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सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए सावन के कुछ ऐसे गीतों “सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स” का समावेश करने जा रहें हैं जिन्हें आप अपने घर-परिवार में रोजमर्रा के काम-काज के साथ गुनगुना सकते हैं|

सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स

ज्यों ज्यों बूँद परत चूनर पर,

    त्यों त्यों हरी उर लावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

अधिक झंकोर होत मेघन की,

    द्रुम तरु छिन छिन गावत आवत ॥ कुन्जन  में ….

वे हँसि ओट करत पीताम्बर,

    वे चुनरी उन उढ़ावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

भीजे राग रागिनी दोऊ,

    भीजे तन छवि पावनआवत ॥ कुन्जन  में ….

लै मुरली कर मन्द घोर स्वर,

    राग मल्हार बजावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

तैसे ही मोर कोकिला बोलत,

    अधिक पवन घन भावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

सूरदास प्रभु मिलन परस्पर,

    प्रीत अधिक उपजावतआवत ॥ कुन्जन  में ….

शब्दार्थ : आवत = आते हैं, परत = पड़ती हैं, लावत = लाते हैं, झंकोर = गड़गड़ाहट की ध्वनि, उन = उन्हें, बजावत = बजाते हुए, उपजावत = उत्पन्न करते हुए


कृष्ण हिंडोले | सावन लोक गीत इन हिंदी लिरिक्स

कृष्ण हिंडोले बहना मेरी पड़ गये जी,
       ऐजी कोई छाय रही अजब बहार

सावन महीना अधिक सुहावनौ जी,
       ऐजी जामें तीजन कौ त्यौहार
मथुरा जी की शोभा ना कोई कहि सके जी,
ऐजी जहाँ कृष्ण लियौ अवतार

गोकुल में तो झूले बहना पालनो जी,
       ऐजी जहाँ लीला करीं अपार।  
वृन्दावन तो बहना सबते है बड़ौ री,
       एजी जहाँ कृष्ण रचायो रास।
मन्दिर मन्दिर झूला बहना मेरी परि गये जी
एजी जामें झूलें नन्दकुमार
राग रंग तो घर घर है रहे जी,
ऐजी बैकुण्ठ बन्यौ ब्रजधाम।
बाग बगीचे चारों लंग लग रहे जी,
ऐजी जिनमें पंछी रहे गुंजार
मोर पपैया कलरब करत हैं जी,
ऐजी कोई कोयल बोलत डार
पावन यमुना बहना मेरी बहि रही जी,
ऐजी कोई भमर लपेटा खाय
ब्रजभूमी की बहना छवि को कहै जी,
ऐजी जहाँ कृष्ण चराईं गाय
महिमा बड़ी है बहना बैकुण्ठ तै जी,
एजी यहाँ है रहे जै जैकार।  

शब्दार्थ : जामें = जिसमें, लंग = ओर / तरफ


झुकी है बदरिया कारीकब आओगे गिरधारी

झुकी है बदरिया कारीकब आओगे गिरधारी।

उमड घुमड कर घिरी हैं घटाएँ,

       घोर शब्द होए भारी,  कब आओगे गिरधारी।

धड धड कर यह जियरा धडके,

       आए याद तुम्हारीकब आओगे गिरधारी।

पी पी शोर मचाए पपीहा,

       कोयल अम्बुआ डालीकब आओगे गिरधारी।

गरज गरज कर इन्द्र डरावे,

       देख अकेली नारीकब आओगे गिरधारी।

रिमझिम रिमझिम मेहा बरसे,

       भीजे चुनर हमारीकब आओगे गिरधारी।

ओ किशोर चितचोर साँवरे,

       चाकर मैं शरणाईकब आओगे गिरधारी।


आई बागों में बहारझूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में बहारझूला झूले राधा प्यारी

       झूले राधा प्यारी,  झुलावें बनवारी || आई बागों में …………..

सावन की ऋतु है आईघनघोर घटा नभ छाई

       ठंडी-ठंडी पड़े फुहारझूला झूले राधा प्यारी || आई बागों में …………..

हो मस्त मोर यूँ नाचेमोहन की मुरलिया बाजे

       कू-कू कोयल करे पुकारझूला झूले राधा प्यारी || आई बागों में ……….

सब सज रहीं नार नबेलीनटखट करते अठखेली

       कर कर के सोलह सिंगारझूला झूले राधा प्यारी || आई बागों में …………..

राधा संग में बनवारीझूलें हैं सखियाँ सारी

       हिलमिल गावेँ गीत मल्हारझूला झूले राधा प्यारी || आई बागों में …………..

भए ऐसे मगन कन्हाईचलती ठंडी पुरवाई

       छम-छम बरसे मूसलधारझूला झूले राधा प्यारी || आई बागों में ………..


