Short Motivational Story in Hindi | बुद्दिमान बंजारा

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Short Motivational Story in Hindi | बुद्दिमान बंजारा

“बुद्धि”, जानवर और इन्सान में अगर किसी चीजका अंतर है तो वह है “बुद्धि”, जिसके दम पर आज इन्सान इतनी ऊँचाइयों तक पहुँच गया है| अपनी बुद्धि से अब तक हमने बहुत उन्नति की है| आज की हमारी कहानी “Short Motivational Story in Hindi | बुद्दिमान बंजारा” इसी तथ्य पर आधारित है| 


       Short Motivational Story in Hindi | बुद्दिमान बंजारा

एक गाँव में  एक बहुत ही महनती बंजारा रहता था| एक बार वह अपने गाँव से बेलों के ऊपर मुल्तानी मिटटी लादकर शहर की और बेचने निकला| शहर तक पहुँचने वाले रास्ते में कई गाँव पड़ते थे| जब वह उन गावों से होकर गुज़रा तो मिटटी की गुणवत्ता देखकर गाँव में कई लोगो ने उससे मिटटी खरीद ली|  शहर तक पहुँचते पहुँचते उसके मिटटी से लदे हुए बोरे आधे खाली हो गए और सिर्फ आधे भरे हुए रह गए| वह बहुत खुश था| लेकिन परेशानी यह थी की अब आधे आधे बोरे बेलों की पीठ पर टिके कैसे? क्यों की बोरों का भर एक तरफ हो गया था| साथ आए नोकरों  ने परेशानी व्यक्त करते हुए अपने मालिक से परेशानी का हल पुछा| बंजारा बोला, “अरे! सोचते क्या हो, बोरों के एक तरफ रेत भर लो| यह राजस्थान की मिटटी है यहाँ रेत बहुत है| नोकरों ने ठीक वैसा ही किया| अब बेलों की पीठ पर एक तरफ रेत हो गई और एक तरफ मुल्तानी मिटटी| 

वे थोड़ी दूर आगे बढे ही थे की उन्हें दिल्ली की और से आता हुआ एक दूसरा व्यापारी मिला| व्यापारी ने बेलों पर लादे बोरों में से एक तरफ से रेट को झरते देखा तो उत्सुकतावश पुछा, – बोरों में एक तरफ रेत क्यों भरी है ? नोकरों ने सम्मान पूर्वक ज़वाब दिया, “संतुलन करने के लिए|” व्यापारी मुस्कुराया और बोला, “अरे! क्या तुम मुर्ख हो| लगता है तुम और तुम्हारा मालिक एक जैसे ही हो| बेलों पर मुफ्त में ही भार धो का उनको मार रहे हो| मिटटी के आधे-आधे बोरोन को एक तरफ बांध दो ताकि कुछ बेल तो बिना भार के चल सकेंगे| व्यापारी की बात सुनकर नोकर बोले, “महोदय! आपकी बात तो बिलकुल ठीक है, लेकिन हम हमारे मालिक की आज्ञा के बिना कुछ भी काम नहीं करते| कृपा करके आप यह बात हमारे मालिक को समझाए तो बड़ी कृपा होगी|

व्यापारी बेलों के मालिक से मिला और उनसे वही बात कही| व्यापारी की बात सुनकर बंजारे ने पुछा, “महोदय! आप कहाँ से है औ कहाँ जा रहें हैं? व्यापारी ने कहा, “में अजमेर शरीफ का रहने वाला हूँ| रूपए कमाने के लिए दिल्ली गया था| कुछ दिन दिल्ली रहा, फिर बीमार हो गया| जो थोड़े रूपए कमाए थे वह खर्च हो गए| व्यापार में घाटा हो गया| पास में कुछ नहीं रहा तो विचार किया घर चलना चाहिए| व्यापारी की बात सुनकर बंजारा अपने नोक्रों से बोला, “हमें इस व्यापारी की सलाह नहीं लेना चाहिए| हम वेसे ही चलेंगे जैसे चल रहे थे| इनकी बुद्धि तो ठीक दिखती है लेकिन उसका नातिजा ठीक नहीं दीखता, अगर नतीजा ठीक होता तो यह आज धनवान होते| हमारी बुद्धि भले ही ठीक ना हो लेकिन हमारे कामों का नतीजा हमेशा अच्छा ही होता है इसलिए हमने कभी व्यापर में घटा नहीं खाया| हमें इस व्यापारी की बात नहीं मानना चाहिए| 

