मेघावी सुभाष-Moral Stories in Hindi

Subhash Moral Stories in Hindi

मेघावी सुभाष | Moral Stories in Hindi


Subhash Moral Stories in Hindi

सुभाष चन्द्र बोस, जिन्हें हम नेताजी के नाम से भी जानते हैं बचपन से ही अत्यंत मेघावी और प्रतिभाशाली छात्र थे| स्कूल के दिनों में अध्यापक द्वारा पूछे गए किसी भी सवाल का तुरंत जवाब देने में वै कभी नहीं चुकते थे| इस तरह बड़े ही अच्छे से उन्होंने अपनी स्कूली पढाई पूरी की| स्कूल और कॉलेज की पढाई पूरी होने के बाद नोकरी करने का मन बना कर एक बार वै एक कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए गए| इंटरव्यू में अंग्रेज अधिकारी उनकी प्रतिभा को देख काफी प्रभावित हुआ|

इंटरव्यू के दौरान अंग्रेज अधिकारी ने अपने हाथ में पहनी अंगूठी उतार कर सुभाष चन्द्र से पूछा “क्या तुम इस अंगूठी में से निकल सकते हो”

सुभाष चन्द्र ने तुरंत ज़वाब दिया- जी हाँ निकल सकता हूँ!

अंग्रेज अधिकारी ने आश्चर्य से पूछा- कैसे ??

सुभाष बाबु ने तुरंत कागज की एक पर्ची पर अपना नाम लिखा और बड़ी ही आसानी से उस कागज को मोड़ कर उस अंगूठी के आर-पार निकाल दिया| अंग्रेज अधिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की इस तत्काल बुद्धि पर दांग रह गया|

कहानी का तर्क यह है, कि “शिक्षा वह नहीं जो आपको धन उपलब्ध करवाए, शिक्षा वह है जो आपको हर परिस्तिथि से निकाल लाए!”

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