Story on Friendship in Hindi | हैप्पी फ्रेंडशिप डे

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक ऐसी कहानी ” Story on Friendship in Hindi | हैप्पी फ्रेंडशिप डे ” लेकर आएं हैं जो आपको दोस्ती के एक नए अहसास से अवगत करवाएगी| आपको हमारी यह कहानी कैसी लगती है हमें कमेंट में ज़रूर बताए|


Story on Friendship in Hindi | हैप्पी फ्रेंडशिप डे

(सब दोस्त जा रहे हैं,एक दोस्त पीछे से आवाज़ देता आता है।सब पीछे मुड़ कर देखते है।)

समीर: आज फिर तू अकेला,आयुष कहाँ है???
राज: अरे पता नही यार , इतनी देर से उसका इंतेज़ार कर रहा हूँ अब भी उस के घर से ही आ रहा हूँ।
सादिम : तो क्या कहा उसने , आया क्यों नही??
राज : अरे यार वही,एक्टिंग का भूत जो उसके सर पर सवार है, उसी वजह से उस प्रधान के भांजे के चक्कर में लगा पड़ा है। उसी के पीछे घूमता रहता है,अब हम लोगो को कहाँ पूछेगा वो!

राज के चेहरे पर अफसोस था।

सलीम : जब से यह प्रधान का भांजा साद मुंबई से आया है तब से आयुष को पता नही क्या हो गया है बस इस चक्कर में है कि किसी तरह उसको इम्प्रेस करले ताकि वह इसको मुंबई ले जा सके और यह अपना बचपन का ऐक्टर बन्ने का सपना पूरा कर सके।

समीर : हाँ और उसे मौका भी तो मिल गया उस साद को इम्प्रेस करने का, अभी जब उस का लेपटाप खराब हुआ था और गाँव में कोई नही मिला ठीक करने वाला तो उसने आयुष को बुलाया था। तब से आयुष उसके साथ ही है।

सादिम : हाँ और अब तो उसने हम लोगो का फोन भी उठाना छोड़ दिया है।

सलीम : छोड़ यार क्या अफसोस करना, जब उसको कोई फिक्र नही है तो हम लोग क्यों परेशान हों।

समीर : सलीम ठीक कह रहा है यार वैसै भी सुना है  अपने मोहल्ले वाले चाचा के बाग में आम लगे हमारा इंतेज़ार कर रहे हैं।

सादिम : ठीक है बस फिर आज का खाना चाचा के बाग़ में चल राज हम लोग चलते हैं। और तू फिक्र क्यों करता है देखना इंशाअल्लाह आयुष को अपनी गलती का अहसास जल्दी होगा।

सब दोस्त बाग की तरफ जा  रहे हैं और समीर को याद आया कि उन सब में कैसे आयुष सबसे ज़्यादा एक्साइटेड होता था बाग़ में जाने के नाम पर।

“अबे सालों जल्दी चलो क्या मर मर कर चल रहे हो वह चाचा आ गया तो गये हमारे आम आज के”

आयुष नें समीर की कमर में एक ज़ोर की धप रसीद की थी।

साले बहुत हाथ चल रहे हैं तेरे रूक तू!!!!
समीर आयुष के पीछे भागा तो रस्ते में पड़े एक पत्थर से ज़ोर का टकराया था

हाहाहा…… मिल गयी सज़ा तुझे तो पहले ही आयूष उसे देख कर हसते हुए बोला।
छोड़ूंगा नी फिर भी तुझे अब बच तू!!!!
समीर उठ कर अपने कपड़े झाड़ते हुए उसकी तरफ भागा था।

अरे समीर किधर जा रहा है इधर चलना है हमें!!!
सलीम की आवाज़ पर उसनें चौंक कर आसपास देखा था।
हाँ चल वह चुपचाप सबके साथ हो लिया

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सादिम : पछली बार जब हम आए थे याद है आयुष ने क्या किया था??

बाप रे मरते मरते बचे थे तब तो….
राज को भी पिछली बार की बात याद आई थी।

“अरे बाग में बाद में जाएंगे पहले वह सामने देखो आज की दावत का इंतेज़ाम हो गया”

आयुष ने बालो को हाथ से सैट करते हुए कहा था।

राज : ओ गरीब! रहने दे बस तेरे चक्कर में हमे पिटना नही है तू जा।

आयुष : हाँ रे अम्बानी की बिसरी औलाद, पता है हमें रोज सुबह शाम नोट की बारिश होती होती है तेरे घर पे अब चल चुपचाप।

राज : देख आयुष मैं फिर कह रहा हूँ कोइ गड़बड़ ना हो जाए।
आयुष : अरे कुछ नी होगा, तू वो सामने दावत देख रहा है हम सब जाएंगे और बिरयानी साफ करके अपने रस्ते बस किसी को कुछ पता नी चलेगा कि कौन है किसी ने पूछा तो कह देंगे हम लड़के वाले हैं

सलीम : अबे ये प्रोग्राम ही बनाते रहोगे या चलोगे भी मेरे पेट में तो चूहे कूदने लगे हैं बिरयानी के ख्याल से ही….
राज : हाँ तू तो है ही भिखारियों का लीडर।
सलीम : हाँ बिरयानी के लिए वो भी बनने को तैयार हूँ बस अब चल तू।

सब खाना खा कर उठ रहे होते हैं कि एक आदमी उन सबको देख कर रूक जाता है

आदमी : कौन हो तुम सब और कहाँ से आए हो देखे से भी नही लग रहे मुझे तो!!!

