कहानी चित्तोड़ की रानी पद्मावती की-Rani Padmawati History in Hindi

Padmawati Story

कहानी चित्तोड़ की रानी पद्मावती की-Rani Padmawati History in Hindi


चित्तोड़ (chittor), वीरता और पराक्रम का जीता जागता उदारहण है| अपनी पुरातात्विक धरोहर को समेटें हुए चित्तोड़ का विशाल किला (chittorgarh fort) आज भी अपनी गाथाएँ कह रहा है! वर्षभर चित्तौड़गढ़ के इस विशाल किले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग चित्तोड़ आते हैं। विदेशों तक में भी इस किले की बनावट एवं खूबसूरती का जिक्र होता है। किले के एक-एक भाग को बारीकी से देखने एवं समझने के लिए पर्यटकों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। लेकिन इसी किले का एक हिस्सा ऐसा है, जहां जाने की कोई हिम्मत नहीं करता।
“चित्तौड़गढ़ किले का ‘जौहर कुंड’, जहां जाना तो दूर, कोई ख्याल में भी इस जगह के पास जाने की नहीं सोचता। हालाकिं कुछ लोगों ने इस जगह पर जाने की कोशिश भी की है, लेकिन वे आखिर में इस कुंड तक पहुंचने में असफल हो जाते हैं। ऐसा कुछ लोगो का कहना है, कि जोहर की चीख ओर साधारण जनता का विलाप आज भी रात में इस किले में गूंजता है!

Rani Padmawati History in Hindi

रानी पद्मिनी, चित्तौड़ की रानी थीं। वे सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी थीं। बचपन से ही उनके माथे के तेज और खूबसूरती के चर्चे हर जगह होते थे। रानी पद्मिनी के बड़े होने पर जब विवाह का समय आया तो, अपनी सुंदर-सुशील पुत्री के लिए राजा ने स्वयंवर का प्रबंध किया।

किंतु यह कोई सामान्य स्वयंवर नहीं था। कहते हैं, कि भारत के इतिहास में आज तक हुए सभी स्वयंवर में सबसे चर्चित स्वयंवर था, राजकुमारी पद्मिनी का। क्योंकि इस स्वयंवर में स्वयं राजकुमारी ने एक शर्त रखी थी, जिसे जान वहां आए सभी राजा-महाराजा चकित रह गए थे।

राजकुमारी की शर्त के अनुसार वे उसी से विवाह करेंगी जो उनके द्वारा मैदान में उतारे हुए योद्धा को पराजित कर सकेगा। आए हुए सभी राजा-महाराजा को आश्चर्य तो तब हुआ, जब बाद में सबको यह ज्ञात हुआ कि वह योद्धा कोई और नहीं, वरन् स्वयं राजकुमारी पद्मिनी ही थीं।

खैर, स्वयंवर आरंभ हुआ, एक के बाद एक दावेदार उस योद्धा को हराने के लिए आगे आए, लेकिन किसी में इतना कौशल नहीं था कि वे उसे पराजित कर सकें। तब आए चित्तौड़ के राजा रतन सिंह(Ratan singh) और उन्होंने उस योद्धा को हराकर शर्त जीत ली। ओर रानी पद्मिनी से उनका विवाह हुआ!

Rani Padmawati History in Hindi

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कहानी चित्तोड़ की रानी पद्मावती की-Padmawati Story

12 वी और 13 वी शब्ताब्दी में दिल्ली के शाशकों का मेवाड़ पर आक्रमण बढ़ रहा था! इसी बिच अल्लाउद्दीन खिलजी (alluddin khilji) को चित्तोड़ की रानी पद्मावती की सुन्दरता के बारे में पता चला तो अल्लाउद्दीन खिलजी रानी पद्मिनी को पाने को आतुर हो गया और अपनी विशाल सेना के साथ चितोड़ आ धमका! अल्लाउद्दीन खिलजी ने राजा रतन सिंह को संदेशा भिजवाया की वो रानी पद्मावती को बहन के रूप में देखता है और उनसे एक बार मिलना चाहता है! राजा रतन सिंह को अपने दुर्ग (FOrt) को अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना से बचाने का एक मौका मिल गया! राजा ने अल्लाउद्दीन खिलजी की बात को मानते हुए रानी पद्मावती (Padmawati) को कांच में दिखाने का निर्णय लिया| लेकिन अल्लाउद्दीन खिलजी रानी के सोंदर्य को देख कर मोहित हो गया| अल्लाउद्दीन खिलजी ने राजा रतन सिह को धोके से बंदी बना लिया और राजा रतन सिंह के बदले में रानी पद्मावती की मांग की| चित्तोड़ के सेनिकों को जब इस बात का पता चला तो वे रानी और उनकी दासियों के वेश में पालकियों में बेठ कर दुर्ग से निचे अल्लाउद्दीन खिलजी के तम्बू तक गए जहाँ रजा रतन सिंह को बंदी बना कर रखा गया था| पालकियों से निचे उतरते ही चित्तोड़ के सैनिकों ने अल्लाउद्दीन खिलजी की सेना से मरते दम तक युद्ध किया| राजा और उनके सैनिकों की वीरगति का समाचार पा रानी पद्मिनी ओर 16000 राजपूत रमणीया जोहर की आग में कूद गई, जिससे मुसलमानो के हाथों कुछ ऐसा ना लगे कि वे हिन्दू समाज का अहित कर सके !!


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