बेवकूफ गधा | Bewakoof Gadha Moral Stories in Hindi

Bewakoof Gadha Moral Stories in Hindi

बेवकूफ गधा | Bewakoof Gadha Moral Stories in Hindi


Bewakoof Gadha Moral Stories in Hindi

एक गाँव में एक गधा और एक कुत्ता अपने मालिक की सेवा में दिन रात लगे रहते थे | गधा रोज़ धोबी की उसके कपडे ढोने में मदद करता था| कुत्ता दिन में घाट पर कपड़ो की और  रात में धोबी के घर की रखवाली करता था|

एक रात धोबी और उसकी पत्नी रात के वक़्त घर में बेफिक्र होकर सो रहे थे, तभी उनके घर में एक चोर घुस गया| उस समय धोबी का गधा और कुत्ता दोनों घर के आँगन में बंधे हुए थे|

गधे की नज़र जैसे ही चौर पर पड़ी उसने कुत्ते से कहा….

देखो मित्र…मालिक के घर में चौर घुस आया है…

तो उसमें में क्या करूँ….( कुत्ते ने झुंझलाते हुए कहा )

अरे मुर्ख, ये तू कैसी बाते कर रहा है| मालिक तेरा भरोसा कर के चैन की नींद सो रहें हैं और तू यहाँ उनको धोका देने की बाते कर रहा है | तुम जोर-जोर से भोंक कर मालिक को जगाओ ताकि मालिक चौर को पकड़ सके| (गधे ने कुत्ते को समझाते हुए कहा )

गधे भाई, तुम बेवजह मेरे काम की चिंता मत करो…तुम अपने काम के बारे में सोचो, मुझे मत समझाओ| मुझे पता है क्या करना है| क्या तुम नहीं जानते हम मालिक की कितनी सेवा करते हैं, फिर भी मालिक हमारा बिक्लुल भी ध्यान नहीं रखते| अब तो मालिक नेमुझे ढंग से खाना देना भी बंद कर दिया है| मुझे पता है, जब तक मालिक का नुकसान नहीं हो जाता उन्हें अपनी फिकर नहीं होगी| इसलिए में कुछ भी नहीं करने वाला|

Bewakoof Gadha Moral Stories in Hindi

कुत्ते की बात सुनकर गधा बोला “जो नोकर काम आने पर अपनी मांगे स्वमिके आगे रख देता है, वो नोकर वफादार नहीं होता| आज मालिक पर संकट आया है तो तू अपने फायदे की बात सोच रहा है|”

कुत्ते को गधे की बात सुनकर गुस्सा आ गया और वह बोला “जो मालिक काम पड़ने पर ही अपने नौकरों से बात करे वो मालिक भी अच्छा नहीं होता| अपने नौकरों का ख्याल रखना भी मालिक का कर्त्तव्य होता है|”

कुत्ते की बाते सुनकर गधा भी क्रोध से आँखे लाल करके बोला “तुम गलत हो, तुम अपना काम नहीं कर रहे हो| लकिन में अपना कर्त्तव्य पूरा निभाऊंगा| में अपनी आवाज़ से मालिक को जगाने का प्रयास करता हूँ”

और गधा जोर-जोर से  रेकने लगा| अब कहाँ कुत्ता और कहाँ गधा| चौर तो भाग गया पर तीखी और बेसुरी आवाज़ सुनकर धोबी की नींद ख़राब हो गई| धोबी को बहुत गुस्सा आया और वह गुस्से में डंडा लेकर गधे पर टूट पड़ा| गुस्से-गुस्से में उसने गधे को मार-मार कर अधमरा कर दिया|

कहानी का तर्क यह है, कि दूसरों के काम में कभी दखल नहीं देना चाहिए और बिना सोचे-विचारे जल्दबाजी में कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए|

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