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Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

साथियों नमस्कार, कभी कभी इन्सान कुछ ऐसे रिश्तों में फंस जाता है जहाँ उसे अपने सपने पीछे छुटते नज़र आते हैं| ऐसी ही एक कहानी “Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी” हमारी लेखिका लिपि चौहान ने हमें भेजी है, आशा है आपको हमारा यह संकलन पसंद आएगा|


Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

आज घर में अकेली थी ,राधा काम करके जा चुकी थी ,रवि ऑफिस जा चुके थे और में सारा काम निपटा के रेडियो पर गाने सुन रही थी। सुनते-सुनते नज़र शर्मा जी की बालकनी में टंगे पिंजरे पर पड़ी जहा एक प्यारा सा मिट्ठु  था।

एक खुबसुरा बोलने वाला मिट्ठू ,  जो अब बंद पिंजरे में चुप सा हो गया था। उसकी आँखे बस आकाश को देखती हुई आज़ादी का इंतज़ार करती थी उड़ने का इंतज़ार करती थी|

मुझे उससे हमदर्दी सी होने लगी वो तो एक असहाय पंछी है पर में तो इंसांन हूँ वो पिंजरा नहीं खोल सकता पर में सारे दरवाजे खोल सकती हूँ , पर क्यों हूँ  मै आज इस मुकाम पर?

माँ-पापा की चहेती,  भाई की जान और हर एक फंक्शन की जान थी मै| मुझे आज भी याद है, कॉलेज के उस फंक्शन में मेरे डांस परफॉरमेंस के बाद वन्स मोर-वन्स मोर की आवाजे आ रही थी| सारे टीचर्स और प्रिन्सिपल सर मेरी माँ को घेर कर खड़े थे|

प्रिंसिपल  तारीफ़ करते नहीं थक रहे थे| यही नहीं में कॉलेज टापर भी थी| मेरे यही सारे गुण देख कर रवि मर मिटे थे मुझ पर और मेरा हाथ मांग लिया| घर नौकरी सब अच्छी देख कर पापा ने भी मेरी शादी कर दी|

पहला एक साल तो प्यार मोहब्बत में कुछ ऐसा गुज़रा की पता ही नहीं चला| रवि की दीवानगी थी ही कुछ ऐसी थी| लेकिन वो दीवानगी सिर्फ दीवानगी नहीं थी एक ऐसा पिंजरा जो में मेरे लिए तैयार कर रही थी| जिसमे अब मेरा दम घुटता था|

मेरी खूबसूरती कोई और देखे तो रवि बर्दाश्त नहीं कर सकते थे| कोई मेरी कोई तारीफ़ करे ये भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था| मै ज्यादा सजु-सवरू तो ताने मिलते थे|

एक कॉम्पिटिशन में भाग लेने के लिए जब मैने रवि से पूछा तो उन्कहोंने कह दिया की मेरी बीवी बीच बाजार में नाचे मुझे पसंद नहीं| क्या मेरी कला जो पूरी दुनिया पसंद करती है वो अब बाज़ारू भी हो गई थी ?

दिन ब दिन उम्मीदे मेरा दामन छोड़ रही थी और में उन चार दीवारों में सिमटती जा रही थी|

मेरा किसी पडोसी से बात करना भी रवि को पसंद नहीं था| क्या यही प्यार था उसका जो मुझे कैद करता जा रहा था| शाम हो चुकी थी, में अपने लिए चाय बनाकर लाई और बालकनी में पी ही रही थी की घंटी बजे देखा तो रवि थे और कुछ जल्दी में थे…

पूछा तो कहने लगे की मीटिंग है और उसके बाद  पार्टी लेट हो जाऊंगा आने में|

मैंने  कहा कुछ जरुरी बात है तो कहने लगे फ़िज़ूल में परेशान न करो  जल्दी से सूट निकालो मुझे जाना है| पता नहीं मेरे अंदर कौन सी लहर दौड़ गई की मेने कहा फ़िज़ूल नहीं बहुत ज़रूरी है और आज सुनना होगा|

रवि गुस्से में मेरी तरफ देखने लगे मेने भी उनसे आँख से आँख मिला कर कहा, आज मेरी गुरु माँ का कॉल आया था| उन्होंने कहा की आगरा कत्थक फेस्टिवल में, मैं  गुरुकुल को रिप्रेजेंट करू|

यह सुनते ही रवि का कटाक्ष मेरे कानो में पड़ा| वो कुछ बोलते इससे पहले ही मैंने  कहा, पूछ नहीं रही हूँ बता रही हूँ| कल आगरा के लिए निकल जाउंगी और हां अभी मुझे टिकट्स करना है। जा रही  हूँ।

रवि ने कहा, जा रही हो तो दुबारा इस घर में मत आना| मैंने कहा घर और अलमारी की चाबियां टेबल पर रखी है आपके जरुरी पेपर उस ड्रावर में है और आपको बोलने की जरुरत नहीं मैंने घर छोड़ने का फैसला उस वक़्त ही कर लिया था जब आपने मेरी कला को बाज़ारू कहा  था| बस हिम्मत आज जुटा पाई हूँ।

घर से बहार आते ही महसूस हुआ जो ख़ुशी एक अरसे से गुम थी आज मिल गई|

Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

लिपि चौहान


Success Story in Hindi | आत्मविश्वाश 

दिन गर्मियों के थे, हम सब सयुंक्त परिवार में रहते थे। एक दिन मेरी कॉलोनी में कुछ खूबसूरत सी लड़कियों का आना हुआ, बात करने पर पता चला कि वो मुम्बई से आई थी।

हाव-भाव, चाल-ढाल से एकदम शहरी। मैं जो कि अभी तेरह की हुई थी, उनको देखकर बहुत प्रभावित थी। आखिर बात हुई, दोस्ती हुई….फिर घूमना, बाते करना।

अक्सर मैं उनको देखकर उन जैसा बनने की कोशिश करती| समय बीतने लगा और कोशिश बढ़ गयी, पर कोई तारीफ नही बस कोशिश……पढ़ाई में होशियार थी अब जो समय पढ़ाई का था वो सुंदर दिखने और तारीफ पाने में लगने लगा।

उम्र का वो दौर, हार्मोन की उथल पुथल, सब कुछ जैसे अजीब था। एक सीधी साधी लड़की को अब उड़ना था, लेकिन किस दिशा में ,ये उसको नही पता था।समय निकलता गया, सयुंक्त परिवार और काम के कारण माँ उतना समय नही दे पाती थी, पिता सरकारी नौकरी में थे जोकि दूसरे शहर में पदस्थ थे।