कुछ ही दिनों में बंजारा अपने बेलों को लेकर दिल्ल्ही पहुंचा| वहां उसने बाज़ार में जाकर मिटटी और रेट दोनों के अलग-अलग ढेर बनाए और अपने नोकरों को जंगल में अच्छी चारे पानी वाली जगह पर बेलों को रखने का आदेश दिया और कहा की अगर यहाँ बेलों को चला पानी खिलाएंगे तो फिर मुनाफा कैसे कमाएँगे| बाज़ार में  व्यापारी की मिटटी बिकनी शुरू हो गई| उधर दिल्ली का बादशाह बीमार हो गया| वेध ने सलाह दी की अगर बादशाह राजश्थान की रेत के बने टीले पर रहें तो बादशाह का स्वास्थ्य ठीक हो सकता है| रेत में शरीर को निरोग करने की शक्ति होती है| इसलिए बादशाह को राजस्थान भेजा जाए|

“राजस्थान क्यों भेजे”, क्यों न राजस्थान की रेत यहीं पर मंगवा ली जाए| (मंत्रिमंडल ने सुझाव दिया)

राजा ने मंत्रिमंडल की बात सुनकर बाज़ार से राजस्थान की रेत मंगवाने का आदेश दिया|

अगले ही दिन राजा के सैनिक दिल्ली बाज़ार में सुबह-सुबह रेट लेने के लिए पहुंचे| सैनिकों ने पूरा बाज़ार छान मारा, लेकिन राजस्थान की रेट कहीं नहीं मिली| थक हार कर वह बाज़ार के चोराहे पर बेठ गए| तभी, अचानक उनकी नज़र एक मुल्तानी मिटटी की दुकान पर पड़ी| जहाँ मुल्तानी मिटटी के साथ-साथ एक रेत का ढेर भी पड़ा था| सिपाहियों की जान में जान आई| उन्होंने सोचा, “बड़े जातन के बाद यह रेत मिली है, अब इसका जो भी मोल हो ईसे बिना मोल भाव किये खरीद लेना चाहिए|” 

बादशाह के सिपाही बंजारे के पास गए और बंजारे से पुछा|

यह रेत कहाँ की है| 

राजस्थान की है हुजुर (बंजारे ने हाथ जोड़ते हुए कहा) हमें यह सारी रेत किसी भी मूल्य पर चाहिए, तुम इस रेत का भाव बताओ| सिपाहियों की बात सुनकर बंजारा बोला, “चाहे रेत खरीदो या मुल्तानी मिटटी दोनों एक ही भाव है, दोनों बेलों पर बराबर लदकर आएं हैं” बंजारे की बात सुनकर सिपहिंयों ने पूरी रेत खरीद ली|

कहानी का तर्क यही है की अगर बंजारा दिल्ली से आने वाले उस व्यापारी की बात मान लेता तो आज मुल्तानी मिटटी के भाव राजस्थान की रेत ना बेच पाता| इसीलिए इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमेशा अपने दिल की बात सुनकर ही कोई फैसला लेना चाहिए| दूसरों की बातों में आकर फैसला लेना वाला जीवन में हमेशा पछताता हैं|


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2 Comments on “Short Motivational Story in Hindi | बुद्दिमान बंजारा”

  1. एक और जबरदस्त कहानी ….. ऐसे ही लगे रहो वीरे – आपका फेन सिंह फैक्ट

    1. धन्यवाद सिंह, आपका हमारी वेबसाइट के प्रति यह प्रेम ही हमें लगातार लिखने की प्रेरणा देता है!

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