60 Best Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी साहब की 60 शानदार शायरिया | Rahat indori sher

Rahat Indori Shayari

साथियों नमस्कार, आज के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आएं है “राहत इन्दौरी साहब की कुछ नायब शायरियां | Rahat Indori Shayari” जिन्हें पढ़कर आप यकीनन अपने महबूब को याद करेंगे| राहत इन्दोरी साहब इंदौर से हैं|

हालाँकि इंदौर से कई कलाकार जैसे सलमान खान और लता मंगेशकर निकलें हैं जो आज बॉलीवुड ही नहीं देश दुनियां में छाए  हुए हैं| लेकिन राहत इन्दौरी साहब के चाहने वालों में आपको हर उम्र के लोग मिल जाएँगे|

तो आइये जानते हैं रहत इन्दौरी साहब को…. Rahat Indori Shayari


Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी साहब

राहत इंदौरी साहब उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध शायर होने के साथ-साथ हिंदी फिल्मों के गीतकार भी थे। राहत इंदौरी साहब का जन्म 1 जनवरी 1950 को रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के घर हुआ। राहत साहब अपने भाई बहनों में चौथे स्थान पर थे। उनकी दो बड़ी बहन ने तकीरेब़ व तहज़ीब थी।

उनके एक बड़े भाई अकील व एक छोटा भाई जिसका नाम आदिल था। राहत साहब के पिता एक कपड़ा मिल में कर्मचारी थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण प्रारंभ में उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने 10 वर्ष की आयु में ही काम करना शुरू कर दिया था।

राहत साहब ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर से ही पूरी की। उन्होंने 19 वर्ष की आयु में अपनी पहली कविता सार्वजनिक रूप से पड़ी थी। वर्ष 1973 में स्नातक की शिक्षा उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से ली। उसके बाद उन्होंने वर्ष 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एम. ए. किया।

इसके बाद 10 वर्षों तक उन्हें आगे बढ़ने के लिए बड़े असमंजस भरे समय से गुजरना पड़ा। फिर अपने मित्रों के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 1985 में मध्यप्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की शिक्षा ली। तत्पश्चात उन्होंने इंद्रकुमार कॉलेज इंदौर में उर्दू साहित्य पढ़ाया। जहां के मार्गदर्शन में कई छात्रों में शिक्षा ग्रहण की।

Rahat Indori Shayari……

राहत इंदोरी साहब की दो पत्नियां थी। वर्ष 1986 में उन्होंने पहली शादी सीमा राहत से की। जिससे उनकी एक बेटी शिबिल और दो बेटे फैंसल व सतलज राहत थे। फिर उन्होंने दूसरी शादी अंजुम रहबर से की थी।

शायर और गीतकार होने के साथ-साथ राहत साहब खेलों में भी अव्वल थे। वह अपने कॉलेज के दिनों में फुटबॉल व हॉकी टीम के कप्तान थे। इसके अतिरिक्त वह चित्रकारी भी काफी अच्छी करते थे। उनका प्रारंभिक व्यवसाय चित्रकारी ही था। वह बॉलीवुड फिल्मों के पोस्टर और बैनर पेंट करते थे। और किताबों के कवर के डिजाइन करते थे।

राहत साहब पिछले 40-50 सालों से मुशायरो व कवि सम्मेलनों में प्रस्तुति दे रहे थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से कविताओं का पाठ किया और अमेरिका, ब्रिटेन, यूएइ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर जैसे विभिन्न देशों की यात्रा की। अपने बॉलीवुड करियर में एक अलग पहचान बनाने वाले राहत इंदोरी साहब को इंडियन टेलीविजन के प्रसिद्ध शो “द कपिल शर्मा शो” में दो बार अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।

हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार राहत साहब ने कई सफल फिल्मों के लिए गीत लिखे, जो आज हर कोई गुनगुनाता है। “बुलाती है, मगर जाने का नहीं” नाम की उनकी एक कविता टिक टॉक पर काफी वायरल हुई। यह कविता फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी ट्रेड करने लगी थी।

शायरों में एक अलग पहचान रखने वाले राहत इंदौरी साहब का निधन 11 अगस्त 2020 को इंदौर के अरविंदो अस्पताल में कोरोनावायरस से संक्रमित होने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ।

राहत साहब जिनका जन्म इंदौर में हुआ। साथ ही उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भी इंदौर से ही ग्रहण की। और अंतिम साँस भी इंदौर में ही ली। अपने गीत, गजलों से विदेशों तक पहचान बनाने वाले राहत साहब अपनी जन्मभूमि से कभी विलग्न नहीं हुए और उन्होंने इंदौर शहर को अपने नाम में बसा लिया। इसलिए वह राहत कुरेशी नहीं, बल्कि राहत इंदौरी के नाम से जाने जाते हैं।