लेकिन मेरे व्यवहार में अचानक आये परिवर्तन से वो भी अनभिज्ञ न थे।आखिर पापा ने पूछ ही लिया “क्या बात है तनीषा, आज कल कहा मन रहता है तुम्हारा”। मैं बोली “परीक्षा में अभी टाइम है,मैं कोर्स कवर कर लूंगी। पर मुसीबत बढ़ने वाली थी, उन लड़कियो ने ये बात भांप ली और फिर शुरू हुआ वो दौर जिसकी मैं कल्पना भी नही कर सकती थी|

उन लड़कियो ने मेरे कद ,रंग वजन और हर उस चीज़ का मज़ाक बनाया जिसको लेकर मैं संवेदनशील थी। एक अलग ही तरह का दबाव महसूस कर रही थी। मेरा खाना खाने का दिल नही करता था, खाती भी थी तो उल्टी कर देती थी।

मै उदास रहने लगी, कितनी भी कोशिश कर लूं, मैं उन लड़कियों जितनी आकर्षक नही लग पा रही थी। असर ये हुआ कि उस वर्ष मेरा परीक्षा परिणाम बहुत बुरा रहा। समय निकल रहा था। मैं अंदर से कमजोर हो गयी थी, फिर एक दिन मैंने ऐसे जीवन को खत्म करने का सोचा।

बस किशोर मन यही सोच रहा था कि जब मुझमे कोई आकर्षण ही नही तो जीवन का अर्थ क्या, दिन और समय तय किया ,और इंतज़ार करने लगी। पर इसी बीच पापा ने फ़ोन कर बुला लिया। जगह बदली, मन बदला मरने का विचार आगे बढ़ा दिया।

सोच वही ले जाती थी मैं सुंदर नही, मोटी हु। कद कम है रंग दबा हुआ। इस दबाव को झेलते हुए एक दिन अचानक ,एक अंदरूनी ऊर्जा महसूस हुई।जैसे कोई हाथ पकड़ कर मुझे इस स्थिति से निकल रहा था। मैंने खुद तय किया कि कुछ तय समय तक मैं सिर्फ सकारात्मक बाते पढूंगी और देखूंगी। मुझे अच्छा महसूस होने लगा था।

भूख बढ़ गयी , चहरा ठीक हो रहा था। थकान भी कम हो गयी। मैंने फिर एक दिन हिम्मत करके वहां के बच्चो से दोस्ती की और शाम को रोज़ बेडमिंटन खेलने जाने लगी।सब कुछ जैसे सही हो गया था। नए दोस्त , नया माहौल सब अच्छा था । फिर वापस जाने का समय आया।घबराहट , डर के कारण हालात खराब थी, पर जाना तो था।

अगले दिन वापस आ गए। उन लड़कियों का ग्रुप सामने से जा रहा था हंसता हुआ, पर मैं स्थिर खड़ी देख रही थी न कोई डर ,न दबाव। अपने अस्तित्व का पहला अनुभव उसी दिन हुआ था मूझे और उस किशोरी के लिए ये जीवन की अमूल्य सीख थी। आज ,इतने साल बीत गए ,लड़खड़ाई , बोहोत उत्तर चढ़ाव देखे पर उस दिन हिम्मत के जो पंख मिले, उनने मुझे कभी गिरने नही दिया। ——–

यामिनी

Motivational Story in Hindi for Success


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साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए “Story in Hindi | हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानियां” लेकर आएं है जिन्हें पढ़कर आप ज़िन्दगी के कुछ अनसुलझे पहलुओं के बारे में जान पाएँगे| दोस्तों, कहानियों की दुनियां अपने आप में एक अलग ही दुनियां होती है|

जब हम बचपन में  दादी-नानी से कहानियां सुना करते थे तो हमारा पूरा ध्यान कहानी के पात्रों और कहानी के माध्यम से कही गई बात पर होता था|

बचपन की कहानियां कई बार हमें हमारे ज़िन्दगी के लक्ष्य से अवगत करा जाती है| कई बार जब हम ज़िन्दगी में हमारे लक्ष्य से भटक जाते हैं तो किसी “महान व्यक्ति की कहानियां” हमें हमेशा ज़िन्दगी में आगे बढ़ते रहने और संघर्ष करने की प्रेरणा देती है|

आज हम आपके लिए ऐसी ही कुछ कहानियां लेकर आएं हैं जिन्हें पढ़कर आप खुद को उर्जावान महसूस करेंगे| पढ़िए Story in Hindi | हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानियां


चिंता की सुबह | Hindi Kahani

एक राज्य में एक साधू रहता था जो शहर-शहर जाकर भिक्षाव्रती करता और अपना पेट पालता था| साधू उतना ही मांगता जितने की उसको आवश्यकता होती| वह न तो कल के लिए कुछ सोचता और न ही कल के लिए कुछ बचाता| बस यही उसकी दिनचर्या थी|

एक बार वह भिक्षाव्रती करते-करते राज्य की राजधानी पहुंचा| लेकिन जब तक वह राजधानी के अन्दर पहुँच पाता तब तक अँधेरा हो चूका था| शहर के दरवाज़े भी तब तक बंद हो चुके थे| साधू ने वहीँ विश्राम कर सुबह शहर में जाने की योजना बनाई और दरवाजे के समीप ही सोने के लिए स्थान ढूंढने लगा|

सर्दी के दिन थे और रात थोड़ी ठंडी ही थी| साधू ने देखा पास ही एक भट्टी थी| भट्टी में अभी भी गर्माहट थी| साधू ने भट्टी के समीप ही सोने का विचार किया| साधू ने अपना बिछोना बिछाया और भट्टी के समीप ही सो गया|

महल के दरवाजे के समीप ही राजा का महल था| सुबह सूरज की पहली किरण के साथ राजा की नींद खुली और उन्होंने अपनि रानी से पुछा – “कहो रात केसी रही”| उधर भट्टी में सोए साधू की नींद राजा की आवाज़ से खुल गई| राजा का प्रश्न सुन साधू ने जवाब दिया, – “कुछ आप जैसी और कुछ आप से अच्छी”

राजा के कानो में जैसे ही साधू की आवाज पड़ी वे बड़े ही आश्चर्यचकित हुए, उन्होंने महल की बालकनी से बहार देखा लेकिन उन्हें कोई नज़र न आया| उन्होंने वही सवाल फिर दोहराया, “कहो रात कैसी बीती”!