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Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

साथियों नमस्कार, कभी कभी इन्सान कुछ ऐसे रिश्तों में फंस जाता है जहाँ उसे अपने सपने पीछे छुटते नज़र आते हैं| ऐसी ही एक कहानी “Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी” हमारी लेखिका लिपि चौहान ने हमें भेजी है, आशा है आपको हमारा यह संकलन पसंद आएगा|


Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

आज घर में अकेली थी ,राधा काम करके जा चुकी थी ,रवि ऑफिस जा चुके थे और में सारा काम निपटा के रेडियो पर गाने सुन रही थी। सुनते-सुनते नज़र शर्मा जी की बालकनी में टंगे पिंजरे पर पड़ी जहा एक प्यारा सा मिट्ठु  था।

एक खुबसुरा बोलने वाला मिट्ठू ,  जो अब बंद पिंजरे में चुप सा हो गया था। उसकी आँखे बस आकाश को देखती हुई आज़ादी का इंतज़ार करती थी उड़ने का इंतज़ार करती थी|

मुझे उससे हमदर्दी सी होने लगी वो तो एक असहाय पंछी है पर में तो इंसांन हूँ वो पिंजरा नहीं खोल सकता पर में सारे दरवाजे खोल सकती हूँ , पर क्यों हूँ  मै आज इस मुकाम पर?

माँ-पापा की चहेती,  भाई की जान और हर एक फंक्शन की जान थी मै| मुझे आज भी याद है, कॉलेज के उस फंक्शन में मेरे डांस परफॉरमेंस के बाद वन्स मोर-वन्स मोर की आवाजे आ रही थी| सारे टीचर्स और प्रिन्सिपल सर मेरी माँ को घेर कर खड़े थे|

प्रिंसिपल  तारीफ़ करते नहीं थक रहे थे| यही नहीं में कॉलेज टापर भी थी| मेरे यही सारे गुण देख कर रवि मर मिटे थे मुझ पर और मेरा हाथ मांग लिया| घर नौकरी सब अच्छी देख कर पापा ने भी मेरी शादी कर दी|

पहला एक साल तो प्यार मोहब्बत में कुछ ऐसा गुज़रा की पता ही नहीं चला| रवि की दीवानगी थी ही कुछ ऐसी थी| लेकिन वो दीवानगी सिर्फ दीवानगी नहीं थी एक ऐसा पिंजरा जो में मेरे लिए तैयार कर रही थी| जिसमे अब मेरा दम घुटता था|

मेरी खूबसूरती कोई और देखे तो रवि बर्दाश्त नहीं कर सकते थे| कोई मेरी कोई तारीफ़ करे ये भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था| मै ज्यादा सजु-सवरू तो ताने मिलते थे|

एक कॉम्पिटिशन में भाग लेने के लिए जब मैने रवि से पूछा तो उन्कहोंने कह दिया की मेरी बीवी बीच बाजार में नाचे मुझे पसंद नहीं| क्या मेरी कला जो पूरी दुनिया पसंद करती है वो अब बाज़ारू भी हो गई थी ?

दिन ब दिन उम्मीदे मेरा दामन छोड़ रही थी और में उन चार दीवारों में सिमटती जा रही थी|

मेरा किसी पडोसी से बात करना भी रवि को पसंद नहीं था| क्या यही प्यार था उसका जो मुझे कैद करता जा रहा था| शाम हो चुकी थी, में अपने लिए चाय बनाकर लाई और बालकनी में पी ही रही थी की घंटी बजे देखा तो रवि थे और कुछ जल्दी में थे…

पूछा तो कहने लगे की मीटिंग है और उसके बाद  पार्टी लेट हो जाऊंगा आने में|

मैंने  कहा कुछ जरुरी बात है तो कहने लगे फ़िज़ूल में परेशान न करो  जल्दी से सूट निकालो मुझे जाना है| पता नहीं मेरे अंदर कौन सी लहर दौड़ गई की मेने कहा फ़िज़ूल नहीं बहुत ज़रूरी है और आज सुनना होगा|

रवि गुस्से में मेरी तरफ देखने लगे मेने भी उनसे आँख से आँख मिला कर कहा, आज मेरी गुरु माँ का कॉल आया था| उन्होंने कहा की आगरा कत्थक फेस्टिवल में, मैं  गुरुकुल को रिप्रेजेंट करू|

यह सुनते ही रवि का कटाक्ष मेरे कानो में पड़ा| वो कुछ बोलते इससे पहले ही मैंने  कहा, पूछ नहीं रही हूँ बता रही हूँ| कल आगरा के लिए निकल जाउंगी और हां अभी मुझे टिकट्स करना है। जा रही  हूँ।

रवि ने कहा, जा रही हो तो दुबारा इस घर में मत आना| मैंने कहा घर और अलमारी की चाबियां टेबल पर रखी है आपके जरुरी पेपर उस ड्रावर में है और आपको बोलने की जरुरत नहीं मैंने घर छोड़ने का फैसला उस वक़्त ही कर लिया था जब आपने मेरी कला को बाज़ारू कहा  था| बस हिम्मत आज जुटा पाई हूँ।

घर से बहार आते ही महसूस हुआ जो ख़ुशी एक अरसे से गुम थी आज मिल गई|

Motivational Story in Hindi for Success | गुम है ख़ुशी

लिपि चौहान


Success Story in Hindi | आत्मविश्वाश 

दिन गर्मियों के थे, हम सब सयुंक्त परिवार में रहते थे। एक दिन मेरी कॉलोनी में कुछ खूबसूरत सी लड़कियों का आना हुआ, बात करने पर पता चला कि वो मुम्बई से आई थी।

हाव-भाव, चाल-ढाल से एकदम शहरी। मैं जो कि अभी तेरह की हुई थी, उनको देखकर बहुत प्रभावित थी। आखिर बात हुई, दोस्ती हुई….फिर घूमना, बाते करना।