Rahat Indori Shayari


50 Best Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी साहब की 50 शानदार शायरिया

(1)
रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया,
जनवरी गुज़रा नहीं था की दिसंबर आ गया!
ये शरारत है, सियासत है या साजिश है कोई,
शाख पर फल आए..इस से पहले पत्थर आ गया!
अपने दरवाज़े पर मेने पहले खुद आवाज़ दी,
और फिर कुछ देर में खुद ही निकल कर आ गया!
मेने कुछ पानी बचा रखा था अपनी आँख में,
की समंदर अपने सूखे होंठ लेकर आ गया||


(2)
अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ,
में चाहता था चिरागों को आफ़ताब करूँ!
खुदा से मुझको इजाजत अगर कभी मिल जाए,
तो शहर भर के खुदाओं को बेनकाब करूँ!
है मेरे चरों तरफ भीड़ गूंगे-बहरों की,
किसे खतिफ बनाऊं किसे ख़िताब करूँ!
उस आदमी को बस एक धुन सवार रहती है,
बहुत हसीं है दुनियां इसे ख़राब करूँ!
में करवटों के नए साए पर लिखूं शब्द भर,
ये इश्क है तो कहाँ से नदियाँ साफ करूँ!!


(3)
झूंठ से सच से जिससे भी यारी रखें,
आप तो अपनी तकरीर ज़ारी रखें!
इन दिनों आप मालिक है बाज़ार के,
जो भी चाहें वो कीमत हमारी रखें!
आपके पास चोरों की फेहिस्त है,
सब पे दस्ते करम बारी-बारी रखें!
सैर के वास्ते और भी देश हैं,
रोज़ तैयार अपनी सवारी रखें!
वो मुकम्म्मल भी हों ये ज़रूरी नहीं,
योजनाएं मगर ढेर सारी रखें!!


(4)
तेरी हर बात मुहोब्बत में गवांरा करके,
दिल के बाज़ार में बैठे है खसारा कर के!
आसमानों की तरफ फेंक दिया है मेने,
चंद मिटटी के चरागों को सितारा कर के!
में वो दरिया हूँ की हर बूंद भंवर है जिसकी.
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा कर के!
आते जाते हैं कई रंग मेरे चहरे पर,
लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के!
मुल्तज़िर हूँ की सितारों की ज़रा आँख लगे,
चाँद को छत पर बुला लूँगा इशारा कर के!!


(5)
किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है,
आप तो अन्दर है.. ये बाहर कौन है!!
शहरों में तो बारूदों का मौसम है,
गाँव चलों ये अमरूदों का मौसम है!!

Rahat Indori Shayari


(6)
राज़ जो कुछ हो इशारों में बता भी देना,
हाथ जब उनसे मिलाना..तो दबा भी देना!!
वैसे इस ख़त में कोई बात नहीं है,
फिर भी अह्तियातन, इसे पढलो…तो जला भी देना!!


(7)
मेरी सांसों में समाया भी बहोत लगता है
और वही शक्श पराया भी बहोत लगता है!!
उस से मिलने की तमन्ना भी बहोत है,
लेकिन आने-जाने में किराया भी बहोत लगता है||


(8)
फैसला जो कुछ भी हो मंज़ूर होना चाहिए,
जंग हो या इश्क हो भरपूर होना चाहिए!!
कट चुकी है उम्र सारी जिनकी पत्थर तौड़ते,
अब तो इन हाथों में कोहिनूर होना चाहिए||


(9)
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं,
मोहोब्बत की इसी मिटटी को हिन्दुस्तान कहते हैं!!
जो ये दिवार का सुराख़ है… साजिश का हिस्सा है,
मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं!!
जो दुनियां को सुने दे उसे कहते हैं ख़ामोशी,
जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफान कहते हैं!!
मेरे अन्दर से एक-एक कर के सब कुछ हो गया रुखसत,
मगर एक चीज बाकी है जिसे इमान कहते हैं!!


(10)
सिर्फ खंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए,
ए खुदा दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए!!
मैंने अपनी खुश्ख अंकों से लहू छलका दिया,
एक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए!!

Rahat Indori Shayari


(11)
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहे,
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे!!
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें!!


(12)
सबको रुसवा बारी-बारी किया करो,
हर मौसम में फतवे ज़ारी किया करो!!
रोज़ वही एक कौशिश जिंदा रहने की,
मरने की भी कोई तैयारी किया करो!!
चाँद ज्यादा रोशन है तो रहने दो,
जुगनू भैया जीमत भारी किया करो!!