साधू के कानों में जैसे ही राजा के शब्द पड़े वह फिर बोला. “कुछ आप जैसी और कुछ आप से अच्छी”! अब राजा की उत्सुकता की सीमा न थी| उन्होंने अपने सैनिकों को इस आवाज़ के बारे में पता लगाने को कहा|

राजा के सैनिक जैसे ही महल के बाहर इस आवाज़ का पता लगाने आए उन्हें भट्टी के समीप एक साधू लेटा हुआ दिखाई दिया| राजा के सैनिकों ने सोचा हो न हों राजा की बातों का जवाब यही साधू दे रहा था|

उन्होंने साधू को जगाया और साथ महल चलने को कहा| साधू ने सोचा जरुर उसने राज्य का कोई नियम तोड़ा है इसलिए राजा ने उसे दंड देने के लिए महल में बुलाया है|

साधू डरते-डरते महल पहुंचा| राजा उत्सुकतावश उस व्यक्ति से मिलने के लिए आतुर था जो उसके सवाल का जवाब दे रहा था| सिपाही साधू को लेकर जैसे ही महल में पहुंचे राजा ने उत्सुकतावश साधू से पुछा की जब मैं सुबह उठकर अपनी रानी से पुछ रहा था की “रात कैसी बीती” तो आपने जवाब दिया “कुछ आपके जैसी और कुछ आपसे अच्छी”!आप कृपा कर मुझे यह बताएं की आप तो इस ठण्ड में भी खुले आसमान के निचे सो रहे थे तो फिर आपकी रात मुझसे अच्छी कैसे बीती|

साधू ने जब राजा की बात सुनी तो मुस्कुराते हुए बोला, महाराज! क्षमा करें लेकिन मैंने जो भी कहा बिलकुल सत्य कहा है| क्यों की, जब आपको महल में नींद लगी तो आपको भी नहीं ज्ञात था की आप महल में सो रहे हैं| ठीक वैसे ही मुझे भी नींद लगने के बाद यह ज्ञात नहीं रहा की में खुले आसमान के बाहर सो रहा हूँ| और रही आपसे अच्छी रात बीतने का सवाल तो महाराज आपको सुबह उठने के बाद अपने राज्य और परिजनों की चिंता सताने लगी लेकिन में तो फ़क़ीर हूँ मुझे तो कोई चिंता ही नहीं| इसलिए मेरी रात आपसे अच्छी बीती|

इसीलिए कहा गया है…

चाह गयी चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह!
जिनको कछु न चाहिए, सो साहन के साह!!

चिंता की सुबह | Story in Hindi


बहु की सीख | Motivational Story in Hindi

एक पिता ने बड़े ही लाड-प्यार से अपनी पुत्री को पाल पोस कर बड़ा किया| सर्वगुण संपन्न होने पर तय समय पर पिता ने अपनी पुत्री का विवाह कर उसको विदा किया| विदाई के वक़्त जब पुत्री ने पिता का आशिर्वाद लिया तो पुत्री को गले लगाते हुए पिता ने कहा, “बेटा! हमारी रीत ससुराल में नहीं चलेगी| वहां के तौर तरीके अलग होंगे इसलिए ससुराल में जाकर बड़े बूढों के पास बैठकर उनसे सिख लेना”

बेटी जब बहु बनकर ससुराल पहुंची तो उसने देखा उसके पति के अलावा घर में उसकी सासुमाँ और एक दादी सास  थी| बहु जब घर में कुछ दिन रही तो उसने देखा की घर में दादी सास का बहुत अपमान और तिरस्कार हो रहा है| अपमान की हद तो तब हो जाती जब उसकी सास उसकी दादी सास को ठोकर मार देती, गाली देती और खाने के लिए भी कुछ न देती|

लडकी को यह सब देख बहुत बुरा लगा| उसे अपने  माता-पिता द्वारा दीए संस्कार याद आए| उसे अपनी दादी सास पर बहुत दया आई| उसने सोचा घर में बड़े बूढों का तिरस्कार होने से घर नर्क बन जाता है मुझे अपनी दादी सास के लिए कुछ करना चाहिए|

उसने सोचा अगर वह अपनी सास को समझाने का प्रयास करेगी तो उसकी सास उसके साथ भी इसी तरह का बर्ताव करने लगेगी| उसने खुद अपनी दादी सास की सेवा करने का सोचा| अब वह रोज़ घर का काम ख़तम करके अपनी दादी सास के पास बेठ जाती और उनके पैर दबाती|

कुछ दिनों बाद ही सास को बहु का इस तरह दादी सास के पास बैठना और उनकी सेवा करना अच्छा नहीं लगने लगा| एक दिन सास ने बहु को बुलाया और कहा, “बहु! तुम घर का सारा काम छोड़कर हमेशा दादी सास के पास क्यों बेठी रहती हो ?

बहु को पता था की एक न एक दिन उसकी सास उस से यह सवाल जरुर पूछेगी! बहु ने कहा, “माँ जी मेने घर का सारा काम ख़तम कर लिया है| अगर फिर भी कुछ बाकि रह गया है तो काम बताइए|”

सास बोली, “काम तो कुछ नहीं है लेकिन दिन भर दादी सास के पास बेठना ठीक बात नहीं! बहु ने सास की बात को बड़े ध्यान से सुना और कहा, “माँ जी! मेरे पिताजी ने हमेशा मुझे यही सिखाया है की जवान लड़के लड़कियों के बिच कभी नहीं बेठना|

अगर जीवन में कुछ सीखना है तो घर के बड़े बुजुर्गों के पास बेठना| हमारे घर में सबसे बुजुर्ग दादी सास ही है इसलिए में उनके पास बैठती हूँ| मेरे पिताजी ने मुझे विदा करते वक़्त भी कहा था की अब वही तेरा घर है और वहीँ के रीती रिवाज तुझे मानना है इसलिए में घर के रीती रिवाज के बारे में दादी सास से पूछती हूँ की मेरी दादी सास आपकी कैसे सेवा करती है

सास ने जब यह सुना तो घबरा कर पूछा, “बुढ़िया ने क्या कहा तुझे मेरे बारे में ?

बहु ने बड़ी ही चतुराई और शालीनता के साथ जवाब दिया. “माँ जी! दादी सास कह रही थी की अगर तेरी सास मुझे गाली नहीं दे और ठोकर नहीं मारे तो में सेवा ही मान लूँ! बहु की बात सुनकर सास ने बहु से पुछा, “क्या तू भी मेरे साथ ऐसा ही करेगी ?

