झूठ का महल | Jhut ka Mahal Moral Stories in Hindi

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए जो कहानी “झूठ का महल | Jhut ka Mahal Moral Stories in Hindi” लेकर आएं हैं उसे पढ़कर आपको यकीं हो जाएगा की झूंठ बोलने वाला इन्सान जीवन में कभी सफल नहीं होता|

झूठ का महल | Jhut ka Mahal Moral Stories in Hindi

एक राजा के दरबार में एक कारीगर सालों से काम करता था| उसने राजा के लिए कई बेशकीमती महलों का निर्माण किया और बहुत सारा धन अर्जित कर लिया|

एक दिन उसके मन में विचार आया, कि अब मैंने इतना धन इक्कठा कर लिया है की अब में अपनी बाकि बची हुई ज़िन्दगी आराम से गुज़ार सकता हूँ| क्यों ना अब में राजा के लिए कारीगरी का काम छोड़ कर अपनी बाकि ज़िन्दगी एशो-आराम से जिऊ!

यही सब सोच कर वह राजा के महल में पहुंचा और उसने राजा से अपने मन की बात कही| राजा ने कारीगर की पूरी बात बड़े ध्यान से सुनी और कारीगर से कहा, “तुमने हमारे लिए कई बेशकीमती महलों का निर्माण किया है…हमारे राज्य में तुम जैसे कुशल कारीगरों की बहुत आवश्यकता है|

लेकिन जैसा की तुमने बताया कि अब तुम यह काम नहीं करना चाहते, हम तुम्हें स-सम्मान जाने की इज़ाज़त देतें हैं| लेकिन हमारी बड़ी दिली तम्मना थी, कि हम रानी के लिए एक सुन्दर से महल का निर्माण करवाएं| अगर तुम हमारे लिए उस महल का निर्माण कर सको तो हमें बड़ी ख़ुशी होगी|

कारीगर ने सोचा, मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी राजा की सेवा की है, अगर में इस महल का निर्माण नहीं करूँगा तो राजा मुझसे नाराज हो जाएगा| इसलिए कारीगर ने महल बनाने के लिए हाँ कर दी और महल के निर्माण में जुट गया|

काम करते-करते अचानक उसके मन में विचार आया की क्यों ना जल्दी से इस महल का निर्माण करके में विदेश यात्रा पर निकल जाऊ| बस फिर क्या था, कारीगर ने जल्दी काम ख़तम करने के चक्कर में भुसभूसी दीवालें खडी कर दी|

दीवालों पर ऊपर से सीमेंट की परत चढ़ती गई और अन्दर से खोखली| अन्दर से खोखला, परन्तु ऊपर से सोने जैसी चमक-दमक वाला महल जब बन कर तैयार हुआ कारीगर फटाफट राजा की सेवा में उपस्थित हुआ और बोला “महाराज, महल तैयार है|

अगले दिन राजा महल का निरिक्षण करने आया| महल वास्तव में बहुत ही आकर्षक और सुन्दर दिखाई पड रहा था| राजा ने कारीगर की बहुत प्रशंसा की और बोला, में तुम्हारे काम से बहुत प्रसन्न हूँ…और सोच रहा हूँ क्यों ना यह महल तुम्हें ही पुरुस्कार में दे दूँ| इतना कह कर राजा ने वह महल उस कारीगर को पुरुस्कार में दे दिया और वहां से चला गया|

राजा के जाने के बाद, कारीगर अपने किए पर बहुत पछताया और मुह छिपा कर रोने लगा|

कहानी का तर्क यही है, कि जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है सबसे पहले वही उस गड्डे में गिर जाता है| जो झूठ फरेब का महल खड़ा करता है, उसी के हिस्से में वह पड़ता है|


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