अक्सर मैं उनको देखकर उन जैसा बनने की कोशिश करती| समय बीतने लगा और कोशिश बढ़ गयी, पर कोई तारीफ नही बस कोशिश……पढ़ाई में होशियार थी अब जो समय पढ़ाई का था वो सुंदर दिखने और तारीफ पाने में लगने लगा।

उम्र का वो दौर, हार्मोन की उथल पुथल, सब कुछ जैसे अजीब था। एक सीधी साधी लड़की को अब उड़ना था, लेकिन किस दिशा में ,ये उसको नही पता था।समय निकलता गया, सयुंक्त परिवार और काम के कारण माँ उतना समय नही दे पाती थी, पिता सरकारी नौकरी में थे जोकि दूसरे शहर में पदस्थ थे।

लेकिन मेरे व्यवहार में अचानक आये परिवर्तन से वो भी अनभिज्ञ न थे।आखिर पापा ने पूछ ही लिया “क्या बात है तनीषा, आज कल कहा मन रहता है तुम्हारा”। मैं बोली “परीक्षा में अभी टाइम है,मैं कोर्स कवर कर लूंगी। पर मुसीबत बढ़ने वाली थी, उन लड़कियो ने ये बात भांप ली और फिर शुरू हुआ वो दौर जिसकी मैं कल्पना भी नही कर सकती थी|

उन लड़कियो ने मेरे कद ,रंग वजन और हर उस चीज़ का मज़ाक बनाया जिसको लेकर मैं संवेदनशील थी। एक अलग ही तरह का दबाव महसूस कर रही थी। मेरा खाना खाने का दिल नही करता था, खाती भी थी तो उल्टी कर देती थी।

मै उदास रहने लगी, कितनी भी कोशिश कर लूं, मैं उन लड़कियों जितनी आकर्षक नही लग पा रही थी। असर ये हुआ कि उस वर्ष मेरा परीक्षा परिणाम बहुत बुरा रहा। समय निकल रहा था। मैं अंदर से कमजोर हो गयी थी, फिर एक दिन मैंने ऐसे जीवन को खत्म करने का सोचा।

बस किशोर मन यही सोच रहा था कि जब मुझमे कोई आकर्षण ही नही तो जीवन का अर्थ क्या, दिन और समय तय किया ,और इंतज़ार करने लगी। पर इसी बीच पापा ने फ़ोन कर बुला लिया। जगह बदली, मन बदला मरने का विचार आगे बढ़ा दिया।

सोच वही ले जाती थी मैं सुंदर नही, मोटी हु। कद कम है रंग दबा हुआ। इस दबाव को झेलते हुए एक दिन अचानक ,एक अंदरूनी ऊर्जा महसूस हुई।जैसे कोई हाथ पकड़ कर मुझे इस स्थिति से निकल रहा था। मैंने खुद तय किया कि कुछ तय समय तक मैं सिर्फ सकारात्मक बाते पढूंगी और देखूंगी। मुझे अच्छा महसूस होने लगा था।

भूख बढ़ गयी , चहरा ठीक हो रहा था। थकान भी कम हो गयी। मैंने फिर एक दिन हिम्मत करके वहां के बच्चो से दोस्ती की और शाम को रोज़ बेडमिंटन खेलने जाने लगी।सब कुछ जैसे सही हो गया था। नए दोस्त , नया माहौल सब अच्छा था । फिर वापस जाने का समय आया।घबराहट , डर के कारण हालात खराब थी, पर जाना तो था।

अगले दिन वापस आ गए। उन लड़कियों का ग्रुप सामने से जा रहा था हंसता हुआ, पर मैं स्थिर खड़ी देख रही थी न कोई डर ,न दबाव। अपने अस्तित्व का पहला अनुभव उसी दिन हुआ था मूझे और उस किशोरी के लिए ये जीवन की अमूल्य सीख थी। आज ,इतने साल बीत गए ,लड़खड़ाई , बोहोत उत्तर चढ़ाव देखे पर उस दिन हिम्मत के जो पंख मिले, उनने मुझे कभी गिरने नही दिया। ——–

यामिनी

Motivational Story in Hindi for Success


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Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

साथियों नमस्कार,  आज हम आपके लिए एक ऐसी कहानी “Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद” लेकर आएं हैं, जिसे पढने के बाद गरीब और गरीबी के प्रति आपकी सोच में परिवर्तन आ जाएगा| यह पूरी कहानी आपकी सोच को बदल कर रख देगी…


Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

‘कहाँ जा रहा है तू ?’ गंजू ने दौड़ कर जाते हुए संजू से पूछा।

‘मन्दिर’ दौड़ते दौड़ते ही संजू ने जवाब दिया।

गंजू ने तेज़ दौड़ लगाकर संजू की कमीज पकड़ ली।  संजू गिरते गिरते बचा।

‘क्या है… पकड़ा क्यों है… बता तो दिया था मैं मन्दिर जा रहा हूं’ संजू बौखलाया।

‘पर भागता हुआ क्यों जा रहा था … ऐसी क्या बात हो गई ?’ गंजू ने कहा ।

‘तू भूल गया… आज मंगलवार है… आज के दिन एक बहुत बड़ा सेठ मन्दिर में आता है और खूब सारी चीजें बाँट कर जाता है… अगर देर कर दी तो बहुत सारी चीजें खत्म हो जायेंगी।  वैसे भी लम्बी लाईन लग जाती है।  पहले ही देर हो रही थी और अब एक तो तूने आवाज़ लगा दी, फिर पकड़ कर रोक लिया।  छोड़ मेरी कमीज … फट जायेगी … तूने चलना है तो चल … अब तो तेजी से भाग कर जाना पड़ेगा’ संजू ने गंजू को डाँट लगाई।