बहु सास के इसी प्रश्न के इंतज़ार में थी| बहु ने कहा, माँ जी! मुझे पिताजी ने बड़ों से घर के रीती रिवाज सिखने को कहा था| अगर घर के रीती रिवाज बुजुर्गों के अपमान करने के हैं तो मुझे भी रीती रिवाज मानने पड़ेंगे|

बहु का जवाब सुनकर सासु माँ को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी| उसने सोचा जैसा व्यहवार में अपनी सास के साथ करुँगी मेरी बहु भी वही सीखेगी और फिर वह भी मेरे साथ वैसा ही व्यहवार करने लग जाएगी| सास अब दिन भर इसी बात के विचार में रहती|

अगले ही दिन बहु ने घर के एक कोने में ठीकरी (खाना खाने का एक मिटटी का बर्तन) इकठ्ठा करना शुरू कर दिया| घर के कोने में ठीकरी पड़ी देख सास ने बहु से इतनी सारी ठीकरी इकठ्ठा करने का कारण पुछा – “बहु तुमने यह ठीकरी क्यों जमा की है|”

बहु ने बड़ी ही विनम्रता से कहा – माँ जी! आप दादी सास को ठीकरी में ही भोजन देती है| इसलिए मेने सोचा की बाद में ठीकरी मिले न मिले इसलिए अभी से ही आपके लिए ठीकरी जमा कर देती हूँ|  बहु का जवाब सुनकर सास घबरा गई और उसने पुछा- तू मुझे ठीकरी में खाना परोसेगी क्या|

बहु ने कहा – माँ जी! मेरे पिताजी ने कहा था की यहाँ के रीती रिवाज वहां नहीं चलेंगे| वहां की रीती अलग होगी| अब जो यहाँ की रीती है मुझे वैसे ही करना होगा| बहु की बात सुनकर सास ने कहा, “यह यहाँ कि रीती थोड़े ही है| तू अब दादी सास को थाली में भोजन दिया करना| बहु सास की बात सुनकर बहुत खुश हुई| बहु की चतुराई से अब दादी सास को थाली में भोजन मिलने लगा|

अगले दिन बहु ने देखा की घर में सबके खाना खाने के बाद बचा हुआ खाना बूढी दादी सास को दिया जाता था| बहु उस खाने को बड़े गौर से देखने लगी|

बहु को इस तरह खाने को देखने पर सास ने पुछा “बहु! क्या देखती हो ?

बहु ने कहा – “सिख रही हूँ घर में बूढों को क्या खाने को दिया जाना चाहिए”

बहु की बात सुनकर सास ने घबरा कर कहा, “बेटा! यह कोई घर की रीत थोड़े हे| कल से तू दादी सास को पहले भोजन दिया करना”

बस अगले दिन से ही दादी सास को बढ़िया भोजन मिलने लगा| धीरे-धीरे बहु ने सास की सारी आदतों को बदल दिया| अगर बहु अपनी सास को उपदेश देती की उन्हें बड़े बूढों के साथ इस तरह का व्यहवार नहीं करना चाहिए तो सास उसकी बात कभी नहीं मानती| इसलिए आज की युवा पीढ़ी को चाहिए की उपदेश देने के बजाए खुद के आचरण में सुधार करना चाहिए|

इसलिए कहा गया है – “बातों का असर नहीं पड़ता, आचरण का पड़ता है”

Story in Hindi | हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानियां

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Heart Touching Story in Hindi | भतेरी

Heart Touching Story in Hindi | भतेरी


समाज अपने आप में एक बहुत बड़ा शब्द है! लेकिन जितना बड़ा यह शब्द है उतनी ही बड़ी-बड़ी कहानियां समाज और सामाजिक प्रथाओं से जुडी हुई है| इन्हीं कुछ सामाजिक प्रथाओं में एक प्रथा है बेटी को बोझ समझना| दहेज़ प्रथा की बड़ी-बड़ी बेड़ियों में जकड़कर समाज आज इतना लाचार हो गया है की जिन बेटियों को समाज लक्ष्मी का रूप समझता था आज वही लक्ष्मी समाज को बोझ लगने लगी है| आज इन्हीं सामाजिक प्रथाओं से औत-प्रोत एक कहानी “Heart Touching Story in Hindi | भतेरी हमारी वेबसाइट के लेखक “सतीश भारद्वाज”  आपके लिए लेकर आएं है|


                    Heart Touching Story in Hindi | भतेरी

भतेरी अपने मजदूर माँ बाप की दो लड़कियों के बाद तीसरी औलाद थी| तीन लड़कियों के पैदा होने से दुखी होकर उसके पिता ने उसका नाम भतेरी रख दिया था| गयाथा | भतेरी का अर्थ था “बहुत” और भतेरी के माता पिता  अब चोथी लाक्द्की नहीं चाहते थे| खैर “भतेरी” का  नाम सार्थक हुआ उसके बाद एक लड़के का जन्महुआ|  लेकिन भतेरी अभी भी एक बोझ ही थी|  जब भतेरी छ: वर्ष की हुई  तभी उसका बाप  मर गया| पिता की मौत के बाद घर में अब उसकी माँ विमला और दादी रज्जो ही थे जो इन चारो भाई बहनों का भरण पोषण कर रहे थे|

भतेरी की दादी रज्जो को आज भी बेटे की मौत से ज्यादा दुःख ये था, की भतेरी का बाप अपने पीछे तीन-तीन लड़कियों को छोड़ गया था| वो अक्सर कहा करती थी “खुद तो मुक्ति पा ली….अब  पता नी मेरी बुलाव कद होगी, कद भगवान इन नरको से मुझे मुकति देगा”|”

भतेरी ने लड़की होने के कारण अपनी  पूरी जिन्दगी अपने परिवार की घ्रणा और दुत्कार ही सही पति की मौत के बाद भतेरी की माँ विमला भी भाव शुन्य हो गयी थी| उसे भी अब अपनी तीनो बेटियां जिम्मेवारी नहीं बोझ ही दिखाई देती थी