आयुष : जी हाँ हमें भी याद नही आ रहा है कि हमने आपको कभी देखा हो।

आदमी : तो आए कहाँ से हो तुम लोग ये बताओ???

और प्लान के मुताबिक़ आयुष ने कह दिया कि लड़के वालों की तरफ से हैं।

आदमी : कौन से लड़के वाले ???

आयुष : वही लड़का जिसकी शादी का यह खाना हो रहा है।

आदमीं : अच्छा तो जिसकी शादी का यह खाना है उस लड़के की तरफ से हो तुम ???
आयुष ने हाँ में सर हिला दिया

आदमी : और तुम सारे????
जी हाँ हम सब भी इसके साथ ही हैं, सब ने एक साथ सर हिला दिया

अच्छा ये बात है रुको तुम लोग फिर तो इनाम ले कर जाना अगर लड़के वाले हो ,ओय छोटू सुन इधर आ।
उस आदमीं ने एक लड़के को हाथ के इशारे से बुला कर उन सब की तरफ इशारा किया था ।

यह सब लड़के वालो की तरफ से हैं मतलब कि हमारे मेहमान हैं खाना खा लिया है इनहोने बस अब प्रसाद देना है इनको जा तू मेरे कमरे से लेकर आ प्रसाद वही रखा है चारपाई पर।

उस आदमीं ने छोटू को अन्दर जाने का इशारा किया तो उन सब के दिमाग में खतरे की घंटी बजी थी।
और वह खतरा सच भी साबित हो गया जब वह छोटू अन्दर से प्रसाद की जगह एक मोटा सा डन्डा ले कर हाजिर हुआ था।

अबे भागों सालों नही तो मरने के बाद घर वालों को लाश भी नही मिलेगी!!!!!!!!
आयुष ने चिल्लाते हुए सबको भागने का इशारा किया था।

“रुक जाओ तुम सबको तो मैं बताता हूं बारात का खाना खाने आऐ थे ना तुम, बताता हूं अभी कि यह तेरहवीं है बारात नही”

वह आदमी उन सबके पीछे लठ लेकर भागते हुए बोला था

“और उसका तो लठ ही इतना सालिड था कि एक भी पड़ जाता तो तीन साल उठते नही हम लोग”
सलीम को भी पूरा सीन हू बा हू याद आया था।

( राज का फोन बजता है, उसके घर से फोन है)
राज : चलो यार अभी चलता हूँ माँ ने बुलाया है कल मिलते हैं ।
सादिम : हाँ चलो हम सब भी कल मिलते हैं बाय।
सब चले जाते हैं।

अरे सादिम कल तो तेरा ब्रथ डे है ना???

सब इकट्ठे बैठे हुए थे जब सलीम को याद आया था।

सादिम : हाँ तो वही चलते हैं कल, अपनी वाली जगह।

समीर : आयुष को भी पूछ लेते हैं एक बारी!!!

सादिम नहीं आएगा वह देख ले तु भी कोशिश करके (समीर आयुष को फोन करता है)

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आयुष: हाँ समीर बोल??

समीर : कहाँ है यार तू?? तेरे घर जाओ तो ना मिलता फोन करो तो फोन नहीं उठाता है हुआ क्या है तुझे???

आयुष: हाँ यार बस टाईम ही नहीं मिलता है क्या करुं!!

सादिम :अच्छा ठीक है, तुझे याद है ना कल मेरा ब्रथ डे है तो कल हम सब लोग वही चल रहे हैं जो फिक्स है अपना रेस्टारेंट तू आ जाना सुबह ही।

आयुष: कल अरे सारी यार कल तो नही जा सकता कोई बात नहीं तुम लोग चले जाओ में फिर कभी चला जाऊंगा एक ज़रुरी काम है मुझे कल!

ठीक है यार मत आ मर्जी तेरी!
राज ने पूरी बात सुनने से पहले ही सादिम के हाथ से लेकर फोन काट दिया!

सब इक्टठे बैठे बात कर रहे हैं कि सलीम का फोन बजता है।

मोबाइल की सक्रीन पर आयुष का घर वाला नम्बर देख कर वह हैरान होता है!
हाँ आयुष बोल??
वह फोन उठाते हुए बोला था

लेकिन दूसरी तरफ से कुछ ऐसा कहा गया था कि वह फौरन उठ कर खड़ा हो गया और राज को भी उठा कर खड़ा कर दिया
क्या हुआ भाई कुछ बता तो सही
सादिम और समीर ने एक साथ पूछा

“आयुष के पापा को हार्ट अटैक हुआ है और घर पर कोई नही है, आयुष भी नही! अंकल ने खुद ही कैसे करके फोन किया है हमें अभी चलना है फौरन”।

सलीम ने एक ही साँस में पूरी बात बता दी!
“चल फिर हम लोग भी चलते हैं ”

वह दोनो भी उठ खड़े हुए!