‘चलो भागो…’ कहते हुए दोनों ही मन्दिर की ओर दौड़ पड़े।

रामभक्त हनुमान जी के इस मन्दिर में हर मंगलवार को बेकाबू भीड़ होती है। अनेक भक्त तरह तरह के प्रसाद चढ़ाते और फिर मन्दिर के बाहर गरीबों में बाँटते।

बहुतेरे भक्त अपनी गाड़ियों में खाने का काफी सामान लाते और लाइन लगवा कर बाँटते। लाइन में लगे प्रसाद पाने वाले लाइन में तो जरूर लगे रहते थे पर एक दूसरे को ऐसे पकड़े रहते थे कि बीच में कोई जगह न बचे ताकि कोई अन्य आकर उस में न घुस जाये।

जब दानी लोग प्रसाद बाँटना शुरू करते तो लाइन में हलचल शुरू हो जाती।  सबसे पीछे खड़ा अपने से आगे वाले को हलका सा धक्का भी मारता तो उसका प्रभाव लाइन में सबसे आगे खड़े तक पहुँचता, ठीक वैसे ही जैसे बिना इंजन की खड़ी रेलगाड़ी में जब इंजन आकर लगता है तो सभी डिब्बे हिल जाते हैं।

Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

कभी-कभी तो इस धक्के में इतना बल का प्रयोग होता है कि सबसे आगे वाला गिरता गिरता बचता है और चिल्लाता है ‘ठीक से नहीं खड़े हो सकते तुम’।

यूँ तो अनेक भक्त प्रसाद बाँट रहे थे।  पूड़ी-आलू की सब्जी का प्रसाद सबसे ज्यादा बँटता था।  इस प्रसाद से वहाँ प्रसाद पाने वालों की क्षुधा शांत हो जाती थी।  प्रसाद पाने वालों को स्वाद की नहीं पेट भरने की चिन्ता होती है।

कुछ प्रसाद पाने की इच्छा रखने वाले ऐसे भी थे जो लाइन में खड़े नहीं हो सकते थे।  वे मन्दिर के सामने सड़क किनारे पटरी पर बैठे थे।  यदि कुछ दानी भक्तों की दयालु नज़र उन पर पड़ जाती जो वे उन्हें वहीं जाकर प्रसाद दे आते और वे काँपते हाथों से प्रसाद पकड़ते।

अक्सर प्रसाद काफी गर्म होता था क्योंकि कुछ दानी भक्त मन्दिर के बाहर स्थित हलवाई की दुकान से ताज़ा ताज़ा प्रसाद बनवा कर बाँटते। पर मुश्किल यह थी कि पत्ते के बने दोनों में प्रसाद पकड़ना प्रसाद पाने वाले के लिए रोहित शेट्टी के शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ के खतरनाक स्टंट से कम नहीं होता था।

गर्म पूड़ी और सब्जी का दोना हाथ में आते ही उसकी गर्माहट से हथेलियाँ जल उठती थीं।  एक हथेली से दूसरी हथेली में और दूसरी हथेली से पहली हथेली में पलटते पलटते बुरा हाल हो जाता था।  बीच बीच में फूँक भी मारते रहते।

अब दानी सज्जनों का इस ओर तो ध्यान जाता नहीं था।  वे तो बस प्रसाद खत्म होने तक जल्दी जल्दी बाँटते रहते और खत्म होते ही निकल जाते। उधर जब हथेलियाँ प्रसाद की प्रचण्ड गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पातीं तो उंगलियों से गर्म पूड़ी और सब्जी का निवाला बनाकर मुँह में डाला जाता जो बहुत देर से प्रसाद पाने की प्रतीक्षा कर रहा होता था।

उंगलियां भी जैसे जल जातीं थीं। पर जैसे ही गर्म निवाला मुँह में जाता तो मुँह खुला ही रह जाता और कभी कभी जलन से कराह उठता था तथा जलन को शान्त करने के लिए खुले मुँह से जोर जोर से साँस ली जाती जिससे कि निवाला ठंडा हो जाये।  फिर जैसे-तैसे उसे पेट की अग्नि को शांत करने के लिए निगल ही लिया जाता।

चबाने का मतलब होता कि मुँह ही जल जाये।  मुँह से होता हुआ गर्म निवाला जब अन्दर की ओर बढ़ता तो खाने की नली भी जल उठती और मुँह को कोसती।  मुँह बेचारा भी क्या करता।  वह तो पहले ही जल चुका होता था।  इधर जब खाना पेट में पहुँचता तो भूख की अग्नि गर्म निवाला पहुँचते ही शान्त होने के बजाय बिफर उठती ‘आग में आग कौन डालता है ?’