जब भतेरी 12 वर्ष की हुई तो उसे ब्लड कैंसर हो गया| डाक्टर ने बताया की काफी रुपया भी लगेगा और परिवार में से ही किसी को अपना मेरुरज्जा (किडनी) देना पड़ेगा|  डाक्टर ने साफ़ कहा था की देने वाले की जान को कोई खतरा नहीं होगा| १२ साल की लड़की के ब्लड कैंसर होने की खबर जैसे ही गाँव वालों को लगी तो भतेरी के लिए गाँव वालों का दिल पसीज गया| घर की माली हालत देख भतेरी के इलाज का पूरा खर्चा गाँव वालों ने उठाने का फैसला किया| लेकिन यहाँ समस्या पैसे की नहीं आ रही थी, ग्रामीण समाज आज भी भावनात्मक समाज है, कई व्यक्ति थे जो भतेरी के इलाज के लिए  पैसा खर्च करने को तैयार थे|  लेकिन इस बोझ के लिए परिवार में कोई भी अपने  शरीर का मज्जा  देने को तैयार नहीं था|  भतेरी की 65 वर्षीया दादी को भी आज  अपनी जिन्दगी के बचे  हुए कुछ वर्ष भतेरी  की जन्दगी से ज्यादा  कीमती लगे| वो लड़की थी इसलिए उसके परिवार के लिए उसकी जिन्दगी बोझ थी|

अपनी बीमारी से घुटती भतेरी आज मर चुकी थी| घर पर काफी लोग जमा थे| सब भतेरी की माँ और दादी को ढाढस बंधा रहे थे, और उनकीगरीबी को कोस रहे थे| आज मृत भतेरी का चेहेरा शांत था| उसने अपनी जिंदगी में बस अपने परिवार की दुत्कार सही थी, और बाद के कुछ समय बीमारी की पीड़ा….. लेकिन आज वो शांत लग रही थी|

क्या इच्छा रही होगी उसकी अंत समय में?

एक बार उसे कहते सुना था “माँ आदमी मरने के बाद अलग-अलग रूप में जनम लेवै है.. कुत्ता, कीड़ा, चूहा या डांगर (पालतू पशु)|  माँ मै तो डांगर या कीड़ा बन जाउंगी  पर आदमी ना बनू| “देखिये जानवरों कु तो पताइ ना होत्ता उनकी औलाद में कौन सा लड़का कौन सी लड़की…आदमियों कुई पता हो यो फर्क तो बस”|

उसका बाल सुलभ मन मानव की इस वृत्ति का प्रतिकार नहीं कर सकता था लेकिन जिन्दगी भर जो घृणा उसने अपने प्रति देखि थी उसे वो जरुर महसूस कर सकती थी|
शायद भगवान उसकी अंतिम इच्छा पूरी कर देगा… उसे मानव नहीं पशु योनी में जन्म देगा|

भतेरी | Heart Touching Story in Hindi
सतीश भारद्वाज
9319125343


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साथियों नमस्कार,
आज के इस अंक में आप पढेंगे 10 ऐसी शानदार Motivational Story in Hindi जो आपकी ज़िन्सदगी में एक सकारात्मक बदलाव लेन में मदद करेगी| साथियों,   की ज़िन्दगी में एक वक़्त ऐसा आता है जब हमें हमारी ज़िन्दगी में  किसी प्रेरणा की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है|

ये वो वक़्त होता है जब हम अपनी ज़िन्दगी में बहुत कुछ हांसिल करना चाहते हैं लेकिन कॉन्फिडेंस की कमी की वजह से हम हमारे लक्ष्य से बस एक कदम दूर रह जाते है|

दोस्तों, इसी परेशानी को दुइर करने के लिए आज Hindi Short Stories आपके लिए 10 ऐसी शानदार मोटीवेशनल कहानियां  लेकर आया है जिन्हें पढ़कर आप खुद को कॉंफिडेंट महसूस करेंगे|


              दो बच्चों की कहानी | Best Motivational Story in Hindi

यह कहानी है दो बच्चों की जो एक गाँव में रहते थे| बड़ा बच्चा 10 साल का था और छोटा 7 साल का| दोनों हमेशा एक दुसरे के साथ रहते, एक दुसरे के साथ खेलते और एक दुसरे के साथ ही घूमते| एक दिन दोनों खेलते-खेलते गाँव से थोड़ा दूर निकल आए| अचानक खेलते-खेलते 10 साल के बच्चे का पैर फिसल गया और वह कुए में गिर गया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा| अपने दोस्त की आवाज़ सुनकर जब छोटे बच्चे को इस बात का पता चला तो वह बहुत घबराया| उसने अपने आस-पास देखा और मदद के लिए चिल्लाया| लेकिन वहां आसपास कोई नहीं था जो उसकी मदद कर सकता था|

अचानक उसकी नज़र पास ही पड़ी एक बाल्टी पर पड़ी, जिस पर एक रस्सी बंधी थी| उसने बिना कुछ सोचे वह रस्सी कुए में फेकी और अपने दोस्त को उस रस्सी को पकड़ने को बोला| अगले ही पल वह 7 साल का बच्चा उस 10 साल के बच्चे को पागलों की तरह कुए से बाहर निकालने के लिए  खिंच रहा था| उस छोटे से बच्चे ने अपने दोस्त को कुए से बहार निकालने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी| आखिरकार वह बच्चा अपने दोस्त को बचाने में कामियाब हुआ और उसने अपने दोस्त को कुए से बाहर निकाल लिया|

लेकिन उन्हें असली डर तो इस बात का था की जब वो गाँव जाएँगे तो उन्हें बहुत मार पड़ने वाली है| खैर, दोनों डरते-डरते गाँव पहुंचे और उन्होंने गाँव वालों को खेलते-खेलते कुए में गिरने और रस्सी के सहारे छोटे बच्चे द्वारा बड़े बच्चे को बाहर निकालने वाली पूरी बात बता दी| लेकिन गाँव वालों ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया और हसने लगे कि आखिर एक 7 साल का बच्चा एक 10 साल के बच्चे को रस्सी के सहारे कुए से बहार कैसे निकाल सकता है|

लेकिन वहां मौजूद एक बुजुर्ग ने उन बच्चों की बातों का भरोसा कर लिया| उन्हें सब “करीम चाचा” कहते थे| करीम चाचा गाँव के सबसे समझदार बुजुर्गों में से एक थे| गाँव वालों को जब करीम चाचा के बच्चों की बात पर विश्वास करने की बात पता चली तो सब इक्कठे होकर करीम चाचा के पास पहुंचे और बोले “चाचा! हमें तो बच्चों की बात पर यकीन नहीं हो रहा है, आप ही बता दो की ऐसा कैसे हो सकता है| गाँव वालों की बात सुनकर करीम चाचा बोले, “बच्चे बता तो रहें हैं उन्होंने यह कैसे किया| बच्चे ने कुए में रस्सी फेंकी और दुसरे बच्चे को ऊपर खीच लिया|