आप पढ़ रहें हैं Rahat Indori Shayari हिंदी में


(13)
अँधेरे चरों तरफ साएँ-साएँ करने लगे,
चिराग हाथ उठाकर दुआएं करने लगे!
सलीका जिनको सिखाया था हमने चलने का,
वो लोग आज हमें दाएं-बाएँ करने लगे!!
तराकी कर गए बिमारियों के सौदागाए,
ये सब मरीज़ है जो अब दवाएं करने लगे!!
अजीब रंग था मजलिस का… खूब महफिल थी,
सफ़ेद पोश उठे और काएं-काएं करने लगे!!


(14)
कभी अकेले में मिलकर झंजोड़ दूंगा उसे,
जहाँ-जहाँ से वो टुटा है, जोड दूंगा उसे!!
वो मुझे छोड़ गया ये कमाल है उसका,
इरादा मैंने किया था की छोड़ दूंगा उसे!!
पसीने बांटता फिरता है हर तरफ सूरज,
कभी जो हाथ लगा निचोड़ दूंगा उसे!!
मज़ा चखा के ही माना हूँ में भी दुनियां को,
समझ रही थी की ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे!!


Rahat Indori Mushaira |

(15)
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया,
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया!!
अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब है,
लोगों ने पूछ-पूछ के बीमार कर दिया!!
दो गज़ सही पर ये मेरी मिल्कियत तो है,
ऐ मौत तूने मुझे ज़मीदार कर दिया!!


(16)
मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो,
आसमा लाए हो…ले आओ, ज़मी पर रख दो!
अब कहाँ ढूंढने जाओगे हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इलज़ाम हमीं पर रख दो!!
मैंने जिस ताख पे कुछ टूटे दीए रखे हैं,
चाँद तारों को भी ले जा के वहीँ पर रख दो!!


(17)
उसकी कत्थई आँखों में है जंतर-मंतर,
चाकू-वाकू, छुरियां-वुरियाँ, खंजर-वंजर सब!!
जिस दिन तुम रूठी, मुझसे रूठे हें हैं,
चादर-वादर, तकिया-वाकिया, बिस्तर-विस्तर सब!!
मुझसे बिछड कर वो भी कहाँ पहले जैसी है,
फीके पड गए कपडे-वपड़े, जेवर-वेवर सब!!


(18)
अगर खिलाफ है तो होने दो, जान थोड़े हैं…
ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है!
लगेगी आंग तो आएँगे घर कई ज़द में,
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है!!
हमारे मुह से जो निकले वही सदाकत है,
हमारे मुह में तुम्हारी जुबां थोड़ी हे!!
जो आज साहिबे मसनद है… कल नहीं होंगे,
किराएदार है ज़ाती मकान थोड़ी है!!
सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है!!


(19)
अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नहीं हूँ!
वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उससे कहो में मरा नहीं हूँ!!
वो कह रहा है की कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी,
है उसकी आदत, डरा रहा है, है मेरी फितरत डरा नहीं हूँ!!


(20)
बनके एक हादसा बाज़ार में आ जाएगा,
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा!!
चौर उच्चकों की करो क़द्र,
मालूम नहीं कल कौन किसकी सरकार में आ जाएगा!!
नई दुकानों के चक्कर से निकल जा,
वरना घर का सामान भी बाज़ार में आ जाएगा||

Rahat Indori Shayari


(21)
सिर्फ खंजर ही नहीं आखों में पानी चाहिए,
ऐ खुदा दुसमन भी मुझको खानदानी चाहिए


(22)
फूलों की दुकाने खोलो खुशबू का व्यापार करो,
इश्क खता है तो ये खता एक बार नहीं सौ बार करो!!


(23)
ज़िन्दगी की हर कहानी बेअसर हो जाएगी,
हम ना होंगे तो ये दुनियां दरकदर हो जाएगी!
पाँव पत्थर कर के छोड़ेगी गर रुक जाएगी,
चलते रहिये तो ज़मीं भी हमसफ़र हो जाएगी!!


(24)
कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है,
नई हवाओं की सौबत बिगाड़ देती है!!
जो जुर्म करते हैं इतने बुरे नहीं होते,
सज़ा न देके अदालत बिगड़ देती है!!
ये चलती फिरती दुकानों की तरह लगते हैं,
नए अमीरों को दौलत बिगड़ देती है!!


(25)
सुला चुकी थी ये दुनियां, थपक-थपक के मुझे!
जगा दिया तेरी एक पाज़ेब ने खनक के मुझे!!
कोई बताए के में इसका क्या इलाज करूँ,
परेशां करता है ये दिल धड़क-धड़क के मुझे!!

Rahat Indori Shayari


(26)
सरहदों पर बहुत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या!!
खौफ बिखरा है दौनों समतों में,
तीसरी सम्म्प्त का दबाव है क्या!!


(27)
अन्दर का ज़हर चुम लिया धुल के आ गए,
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए!!
सूरज से जंग जितने निकले थे बेवकूफ,
सारे सिपाही मॉम के थे घुल के आ गए!!