शरीर में गरम प्रसाद की गर्मी का ताण्डव नृत्य होता।  पेट कराह उठता ‘भूख शान्त करने के बजाय जलाने की यह सजा क्यों ?’ ‘जो मिल रहा है उसे संभालो, हम सबकी किस्मत में यही लिखा है’ हाथ मुंह उसकी कराहट पर बोल उठते।

चूँकि अनुभवी लोगों के लिए यह अनुभव पहला नहीं होता था कुछ अनुभवी प्रसाद पाने वाले अपने साथ पहले ही कुछ व्यवस्था कर लाते थे। उनके मैले-कुचैले थैलों में प्लास्टिक के पुराने बर्तन होते थे और साथ में प्लास्टिक की बोतल में पानी।  बर्तन साफ नहीं होते थे पर इसकी उन्हें चिन्ता नहीं होती थी।  वे तो बस उसे अपने कंधे पर पड़े अंगोछे से पोंछ कर तसल्ली कर लेते थे कि बर्तन साफ हो गया।

इसी तरह प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी जो न जाने कब का भरा होता था वही पीते थे।  पर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुँच चुके वृद्ध जल्दी जल्दी प्रसाद बाँटने वालों के गति से तालमेल नहीं बैठा पाते और बर्तन होते हुए भी उन्हें गर्म दोने पकड़ने पड़ जाते।  जीवन जीने की जंग में कितने घाव सहने पड़ते हैं ये कोई इनसे पूछे।

आप पढ़ रहें हैं Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

कोई घर परिवार तो है नहीं जहाँ बिठा कर आराम से भोजन करवाया जाये। जब आलू-पूड़ी का प्रसाद खा लेने के बाद पेट जैसे तैसे भर लिया तो और खाने की गुंजाइश नहीं होती तो और बँट रहे प्रसाद का क्या करें।  कोई गाय-बैल तो हैं नहीं जो एक बार खूब सारा भर लें और बाद में बैठ कर जुगाली करते रहें।

पर फिर भी पेट भरने के बाद प्रसाद पाने वाले वहाँ से हट नहीं जाते और वे बार-बार प्रसाद की लाइनों में लगते हैं।  इस बार उनके पास प्लास्टिक की थैलियां होती हैं जिनमें वे प्रसाद भरते जाते हैं।  एक ही थैली में पूड़ी, आलू और कभी कभी हलवा यानि मिक्स्ड प्रसाद।  बाँटने वालों के पास इतना समय कहाँ कि वे अलग-अलग थैलियों में प्रसाद दें।

लेने वालों की मजबूरी होती है।  वे गर्मागर्म पूड़ी के करारेपन को गर्म आलू की सब्जी में डूबते देख रहे होते हैं कि इतने में हलवा छपाक से आ पड़ता है।  मजबूरी जो कराये वह कम।  शायद यहीं से आइडिया लेकर कुछ बिस्कुट निर्माताओं ने 50ः50 बिस्कुटों का उत्पादन किया होगा जिसमें मीठे और नमकीन दोनों का स्वाद होता है।

कुछ नौजवान भी प्रसाद बाँट रहे होते हैं पर वे आलू-पूड़ी न होकर बिस्कुट के पैकेट होते हैं।  उन्हें भी भर लेने की लालसा तीव्र होती है।  कभी कभी तो वे हाथ से खींच लिये जाते हैं और बाँटने वाले देखते ही रह जाते हैं।  लेने वाले जब कभी चाय पियेंगे तो साथ में यही बिस्कुट काम आयेंगे।  कितना सोचना पड़ता है इन प्रसाद पाने वालों को, प्रसाद बाँटने वालों से भी अधिक।

गंजू और संजू भी अपना पेट आलू-पूड़ी से भर चुके होते हैं।  उन्हें तो इन्तज़ार है सेठ जी के आने का।  इतने में संजू अपनी निकर की जेब में हाथ डालता है।  ‘जेब में क्या है ?’ गंजू पूछता है ।  जवाब में संजू जेब से निकाल कर हवा में लहराते हुए ‘अरे ये खाली थैली है, प्रसाद इकट्ठा करने के लिये’।

‘तू तो बड़ा समझदार है, मुझे तो यह आइडिया ही नहीं आया, एक और है तेरे पास’ गंजू अनुनय विनय करते हुए बोला।  ‘नहीं’ जवाब मिला। उसे इस बात की ईष्र्या होने लगी थी कि संजू तो आज ज्यादा प्रसाद इकट्ठा कर लेगा।  वह इधर उधर सड़क पर देखने लगा कि शायद कोई थैली मिल जाये।

उसकी निगाह एक थैली पर गयी जिसमें कुछ मिला जुला प्रसाद पड़ा था।  उसने तुरन्त वह थैली उठाई और उसे उलट दिया ।  यानि बाहर का हिस्सा अन्दर और अन्दर का हिस्सा बाहर जिससे प्रसाद बाहर फेंका जा सके।  फिर उसने प्रसाद किनारे लगे डस्टबिन में फेंक दिया और अब बाहरी हिस्से को हाथों से पोंछ लिया।

थैली साफ हो गई पर हाथ सन गए थे जिसे उसने अपने निकर से पोंछ लिया।  अब गंजू को भी तसल्ली हो गई थी कि वह भी प्रसाद इकट्ठा कर लेगा ।

‘सेठ जी की गाड़ी अभी तक नहीं आई।  आज प्रसाद पाने वाले भी ज्यादा हैं।  संजू तू ऐसा कर वहाँ दूर जाकर खड़ा हो जा।  जैसे ही तुझे सेठ जी की गाड़ी नज़र आये तू मुझे इशारा कर दियो और फिर भाग कर आ जाइयो, मैं सबसे आगे खड़ा हो जाऊँगा और तेरे आते ही तुझे भी अपने आगे लगा लूँगा।