गाँव वालों को कुछ समझ नहीं आ रहा था| कुछ देर बाद करीम चाचा मुस्कुराए और बोले, “सवाल ये नहीं है की बच्चे ने यह कैसे किया, सवाल यह है की वह यह कैसे कर पाया| और इसका सिर्फ एक ज़वाब है की जिस वक़्त वह बच्चा यह कर रहा था उस वक़्त उसको वहां यह बताने वाला कोई नहीं था की तू यह नहीं कर सकता| यहाँ तक की वह बच्चा खुद भी नहीं|

Best Motivational Story in Hindi

तो दोस्तों कहानी का सार यही है कि, “अगर अपने दिल की सुनोगे तो ज़िन्दगी में हमेशा सफल रहोगे और अगर दुनियां की सुनोगे तो तुम भी  दुनियां की भीड़ में कहीं खो जाओगे|”

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नीव का पत्थर | Inspirational Hindi Stories

लाल बहादुर श्रास्त्री बड़े ही हसमुख स्वाभाव के थे| लोग प्रायः ही उनसे उनके हसमुख स्वाभाव और निःस्वार्थ सेवा भावना के लिए प्रभावित हो जाया करते थे|

एक बार लाल बहादुर श्रास्त्री को लोक सेवा मंडल का सदस्य बनाया गया| लेकिन लाल बहादुर श्रास्त्री बहुत संकोची थे वे कभी नहीं चाहते थे की उनका नाम अखबारों में छपे और लोग उनकी प्रशंशा और स्वागात करे|

एक बार शास्त्री जी के मित्र नें उनसे पूछा, “शास्त्री जी! आप अख़बारों में नाम छपवाने में इतना परहेज़ क्यों करते हैं|

शास्त्री जी मुस्कुराए और बोले, “लाला लाजपत राए जी ने मुझे लोक सेवा मंडल के कार्यभार को सोंपते हुए कहा था की, लाल बहादुर! ताजमहल में दो तरह के पत्थर लगे हैं| एक बढ़िया संगमरमर के पत्थर हैं, जिन्हें दुनियां देखती है और प्रशंशा करती है|

और दुसरे ताजमहल की नीव में लगे हैं जो दीखते नहीं और जिनके जीवन में अँधेरा ही अँधेरा है| लेकिन ताजमहल को वे ही खड़ा किए हुए है|

लालजी के ये शब्द मुझे हमेशा याद रहते हैं और में नीव का पत्थर बना रहना चाहता हूँ|

इसलिए हमें भी ज़िन्दगी में दिखावे से बचकर वो कार्य करना चाहिए जो असल में ज़रूरी है|


अद्भुत इंजीनियर | Motivational Stories in Hindi for Success

बात अंगेजों के समय की है| हर बार की तरह बम्बई मेल यात्रियों से खचाखच भर कर जा रही थी| एक डिब्बे में एक यात्री गुमसुम बता हुआ था| सांवले से रंग, मझले से कद का वह व्यक्ति धोती कुरता पहने बेठा था|

अन्गेर्ज उसे देहाती और गवांर समझकर उसका मजाक उडा रहे थे| मगर वह सबसे अलग किसी की बात पर ध्यान न देकर अपनी सीट पर बेठा था|

लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक उस व्यक्ति ने रेल की ज़ंजीर खिंच दी| पास बेठे लोग उसे पागल, गंवार और भला बुरा कहने लगे| तभी गर्द वहां आ पहुंचा और ज़ंजीर खीचने वाले के बारे में पूछने लगा| गार्ड के पूछने पर उस व्यक्ति ने बताया की यहाँ से कुछ ही दूर रेल की पटरी उखड़ी हुई है|

आपको कैसे पता ? गार्ड ने उत्सुकता वश पूछा|

गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया है| इससे प्रतिध्वनि होने वाली गति से मुझे खतरे का अहसास हुआ है – व्यक्ति ने उत्तर दिया|

गार्ड उस व्यक्ति को लेकर रेल की पटरी पर कुछ दूर आगे अगया और देखा की वास्तव में वहां रेल की पटरी उखड़ी हुई थी और पटरी के दोनों छोर अलग-अलग पड़े थे|

तभी कई सारे और लोग भी वहां जमा हो गए| अब सब लोग उस व्यक्ति की प्रशंशा कर रहे थे जो कुछ देर पहले उसी व्यक्ति को बुरा भला और गंवार कह रहे थे|

गार्ड ने उत्सुकता वश पूछा, आप कौन है ? आपका नाम क्या है|

व्यक्ति ने सहज भाव से जवाब दिया, “में एक इंजीनियर हूँ और मेरा नाम डॉ. एम. विश्वेश्वेरेया है|

नाम सुनते ही सब लोग सन्न रह गए| उन्हें अपशब्द कहने वाले अब उनसे क्षमा मांगने लगे|  डॉ. विश्वेश्वेरेया ने कहा आपने जो कुछ भी कहा मुझे बिल्कुल भी याद नहीं|

साथियों यह एक सफल व्यक्ति की पहचान होती है| सफल व्यक्ति हमेशा अपने काम से अपनी पहचान बनता है| इसलिए आप काम ऐसा करो की सब आपको आपके काम और नाम से जाने|


झूंठ फरेब का महल | Motivational Hindi Short Stories

एक बार एक राजा ने अपने राज्य के सबसे कुशल कारीगर को महल में बुलाया| राजा कारीगर की कला से बहुत प्रभावित था| उसने कारीगर को दरबार में बुलाया और कहा, “तुम हमारे लिए राज्य का सबसे सुदर महल बनाओ| हमारे पास धन को कोई कमी नहीं है तुम जितना धन मांगोगे उतना तुम्हे मिलेगा|

कारीगर कुशल तो था लेकिन उसे अपनी कला का घमंड आ चूका था| सब जगह से अपने काम की तारीफ सुनकर अब उसके मन में कामचोरी और आलस्य की प्रवति आ चुकी थी|

खैर, कारीगर महाराज की आज्ञा पा कर अपने काम में जुट गया| लेकिन थोड़े ही दिन बाद उसके मन में विचार उठा की क्यों न रद्दी, घटिया किस्म का माल लगाकर क्जल्दी से जल्दी महल का क्काम समाप्त कर के मोटा मुनाफा कमा लिया जाए| और उसने यही किया|

कारीगर ने घटिया किस्म का माल लगाकर महल की भुरभुरी दीवारें कड़ी कर दी| कारीगर ने बाहर से महल को सुन्दर साज सज्जा से चमका दिया लेकिन अन्दर से महल में क्जच्चा माल लगा था| थोड़े ही दिन में आकर्षक सुन्दरता वाला, सोने सी चमक-दमक वाला सुन्दर सा महल तैयार हो गया|