(28)
इश्क में जीत के आने के लिए काफी हूँ,
में अकेला ही ज़माने के लिए काफी हूँ!!
मेरे हर हकीकत को मेरी खाख समझने वाले,
में तेरी नींद उड़ाने के लिए काफी हूँ!!
मेरे बच्चों मुझे दिल खोल के तुम खर्च करो,
में अकेला ही कमाने के लिए काफ़ी हूँ!!
एक अख़बार हूँ औकात ही क्या मेरी,
मगर शहर में आग लगाने के लिए काफी हूँ!!


(29)
चलते फिर्तेहुए महताब दिखाएँगे तुम्हें,
हमसे मिलना कभी पंजाब दिखाएँगे तुम्हे!!
चाँद हर छत पे है सूरज है हर एक आँगन में,
नींद से जागो तो कुछ ख्वाब दिखाएँगे तुम्हे!!
पूछते क्या हो की रूमाल के पीछे क्या है,
फिर किसी रोज़ ये सैलाब दिखाएंगे तुम्हें!!


(30)
बुलाती है मगर जाने का नहीं,
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं!!
मेरे बेटे किसी से इश्क कर,
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं!!
कुशादा ज़र्फ़ होना चाहिए,
झलक जाने का, भर जाने का नहीं!!
सितारे नौच कर ले जाऊंगा,
में ख़ाली हाथ घर जाने का नहीं!!
वो गर्दन नापता है, नाप ले…
मगर ज़ालिम से डर जाने का नहीं!!


Rahat Indori Kavita” 

(31)

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी
हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है


(32)

यह हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था
मेरा नसीब मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी मांग में सिंदूर भरने वाला था।


(33)

छू गया जब कभी ख्याल तेरा
दिल मेरा देर तक धड़कता रहा
कल तेरा जिक्र छिड़ गया था, घर में
और घर देर तक महकता रहा।


(34)

कभी महक की तरह हम गुलो से उड़ते हैं
कभी धुएँ की तरह परबतों से उड़ते हैं
ये कैंचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेगी
कि हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं।


Rahat indori sher | राहत इन्दोरी साहब के नायब शेर 

(35)

जुबाँ तो खोल नजर तो मिला जवाब तो दे, मैं कितनी बार लुटा हूं मुझे हिसाब तो दे।


(36)

शाखों से टूट जाएं वह पत्ते नहीं है,हम आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे।


(37)

कहीं अकेले मे मिलकर झंझोड़ दूंगा उसे,
जहां जहां से वो टूटा है, जोड़ दूंगा उसे मुझे वह छोड़ गया यह कमाल है, उसका इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे।


(38)

जा के ये कह दो कोई शोलो से, चिंगारी से
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तय्यारी से बादशाहो से भी फेंके हुए सिक्के ना लिए हमने खैरात भी मांगी है, तो खुद्दारी से।


(39)

उसकी याद आई है, सांसों जरा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है।


(40)

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भँवर है, जिसकी
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

Rahat Indori Shayari


(41)

हर एक हर्फ का अंदाज बदल रक्खा है आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा है मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक ताजमहल रक्खा हैं।


(42)

बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाए।


(43)

किसने दस्तक दी दिल पे, ये कौन है आप तो अंदर है, बाहर कौन है।


(44)

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चांद पागल है, अंधेरे में निकल पड़ता है।


(45)

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।

Rahat Indori Shayari


(46)

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते।


(47)

बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा,
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा।


(48)

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको,
वहां पर ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं।


(49)

सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ,
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए।


(50)

सिर्फ खंजर ही नहीं आंखों में पानी चाहिए,
ए खुदा दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए।

Rahat Indori Shayari


(51)

राज़ जो कुछ हो इशारों में बता भी देना,
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना।


(52)

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे,
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे।


(53)

आग के पास कभी मोम को लाकर देखूं,
हो इज़ाज़त तो तुझे हाथ लगाकर देखूं।


(54)

भूलना भी हैं, जरुरी याद रखने के लिए,
पास रहना है, तो थोडा दूर होना चाहिए।


(55)

फैसला जो कुछ भी हो, हमें मंजूर होना चाहिए,
जंग हो या इश्क हो, भरपूर होना चाहिए।

Rahat Indori Shayari


(56)

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ।


(57)

मेरे अधूरे शेर में थी कुछ कमी मगर,
तुम मुस्कुरा दिए तो मुझे दाद मिल गयी।


(58)

जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो,
बहरों का इलाक़ा है ज़रा ज़ोर से बोलो।


(59)

इसे तूफां ही किनारे से लगा देते हैं,
मेरी कश्ती किसी पतवार की मोहताज नहीं।


(60)

मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।


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