कोई पूछेगा तो कह दूँगा कि मुझे कह कर गया था।’ गंजू ने आइडिया दिया।  ‘ठीक है’ कह कर संजू भाग कर दूर चला गया और एक जगह जाकर ऐसे खड़ा हो गया जहाँ गंजू भी नजर आता रहे और आती हुई सेठ जी की गाड़ी भी।

कुछ ही पलों में संजू को सेठ जी की गाड़ी नज़र आई और वह योजना के अनुसार हाथ उठाता हुआ गंजू की तरफ भाग पड़ा।  गंजू ने भी लाइन लगाने का उपक्रम किया।  पर औरों को क्या मालूम कि क्या हो रहा है।  गंजू ने पीछे मुड़कर देखा तो लाइन में वह अकेला ही था।  इतने में संजू भी आ गया और लाइन में अब दो जने हो गये थे।

‘आज मजा आयेगा’ दोनों ही खुशी से कह रहे थे।  इतने में सेठ जी की तथाकथित गाड़ी फर्राटे से उनके पास से निकल गई।  ‘यह क्या, आज सेठ जी ने प्रसाद नहीं बाँटा’ संजू बोला।  ‘अबे तुझे पक्का पता है वह सेठ जी की गाड़ी थी’ गंजू बोला।  ‘हाँ, सेठ जी की गाड़ी ऐसी ही है’ संजू बोला।  ‘ऐसी ही है का क्या मतलब, ऐसी तो कई गाड़ियां हो सकती हैं, तुझे गाड़ी का नम्बर नहीं मालूम’ गंजू बौखलाया।

‘तू तो ऐसे कह रहा है जैसे तुझे नम्बर पढ़ना आता हो, तू पढ़ सकता है गाड़ी का नम्बर, बता सामने वाली गाड़ी का नम्बर क्या है?’ संजू ने पलट कर कहा।  ‘यार कह तो तू ठीक रहा है, हम पढ़े लिखे तो बिल्कुल भी नहीं हैं।  अभी से हमारा यह हाल है तो बड़े होकर क्या होगा ?  हमसे कौन शादी करेगा ?

अगर हो भी गई तो हमारे बच्चे भी क्या यहीं लाइनों में लगेंगे ?’ गंजू ने भविष्य की कल्पना संजू से साझा की थी।  ‘कह तो तू ठीक रहा है गंजू, कुछ सोचना पड़ेगा’ संजू ने सिर खुजाया।  वे यह सब सोच ही रहे थे कि सेठ जी की गाड़ी आ गई और लाइन लग गई।  शोर-शराबे से दोनों का ध्यान टूटा तो देखा कि सेठ जी की गाड़ी में लाया गया प्रसाद बाँटा जाने लगा था।

लम्बी लाइन लग चुकी थी और वे लाइन से बाहर थे।  आज की सोच ने उनकी प्रसाद लेने की इच्छा पर आक्रमण कर दिया था।  प्रसाद पाने की इच्छा छोड़ वे गाड़ी में बैठे सेठ जी के पास गये और उन्हें नमस्ते की।  ‘अरे बेटा, प्रसाद बँट रहा है, जाकर ले लो’ सेठ जी ने प्रेम से कहा।  पर वे वहीं खड़े ही रहे।

‘क्या बात है बच्चो, तुमने प्रसाद नहीं लेना क्या’ दयालु सेठ ने फिर पूछा।  ‘सेठ जी, प्रसाद तो लेना है मगर वह नहीं जो आप बाँटते हैं, हमें कुछ और चाहिए’ दोनों बोले।  ‘बेटा, अगर तुम सोच रहे हो कि मैं प्रसाद में तुम्हें पैसे दूँ तो यह न हो सकेगा, मेरे असूल के खिलाफ है’ सेठ जी ने फिर कहा।

‘नहीं सेठ जी, हमें पैसे भी नहीं चाहियें’ दोनों ने एकसाथ कहा।  ‘तो बच्चो, फिर क्या चाहिए?’ सेठ जी ने उत्सुकता से कहा।  ‘सेठ जी, हम दोनों पढ़ना चाहते हैं, आप हमारे पढ़ाने की व्यवस्था कीजिए’ दोनों ने फिर एकसाथ कहा।

‘क्या … क्या बात है’ कहते हुए सेठ जी गाड़ी से उतर आये।  उन्होंने संजू और गंजू से कहा कि उनकी उम्र के जो भी बच्चे हैं उन्हें इकट्ठा करो। वे दोनों भाग-भाग कर हमउम्र बच्चों को इकट्ठा कर लाये।  10-12 बच्चे इकट्ठे हो गये थे।  सेठ जी ने उन सभी के बारे में जानकारी ली और पूछा ‘तुम में से कौन-कौन पढ़ना चाहता है ?’