नहीं तुम दोनों डॉक्टर को लेकर आओ तब तक हम लोग जाकर अंकल को देखते है, राज तू बाइक निकाल।
सलीम कहते हुए बाहर निकल गया।

डाक्टर साहब क्या हुआ है ,खतरे की तो कोई बात नही है??

डाक्टर के चेकअप करने के बाद सलीम ने डाक्टर से दवाई का पर्चा लेते हुए पूछा था।

डाक्टर : अब खतरे की कोई बात नही है मैंनें इंजेक्शन दे दिया है बस इनका ख्याल रखें और अकेले बिलकुल ना छोड़ें ऐसे पेशेंट का अकेले में बी पी ज्यादा हाई हो जाता है ।

सादिम : ठीक है डाक्टर साहब बहुत शुक्रिया आऐं मैं आपको बाहर तक छोड़ दूं।

(तभी आयुष आता है)

सलीम भाई कैसे हैं पापा ??

आयुष आँखों में आँसू लिए पापा के सरहाने बैठ गया।

सलीम : वह सो रहे हैं अभी अभी डाक्टर ने उनहें नीन्द का इंजेक्शन दिया है तु फिक्र ना कर सब ठीक है।

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बहुत शुक्रिया यार तुम लोगों का!!! आयुष उठ कर सलीम के गले लग गया।

अच्छा साले!अब तू हमारा शुक्रिया करेगा!!!

कोने में खड़ा राज भी उन दोनों की तरफ आया था।

तेरे पापा हमारे कुछ नी लगते क्या ???

समीर भी बोला तो आयुष नें नम आँखों से अपने दोस्तो को देखा था।

आयुष : सादिम कहाँ है ???

सलीम : वह डाक्टर को छोड़ने गया है। दवाई का पर्चा भी उसके पास है , आ रहा है वह दवाई ले कर।

आयुष : यार मेरी समझ मे नही आ रहा कि मैं कैसे तुम लोगों का शुक्रिया करुं!!!

(सादिम आता है)

शुक्रिया मत कर यह ले दवाई और अंकल का पूरा ख्याल रख और बस टाईम से उनहें दवा देते रहना।

उसके बाद सब चले जाते हैं।

सादिम : आज मूवी देखने चलते हैं।
राज : ठीक है पर आयुष के बिना मज़ा नही आएगा।

“तो मेरे बिना जाना क्यों है ,मै भी चलता हूँ साथ में”
पीछे से आयुष की आवाज़ सुनकर सब ने मुड़ कर देखा था।

समीर : तू कब आया?
आयुष : अभी जब तुम लोग मुझे  याद कर रहे थे।
समीर : हम तो याद करते ही रहते हैं तू ही भूल गया है हमें।

” मुझे माफ करदो यार जो भी मैंने किया उसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूँ”
आयुष ने हाथ में पकड़ा लेप्टाप साइड में रखकर माफी माँगी।

“दोस्तों में यह माफी नही चलती”।
सलीम उसके दोनो हाथों को खोलते हुए बोला था।

“तुझे एहसास हो गया यही काफी है” सादिम ने भी उसके शर्मिंदगी के एहसास को कम किया।
राज : आज तो वैसै भी दोस्तों का दिन है तो आज के दिन सारी नाराज़गिया खत्म।
आयुष : कितना खुश किस्मत हूँ मैं कि तुम सब जैसे दोस्त मिले हैं जो जीते जी ही नही मरने के बाद भी मेरा साथ नही छोड़ेंगे।

सादिम : अरे तू टेंशन ही ना ले मरने के बाद भी हम सब साथ मिल कर ऐसे ही सब को सताया करेंगे जैसै अभी सताते हैं।
राज : और उसी तरह छुप कर चाचा के बाग से आम भी तोड़ेगे जैसे अब तोड़ते हैं।

आयुष : तो चलो फिर इसी बात पर हमेशा की तरह थ्री चियरस हो जाए।
हो जाए!!!!! सब एक साथ बोले थे।
हिप हिप हुर्रे
हिप हिप हुर्रे
हिप हिप हुर्रे

आयुष : यह लो शाम की फिल्म की टिक्ट हम सबकी। और एक और चीज़ भी है।
राज : क्या है???
आयुष : लेप्टाप खोलकर अपनी खुद की बनाई हुई वीडियो प्ले करता है जिसमें उसने उन सब के फोटोज़ एडिट किए हुए थे।

सलीम : यह देखो सादिम ने कैसे मुँह बनाया हुआ है इसमें।

सब हँसने लग जाते हैं।

Story on Friendship in Hindi | हैप्पी फ्रेंडशिप डे 

Afariya Faruqui


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2 thoughts on “Story on Friendship in Hindi | हैप्पी फ्रेंडशिप डे”

  1. सच में आपकी कविताएं बहुत ही खूब सूरत है बहुत ही रोचक और दिल खुश करने वाली
    आपकी कविताओं से प्रेरित होकर मैंने भी कुछ कविताएं लिखी है|

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