Poem on Life in Hindi | जिंदगी से क्यूँ डरना

जिंदगी से क्यूँ डरना

साथियों नमस्कार, आज के अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं Hindi Short Stories की लेखिका “रुपाली सिंह” द्वारा लिखी ज़िन्दगी से जुडी एक ऐसी कविता “जिंदगी से क्यूँ डरना | Poem on Life in Hindi” जो आपको ज़िन्दगी जीने के नए आयामों से अवगत करवाएगी| इस कविता को पढने के बाद आप ज़िन्दगी  को एक नए सिरे से देखना शुरू करेंगे| आशा है आपको हमारा यह संकलन ज़रूर पसंद आएगा|


जिंदगी से क्यूँ डरना | Poem on Life in Hindi

क्यूँ डरना की जिंदगी में क्या होगा…
क्यूँ डरना की किसी खास व्यक्ति को खोने से क्या होगा.. जीवन तो बदलाव का रूप हैं..
प्यार का पैगाम हैं.. मिलने – बिछड़ने का पयाम हैं..
ये काफिलों का सिलसिला नए – पुराने मुसाफिरों के साथ तय होता रहेगा…

जब पता हैं, जिंदगी मिलने – बिछड़ने का पयाम हैं.. प्यार का पैगाम हैं…
तो यूँ भयभीत होकर राह तय करने से क्या होगा…
स्वाभिमान की लड़ाई नहीं होती हैं आसान….
आहे इसकी होती हैं तूफान…
सांसो मैं होती हैं घुटन..
सीने मैं होती हैं बहोत सी चुभन…

पर आज सच्चाई के लिए नहीं उठे,
तो सारी उम्र एक बात के लिए यूँ रो – रोकर क्या होगा..
रोना – हँसना, गुस्सा होना और उम्मीदों को कायम रखना…
भावनाओ के प्रकार हैं.. इन्हें प्रदर्शित करने का ज्ञान नहीं…
तो, यूँ दूसरों पर इल्जाम लगाने से क्या होगा..

Rupali Singh
MUMBAI


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