले| जौहरी का लड़का अब मोती लेकर बाज़ार में मोती का मूल्य पता करने निकल पड़ा| उसने कई जगह मोती का मूल्य पता किया| बाज़ार में निकलते हुए उसे एक सब्जी बेचने वाला दिखाई दिया, उसने सब्जी वाले से मोती का मूल्य बताने की बात कही| सब्जी वाले ने मोती को पहले तो अच्छे से देखा और फिर मोती के बदले में 4 गाजर देने की बात कही|

लड़का मोती को लेकर आगे गया| कुछ ही देर बाद उसे बाज़ार में एक सोने-चांदी की दुकान दिखाई दी| उसने दुकानदार को मोती का मूल्य बताने को कहा| सोनार ने मोती का मूल्य 100 रूपए के बराबर बताया| लड़का मोती लेकर वहां से भी आगे बढ़ा| आगे कुछ दूर चलने पर उसे एक जौहरी की दुकान दिखाई दी| उसने जौहरी से भी मोती के मूल्य के बारे में जानना चाहा| जोहरी मोतीयों का भी व्यापार करता था, सो उसे मोतियों की भी अच्छी खासी जानकारी थी| उसने मोती का मूल्य एक हज़ार रुपये बताया|

अब लड़का आश्चर्यचकित था, वह जैसे-जैसे बाज़ार में मोती का मूल्य पुछ रहा था मोती का मूल्य बढ़ता ही जा रहा था| अब उसके मन में मोती का सही मूल्य जानने को लेकर उत्सुकता हुई| वह किसी भी कीमत पर मोती का सही मूल्य जानने के लिए आतुर था| कुछ ही दिनों में वह एक जाने-माने जौहरी के पास मोती का सही मूल्य जानने के लिए पहुंचा| जौहरी हीरे-मोती का बहुत बड़ा व्यापारी था|

लड़के ने जौहरी के सामने रखकर जैसे ही मोती दिखाया, मोती देखते ही जौहरी आश्चर्यचकित हो गया, उसने आश्चर्य से लड़के से पुछा-
यह मोती तुम्हे कहाँ मिला – (लड़के ने अपने पिताजी द्वारा मरते समय मोती देने और माँ द्वारा मोती का मूल्य पता करने की सारी बात जौहरी को बता दी)

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लड़के की बात सुनते ही जौहरी सारा माज़रा समझ गया|

उसने लड़के को अपने पास बिठाया और कहा….
बेटा! यह मोती अनमोल है| दुनियां में इस तरह का और कोई भी मोती नहीं है| मेरे पास जो कुछ भी है अगर वह सब भी में तुम्हें दे दूँ तब भी इस मोती का मोल नहीं किया जा सकता|

जौहरी की बात सुनकर लड़के ने जौहरी से निवेदन किया…
सेठ जी, पिताजी की मौत के बाद हमें अकेला पाकर लोगो ने हमारा सारा धन छल-कपट से हड़प कर लिया है| धन-सम्पदा के नाम पर अब इस मोती के सिवा हमारे पास और कुछ भी नहीं है| अगर आप इस मोती का सही मोल लगा देंगे तो में यह मोती आपको दे दूंगा जिससे हमारी तंगी भी दूर हो जाएगी और यह मोती भी सही हाथों में चला जाएगा|

जौहरी को उस लड़के पर तरस आ गया|
उसने लड़के के सर पर हाथ फेरते हुए कहा…
बेटा! इस अनमोल मोती का मूल्य तो में नहीं लगा सकता लेकिन जो भी तुम हमसे इस मोती के बदले में लेना चाहो तुम ले सकते हो…

वह कैसे ? (लड़के ने जौहरी की बात पर गौर करते हुए पुछा…)

जौहरी ने लड़के को उसकी तीनों दुकानों के बारे में बताया और कहा… “हमारी तीनों दुकानों में से तुम्हें पहली दुकान में 15 मिनट का समय दिया जाएगा उन 15 मिनट में तुम जितना सामान उस दुकान से निकाल लोगे वह सामान तुम्हारा हो जाएगा| ठीक वैसे ही दूसरी दुकान में तुम्हें 25 मिनट और तीसरी दुकान में तुम्हें 60 मिनट का समय दिया जाएगा| तुम तय समय में जितना सामान दुकान से निकाल लोगे वह सब तुम्हारा हो जाएगा|