हिंदी कहानी Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

सभी के हाथ एकसाथ उठ गये।  सेठ जी हैरान रह गये।  ‘यह मैं क्या प्रसाद बाँटता रहा आज तक, इन दोनों बच्चों ने मेरी आँखें खोल दी हैं, इस प्रसाद के साथ साथ मैं प्रण करता हूँ कि अब मैं शिक्षा का प्रसाद भी बाँटूंगा’ सेठ जी ने मन ही मन कहा।

‘बच्चो, तुम्हारे घरों के पास जो स्कूल है, वहाँ कल सुबह तुम मुझे मिलो, मैं तुम्हारा स्कूल में प्रवेश कराऊँगा और पढ़ाई का पूरा इन्तज़ाम करूँगा।  तुम खूब मन लगाकर पढ़ना और बड़े होकर मेरी तरह बनना’ कहते कहते सेठ जी नरम हो गये थे।  ‘हम भी आप बन सकते हैं’ बच्चों ने एकदम पूछा।

‘हाँ, क्यों नहीं, अगर तुम पढ़ लिख गये तो मेरे से भी ज्यादा आगे बढ़ जाओगे’ सेठ जी ने उत्साहवर्द्धन किया।  ‘वाह, चलो भई चलो, हम सब कल सुबह स्कूल में मिलेंगे’ कहते हुए बच्चे वहाँ से चले गये।  ‘अरे, प्रसाद तो लेते जाओ’ सेठ जी मुस्कुरा कर बोले।  ‘नहीं सेठ जी, आज जो आपने प्रसाद बाँटा है उस प्रसाद को तो हम भी कुछ समय बाद बाँटेंगे और आपको हमेशा याद करेंगे’ बच्चे आह्लादित थे।

‘बच्चो, आज मैंने नहीं तुमने मुझे प्रसाद बाँटा है, अगर तुम न कहते तो मेरे चक्षु नहीं खुलते।  आज तुमने मुझे जीवन में मंगलवार का बहुत बड़ा प्रसाद दिया है कहते हुए सेठ जी अपनी आँखें पोंछने लगे थे।

Hindi Emotional Story | मंगलवार का प्रसाद

सुदर्शन खन्ना


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Why Snapdeal Failed | आखिर क्यों स्नेपडील हुई बर्बाद ?

Why Snapdeal Failed | आखिर क्यों स्नेपडील हुई बर्बाद ?


साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक खास आर्टिकल “Why Snapdeal Failed | आखिर क्यों स्नेपडील हुई बर्बाद ?” लेकर आएं हैं एक ऐसी कहानी जो आपको सोचने पर मजपुर कर देगी की आखिर कैसे भारतीय समाज के खिलाफ बोला गया एक शब्द करोड़ों की एक कंपनी को मिटटी में मिला सकता है! पढ़ें हमारा पूरा आर्टिकल…


Why Snapdeal Failed | आखिर क्यों स्नेपडील हुई बर्बाद ?

बात 2012 की है जब मै ऑनलाइन शॉपिंग पर भरोसा ना के बराबर करता था! एक दिन ओपेरा ब्राउज़र देखते हुए, मेरी नजर एक बेल्ट की एड पर पड़ी! पड़ताल किया तो एड स्नैपडील का था जो कैश ऑन डिलीवरी था, मैंने बेमन बेल्ट ऑर्डर कर दिया! 7 दिन बाद कॉल आई आपका आर्टिकल आया हुआ है, आप घर पर है या नहीं, मैंने उसको टाइम दिया और उसी टाइम डिलीवरी बॉय, डिलीवरी देने पहुंचा!

मैंने डिलीवरी से पूर्व खोलकर दिखाने का आग्रह किया लेकिन डिलीवरी बॉय ने शर्तों का हवाला देकर मना करते हुए कहा आप पैसे देने के बाद ही खोल सकते हैं किन्तु वही आर्टिकल नहीं निकला तो आप 15 दिन में वापस करके कंपनी से पैसे वापस ले सकते हैं! मैंने उसकी बात मानकर पैसे देकर उसी के सामने पेकिंग खोली, और वही आर्टिकल पाकर अपार हर्ष हुआ!

अब आप सोच रहे हैं कि मै अनायास ही क्या बताएं जा रहा हूँ, तो आप यूँ समझ जाए मेरी तरह कई लोगों ने अपनी पहली ऑनलाइन शॉपिंग स्नैपडील से ही की! उत्पाद गुणवत्ता और होम डिलीवरी की वजह से कंपनी का मार्केट भी तीव्र गति बढ़ गया समय के साथ किन्तु एक घटना के बाद कंपनी का मार्केट बूरी तरह से धड़ाम हो गया!

मोदीजी और मोदीजी की नीतियों का विरोध करते हुए कंपनी के ब्रांड एंबेसडर आमिर खान ने एक ब्यान दिया की अब देश रहने लायक नहीं रहा और मै देश छोड़ने में फायदा देख रहा हूँ! आमिर के इस बयान को लोगों ने देश विरोधी ब्यान की तरह लिया और कंपनी से तत्काल ब्रांड एंबेसडर के रूप से आमिर को हटाने का आग्रह किया!

कंपनी ने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया, कंपनी के तत्काल कदम नहीं उठाए जाने से नाराज ग्राहकों ने अपने मोबाइल से स्नैपडील App हटाने का कदम उठाया और एक दिन में ही 8 लाख लोगो ने App को अनइन्स्टाल कर दिया सप्ताह भर में यह आंकड़ा 25 लाख पार हो गया!

लोगों की भावना को समझने में नाकामयाब होने से लोगों ने कंपनी से सामान खरीदने में आनाकानी शुरू करते हुए स्लो डिलीवरी, नकली माल और देश विरोधी कंपनी जैसे कई ताने बुन दिए! एकमात्र घटना कंपनी की लाख बुराई बाजार में ले आई और ग्राहक दूसरी कंपनी की तरफ रुख करने लगे!

