मित्र धर्म | Hindi Kahani | Story in Hindi

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मित्र धर्म | Hindi Kahani | Story in Hindi


दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता जो हम इस संसार में जन्म लेने के बाद बनाते हैं| दोस्त, एक ऐसा इन्सान जो हमरे हर सुख दुःख में हमारे साथ रहता है| ईएसआई ही दोस्ती के कई किस्से हमें आजकल सुनने को मिल जाते हैं लेकिन कई सैलून पहले दोस्ती को भी एक धर्म समझा जाता था और जो इस धर्म का पालन करना सिख जाए उसे ज़िन्दगी में कभी भी अकेलापन महसूस नहीं हो सकता तो आइये ऐसे ही एक किस्से से कुछ सिखने का प्रयास करते हैं…..मित्र धर्म | Hindi Kahani | Story in Hindi

                                    मित्र धर्म | Hindi Kahani

एक बार मगध के राजा ने अपना राज्य-पाट राजकुमार को सोंपकर शेष बचा जीवन धर्म कार्य में लगाने और धर्म यात्राएं करने का निश्चय किया| लेकिन धर्म यात्रा पर जाने से पहले वे चाहते थे की उनके पुत्र का प्रधानमंत्री कुशल और योग्य होने के साथ साथ धर्म के मर्म को भी समझता हो, ताकि राज्य पर कोई भी विपत्ति आने पर प्रधानमंत्री के धर्म का पालन करते हुए वह अपने राजा को सही राय दे सके|

परीक्षा लेने के लिए राजा ने अगले दिन ही राज्य में यह घोषणा करवा दी की वे राजकुमार को देश-निकाला दे रहे हैं और जो भी राजकुमार का साथ देगा, उसे भी मृत्युदंड दिया जाएगा| खबर पुरे राज्य में आग की तरह फ़ैल गई| राजकुमार के तिन घनिष्ठ मित्र थे जो राजकुमार के लिए अपनी जान पर खेल जाने का दावा करते थे| परन्तु राजकुमार जब अपने मित्रों से मिलने गया तो उनमें से दो मित्रों ने मिलने से भी मन कर दिया| तीसरा मित्र बोला, “मित्र! में बचपन से अब तक तुम्हारे हर सुख दुःख में साथ रहा हूँ| इस दुःख की घडी में भी में तुम्हारे साथ हूँ और तुम्हें जहाँ भी मेरी आवश्यकता होगी में तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा| लेकिन में एक बार राजा से मिलकर कुछ बातें करना चाहता हूँ|”

अगले दिन राजकुमार का तीसरा मित्र राजमहल पहुंचा और और बड़ी ही विनम्रता से उसने राजा से पुछा, “महाराज! आख़िरकार राजकुमार ने ऐसा कोनसा अपराध किया है जो उन्हें देशनिकाला दिया जा रहा है ? बिना कोई अपराध किये किसी को भी दंड देना उचित नहीं है|

राजा ने राजकुमार के मित्र से पुछा, ” तुम राजकुमार की छोड़ो, अपनी बताओ| तुम राजकुमार का साथ दोगे या नहीं ?

राजा की बात सुनकर राजकुमार का मित्र बोला, “में प्राण देकर भी मित्र धर्म का पालन करूँगा| राजा समझ गया की जो किसी भी परिस्तिथि में मित्र धर्म का पालन कर सकता है असल में वही राज्य के प्रधानमंत्री पद के योग्य हो सकता है|

अगले ही दिन राजा राजकुमार को राज्य सोंपकर और उसके मित्र को प्रधानमंत्री पद सोंपकर धर्म यात्रा की और निकल गया|

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