महल खड़ा करने के बाद अक्रिगर राजा की सेवा में पहुंचा और राजा को महल के बन्नने की सुचना दी| राजा अगले ही दिन महल का निरिक्षण करने के लिए पहुंचे| महल को देख राजा बहुत ही प्रभावित हुए| महल बहुत ही आकर्षक और सुन्दर लग रहा था|

राजा ने कारीगर की बहुत प्रशंशा की और कहा, “में तुम्हारी कुशलता से बहुत प्रभावित हूँ| इतने सुन्दर महल निर्माण के लिए तुम्हे जो भी इनाम दिया जाए वो कम है| में सोच रहा हूँ इस अद्भुत कार्य के लिए तुम्हें क्या इनाम दिया जाए|

फिर थोडा सोच विचार कर महाराज मुस्कुराए और बोले, “लो तुम्हें यही यही महल पुरूस्कार में देता हूँ|”

महाराज की बात सुनकर कारीगर हतप्रभ रह गया| उसे क्या मालूम था की जिस महल को वह घटिया माल से बना रहा है वही महल एक दिन उसे इनाम में मिल जाएगा|

राजा महल का निरिक्षण कर और महल को कारीगर को इनाम में दे ककर चले गए| कारीगर अपने किए पर मुह छिपा कर रोने लगा|

इनाम के लालच में कारीगर का बनाया गया खोखला महल उसी के हत्थे चढ़ गया|

इसीलिए कहते हैं जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह खुद्द भी उसी गड्ढे में गिर जाता है| जो झूठ फरेब कजा महल तैयार करता है उसी के हिस्से में वह पड़ता है|


हर अच्छे काम में सहायता करो | प्रेरक कहानी

रावन द्वारा सीता हरण के बाद भगवन राम रवां से युद्ध करने के लिए और लंका तक पहुचने के लिए सागर पर पुल बंधवा रहे थे| भालू, बन्दर बड़े बड़े पत्थर उठा कर समुद्र में डाल रहे थे|

तभी भगवान् राम की दृष्ठि एक गिलहरी पर पड़ी| गिलहरी बालू में लोटती जिससे उसके शारीर पर बालू के कुछ कण चिपक जाते थे| फिर वह उन चिपके हुए कानों को पुल पर जमें हुए पत्थरों पर गिरा देती थी|

यह देखकर भगवान् राम आश्चर्यचकित हुए और बड़े प्यार से गिलहरी के पास जाकर उसे हाथ में उठाया और उससे पूछा, “यह तुम क्या कर रही हो”

प्रभु राम का स्नेह पाकर गिलहरी  बोली, “इस पुनीत कार्य में बन्दर-भालू तो बड़े-बड़े पत्थर उठा कर पुल का निर्माण कर रहें हैं| में छोटी सी गिलहरी भला इतने बड़े पत्थर कैसे उठा सकती हूँ इसलिए बालू के छोटे-छोटे कण उठा कर इस कार्य में अपना योगदान दे रही हूँ|

आप एक आचे कम के लिए निकले है और अच्छे कार्य में तो सहयोग करना ही चाहिए|

गिलहरी की बात सुनकर भगवान् राम बहुत प्रसन्न हुए| कहा जाता है की गिलहरी के कार्य से प्रसन्न होकर भगवान् राम ने  स्नेहता से उसके शारीर पर अपना हाथ फेरा था और आज भी गिलहरी के शरीर पर जो धारियां दिखाई देती है वह भगवान् राम की उँगलियों के निशान ही है|

इसलिए हमें यह कभी नहीं सोचना चाहिए की हमारा योगदान कितना बड़ा है| किसी भी अच्छे कायर के लिए जितना और जैसा भी हम कर सकते हैं वह हमें अवश्य करना चाहिए|

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सबसे बड़ा खजाना | Motivational Story in Hindi 

एक लोहार था| उसने एक बढ़ई  के लिए हथोडा बनाया| हथोडा बहुत ही सुन्दर और मजबूत बना था| हथोड़े की सुन्दरता और मजबूती देख बढ़ई ने सोचा क्यों न लोहार से एक हथोडा और बनवा लूँ|

बढ़ई लोहार के पास गया और बोला, “तुम मेरे लिए एक हथोडा और बना दो लेकिन इस बार जो हथोडा बनाना वह पहले वाले हथोड़े से भी ज्यादा सुन्दर होना चाहिए और इसके लिए में तुम्हें मुह माँगा इनाम दूंगा|

लोहार नें बढ़ई की बात सुनी और विनम्रता पूर्वक कहा, “नहीं यह तो नहीं हो पाएगा”

बढ़ई, लोहार की बात सोनकर आश्चर्यचकित हुआ औ बोला, “आखिर क्यों ?  तुम्हें तो तुम्हारा मुह माँगा इनाम मिलेगा| फिर तुम इसके लिए मना क्यों कर रहे हो|

लोहार नें कहा, “दाम की बात नहीं है में जब भी कोई चीज बनता हूँ पूरी योग्यता और लगन के साथ बनता हूँ| आपके लिए हथोडा बनाने के लिए मेने पूरी लगन और महनत से काम किया है| अब आप ही बताइए में इस से आचा और सुन्दर हथोडा कैसे बना सकता हूँ|

अगर में आपकी बात मन लेता हूँ और कहता हूँ की हाँ में यह कम कर सकता हूँ तो इसका मतलब यह होगा की पहले वाले हथोड़े को बनाने में मैंने कोई कसार बाकि रख दी थी इसलिए इस हथोड़े को में और भी ज्यादा सुन्दर बना सकता हूँ लेकिन यह तो सत्य नहीं है| मेने आपके लिए पहले ही पूरी ईमानदारी और लगन के साथ हथोड़े का निर्माण किया है|

इसलिए कहने का तात्पर्य यह है की किसी के लिए भी कोई भी कार्य करो तो उसे पुरे तन-मन से, महनत से करो| उसे अच्छे से अच्छा बनाने में कोई भी कसार बाकि मत छोड़ो|

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सकारात्मक बनों | Posotive    Story in Hindi

एक बार एक धनि व्यक्ति अपने बच्चों को गरीबी और अमीरी का पाठ पढ़ाने के लिए एक गाँव में ले गया ताकि उसके बच्चे देख सके की गरीबी क्या होती है| आमिर व्यक्ति के साथ उसके दोनों पुत्र थे|