जौहरी की बात सुनकर लड़का बहुत खुश हुआ| लड़के ने सोचा मोती की इससे अच्छी कीमत मुझे नहीं मिल सकती| बस यही सोचकर उसने जौहरी की शर्त मान ली और वह मोती जौहरी को सोंप दिया|

कुछ ही देर में जौहरी ने अपने मुनीम को बुलाया और लड़के से हुई सारी बातचीत मुनीम को समझा दी| मुनीम लड़के को लेकर पहली दुकान में पहुंचा| लड़का दुकान को देखते ही दुकान की सुन्दरता में खो गया| दुकान में जगह-जगह हीरे-जवाहरात सजे थे| इतनी ज्यादा दौलत उसने पहले कभी नहीं देखि थी| वह इस धन-दौलत में वह इतना खो गया की उसे समय का ख्याल ही नहीं रहा कब जौहरी के दीए 15 मिनट पुरे हो गए|

मुनीम लड़के को लेकर दूसरी दुकान में पहुंचा| यह दुकान सोने-चांदी से भरी थी| लड़का सोने-चांदी की चमक को देखकर आश्चर्यचकित था| वह कभी सोने का हार अपने गले में डालकर खुद को शीशे में देखता तो कभी हाथ में कुंदा पहनकर खुद को अमिर समझता| देखते ही देखते यहाँ भी 25 मिनट पुरे हो गए और मुनीम ने लड़के को दुकान से बहार निकलने का आदेश दे दिया|

मुनीम अब लड़के को लेकर तीसरी दुकान में पहुंचा| इस दुकान में एशों-आराम की सारी चीजें मौजूद थी| ऐसी-ऐसी चीजें जो लड़के ने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं देखि थी| इन सब चीजों को देखकर लड़का पागल हो गया| वह कभी सोफे पर जा कर बेठता तो कभी दिवार पर लगी झूमर को निहारता| “नई कहानियां ” कभी बड़े-बड़े हाथियों के साथ खेलता तो कभी अलग-अलग तरह की घड़ियों को अपनी कलाई पर बांध के देखता| इस बार भी देखते ही देखते 60 मिनट का समय पूरा हो गया|

मुनीम ने अगले ही पल लड़के को बाहर निकलने का आदेश दे दिया| बाहर निकलते-निकलते लड़के ने जुट की बनी एक थैली उठा ली| अब शर्त के अनुसार उस बेशकीमती मोती की किमत वह जुट की बनी थैली थी| लड़के ने बाहर निकलकर जुट की बनी थैली को देखा लेकिन उसमें कारीगरों के रखने का सामान जैसे हथोडा, चीणी और पत्थर आदि पड़े थे|

जोहरी ने शर्त अनुसार वह थैली उस लड़के को दे दी| मोती की कीमत उस जोहरी ने लगाई थी लेकिन लड़के ने अपने मंदबुद्दी का परिचय देते हुए उस मोती को कोडियों के भाव बेच दिया|

साथियों, हमारा जीवन भी उस मोती की ही भातीं अमूल्य है! हमें भी जीवन में हमारे जिवन को मूल्यवान बनाने के लिए तिन मोके मिलते हैं| जीवन के प्रथम पढ़ाव के पंद्रह वर्ष अच्छे से शिक्षा ग्रहण करने के लिए उसके बाद अगले 25 वर्ष खुद को साबित करने और कुछ बनने के लिए व ज़िन्दगी के आखरी वर्ष धर्म कर्म करने के लिए|

लेकिन हम भी जिंदगी की चकाचौंध में इतने अंधे हो जाते हैं की हमें समझ ही नहीं आता के ज़िन्दगी के किस पड़ाव पर हमें क्या हाँसिल करना हैं| इसीलिए ज़िन्दगी की चकाचौंध में न फसकर हमें हमेशा हमारे लक्ष्य की और अग्रसर होना चाहिए व् इस अमूल्य जीवन का भरपूर मज़ा उठाना चाहिए|


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