गाँव में एक पूरा दिन और रात बिताने के बाद आमिर व्यक्ति अपने बच्चों के साथ शहर लौट आया| घर आकर उसने अपने बच्चों से एक-एक कर उनका अनुभव जानने का प्रयास किया|

वह अपने पहले पुत्र के पास गया और उसने पूछा, “बेटा, तुम्हें कैसा लगा उस गाँव में समय बिताकर…उनकी गरीबी देखकर|”

पिता की बात सुनकर पुत्र बोला, “पिताजी, गरीबी बहुत ही भयानक है| उनके घर में ना ही कुत्ता है और ना ही स्विमिंग पुल है| उनके पास तो घुमने के लिए गर्दन भी नहीं है| वाकई में पिताजी हम बहुत आमिर है”

पिता ने अपने पुत्र के जवाब को बड़े ही ध्यान से सुना और फिर उसने अपने दुसरे पुत्र से पूछा, “बेटा! तुम्हें कैसा लगा उस गरीब गाँव में समय बिता कर|”

पिता की बात सुनकर दूसरा पुत्र मुस्कुराते हुए बोला, “पिताजी! हम लोग कितने गरीब है| हमारे पास एक कुता है जबकि उनके पास चार-चार है| हमारे पास एक छोटा सा स्विमिंग पुल है जबकि उनके घर के पीछे तो पूरी नदी है| हमारे पास घुमने के लिए एक छोटा सा गर्दन है जबकि उनके पास तो पूरा प्राकृतिक जंगल है| वाकई में पिताजी हम बहुत गरीब है|

पिता कोअपने पुत्र की बात समझ आ गई और वह समझ गया की जीवन में सारा खेल नज़रिए का है| हम चीजों को जिस नज़रिए से देखते हैं वह हमें वैसी ही लगती है|

इसलिए दोस्तों हमें हमेशा चीजों को सकारात्मक तरीके से ही देखना चाहिए| पानी का गिलास आधा खली है या आधा भरका हुआ इसका निर्णय हमें करना है|

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तैमुर और चींटी | हिंदी कहानी

तैमुर के दुश्मनों ने तैमुर का पिचा किया तो वह घने जंगलों में भाग गया और पहाड़ों में एक खंडहर में शरण ले ली| थकावट के कारण वह वहीँ लेट गया|

तभी लेते लेते उसकी नज़र एक चींटी पर पड़ी| वह देखता है की एक चींटी एक चावल का दाना मुह में दबाकर दिवार पर चढ़ रही है, फिर वह दाना निचे गिर जाता है|

अगली बार चींटी फिर उस दानें को लेकर दिवार पर चढ़ती है और इस बार वह खुद निचे गिर जाती है| ऐसा कई बार होता है कभी वह चावल का दाना निचे गिर जाता है और कभी वह चींटी|

तैमुर लेटा-लेटा उस चींटी के प्रयासों को गिनता रहता है| वह चींटी 16 बार चावल के दानें को ले जाने में असफल होती है लेकिन 17 वि बार वह उस दानों को ले जाने में सफल हो जाती है|

तभी तैमुर को झटका लग और वह फिर से अपने दुश्मनों से लड़ने के लिए युद्ध क्षेत्र में आ गया| वह लगातार अपने दुश्मनों से लड़ता रहा और एक दिन सफ़र हो गया|

इसलीये दोस्तों, असफलता से हमें घबराना नहीं चाहिए वरन असफलता से सिख लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए| इसी लिए कहा गया है गिरो, उठा और आगे बढ़ो|

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आत्मनिर्भर बनों | Self Motivation Story in Hindi

एक सर्कस में एक शेर था| उसे बहुत छोटी उम्र से ही जंगल से पकड़कर लाया गया था| शेर सर्कस में ही मालिक के हंटर के इशारों पर चलता था| मालीक के भर से सब कुछ करता था क्यों की बचपन से ही मालिक का भय उसके दिमाग में बता दिया गया था|

सभी इन्सान सर्कस में उसके खेल को निर्भय होकर देखते थे| उसने अपने जीवन में कभी सीकर नहीं किया था इसलिए अपनी शक्तियों से वह परिचित नहीं था|

उसे पता नहीं  था की जंगल में मालिक तो क्या उसका तमाशा बना रहे दर्शक भी उसकी एक दहाड़ सुनकर भाग जाएँगे|

किसी ने शेर के कण में जाकर कहा, “तुम्हारी जगह यहाँ नहीं है| तुम तो जंगल के राजा हो वही तुम्हारा घर है| तुम्हें तुम्हारियो शक्तियों का अहसास जंगल में जाकर होगा| तुम्हें जंगल में जाना चाहिए|

शेर नें सोचा, “थोड़े से काम के बदले मुझे यहं खाना मिलता है| जंगल में खाना कहाँ से आएगा| में भूख से ही मर जाऊंगा| यही सोचकर शेर नें जंगल जाने का इरादा बदल दिया|”

कुछ दिन बीते की एक दिन किसी नें आकर शेर को कहा की उसे जंगल से लाया गया था| बचपन में जिन माता-पिता से वह बिछड़ गया था वे उसे जंगल में ही मिलेंगे|

यह सुनते ही माता-पिता से मिलने के लालच में उसने जंगल जाने की योजना बना ली और एक दिन सर्कस से भागकर जंगल पहुँच गया|

अब जंगल में आकर वह भूखा रहने लगा| उसे जंगली जानवरों की तरह शिकार करना नहीं आता था और सर्कस की तरह अब उसे खाना परोसने वाला भी यहाँ कोई न था|

वह अन्य पशुओं को शिकार करते हुए भी देखता था लेकिन उसे खुद धिकार करने की हिम्मत नहीं होती| फिर एक दिन भूख से बेचैन होकर वह एक जानवर के पीछे शिकार करने के लिए भागा|

शिकार के पीछे पीछे वह एक गाँव के पास पहुँच गया| तभी उसे गाँव में इन्सान दिखाई दिया और उसका डर फिर से लौट आया|

लेकिन तभी उसने देखा की उलटे इंसान उस से डर रहे हैं| आज अहली बार वह खुद को निभिक महसूस कर रहा था और आत्मनिर्भर भी| उसका आत्मविश्वाश लौट आया था और अब वह जंगल का राजा था|

इसलिए हमने हमेशा अपनी शक्तियों को कभी भूलना नहीं चाहिए और निर्भीक होकर आत्मनिर्भर बन्ना चाहिए|


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