 

ऐसी ही घटना पिछले दिनो सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले प्रोग्राम कपिल शर्मा की कॉमेडी के साथ भी हुई ! प्रोग्राम के नीयत मेजबान नवजोत सिंह सिद्धू ने भारत विरोधी ब्यान दिया जिससे लोग चैनल लॉक का आग्रह करने लगे तभी कंपनी ने एक अधिकारिक ब्यान देकर सिद्धू को शॉ से बाहर का रास्ता दिखा दिया! वैसे ही सर्फ एक्सेल ने भी अपना विवादित विज्ञापन वापस लेकर ग्राहक को छिटकने का मौका नहीं दिया!.

हालांकि अब कंपनी ने आमिर खान को ब्रांड एंबेसडर से हटा दिया है, किंतु कंपनी द्वारा देरी से उठाया गया कदम ग्राहको के कंपनी के प्रति दृष्टिकोण को बदलने में कामयाब नहीं हो पाया है! ये ना सिर्फ स्नैपडील बल्कि सभी कंपनी के लिए एक चेतावनी है कि समाज की भावना के विरुद्ध कार्य आपका बना बनाया बाजार एक दिन में ही ढहा सकता है!.

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Basant Panchami | बसंत पंचमी

Basant Panchami | बसंत पंचमी

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए “Basant Panchami | बसंत पंचमी” पर एक शानदार आर्टिकल लेकर आए हैं जहाँ आप जानेगे की भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का क्या महत्त्व है ?  क्यों हम बसंत पंचमी मानते हैं ? बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा Saraswati Puja का क्या महत्त्व हैं| सरस्वती पुजन की क्या विधि है ? साथ ही हम जानेंगे बसंत पंचमी पर गाए जाने वाले कुछ गीतों के बारे में|


Basant Panchami | बसंत पंचमी

बसंत पंचमी यानि की प्रकृति के सजने सँवरने के शुरुआत, या फिर यूँ कहें की पकृति के एक नए कलेवर में आने का समय, जब चारों और पीले फूलों की बहार छा जाती है| माना जाता है की इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा अर्चना से विधा की प्राप्ति होती है इसीलिए इस दिन माँ सरस्वती की पूजा पीले फूलों, फलों व् पीले व्यंजनों से की जाती है|

बसंत पंचमी का दिन हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है| हिन्दू संस्कृति में इस दिन से कई परम्पराएं जुडी हुई है| इसी दिन देवी सरस्वती की पूजा कर नन्हे मुन्हें बच्चों को विद्यारम्भ (प्राथमिक शिक्षा) की प्रक्रिया शुरू कराई जाती है| यानि की इस दिन को बच्चों की शिक्षा आरम्भ करने के लिहाज से भी शुभ माना गया है|

साथ ही विवाह जैसे पवित्र बंधन में बंधने के लिहाज से भी यह दिन शुभ माना गया है| कहा जाता है की इस दिन विवाह बंधन में बंधने वाले युगल उम्र भर एक दुसरे का साथ निभाते हुए ख़ुशी-ख़ुशी अपना जीवन यापन करते हैं|


हिन्दू मान्यताएं

बसंत पंचमी के दिन से कई हिन्दू मान्यताएं जुडी हुई है इसीलिए इस दिन को हिन्दू रीती-रिवाजों के लिए श्रेष्ठ माना गया है| आइये जानते हैं बसंत पंचमी से जुड़े कुछ हिंदी रीती-रिवाजों के बारे में!

  • ब्रम्हांड की रचना :- कहा जाता है की महर्षि ब्रम्हा ने ब्रम्हांड की रचना इसी दिन की थी| यानि की सभी जीवों और मानव का जन्म इसी दीन हुआ था|
  • सरस्वती पूजा :- यह भी मान्यता है की माँ सरस्वती का प्राकट्य बसंत पंचमी के दिन ही हुआ था| इसीलिए देवी सरस्वती की पूजा का विधान भी इसी दिन है| इस दिन लोग अपने घर, स्कूल व् दफ्तर को पीले रंग के फूलों से सजाते है| माँ सरस्वती को बुद्धि और कला की देवी माना जाता है इसीलिए इस दिन को “सरस्वती पंचमी” के रूप में भी जाना जाता है| इस दिन गुरु के समक्ष बैठकर उनसे शिक्षा ग्रहण करने का शुभारम्भ भी किया जाता है तथा पुस्तकों और वाध्य यंत्रों को देवी के समक्ष रखकर पूजा की जाती है|
  • पट्टी पूजन :- बसंत पंचमी को पट्टी पूजन के लिए श्रेष्ठ दिन माना गया है| पट्टी पूजन भारतीय संस्कृति की एक परंपरा है जिसमें नन्हे-मुंहों की कल्पनाओं को कागज पर उतारने की पहली प्रक्रिया की जाती है|  जिसके तहत बच्चों को पहली बार पट्टी और पेम पकड़ाई जाती है और बच्चों की उच्च शिक्षा व् बुद्दी की कामना की जाती है| विद्वानों का मानना है की इस दिन बच्चों की जीभ पर शहद से ॐ बनाना चाहिए, इससे बच्चा ज्ञानवान होता है व् शिक्षा जल्दी ग्रहण करने लगता है|
  • अन्नप्राशन :-  छः माह पुरे हो चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला खिलाने की परंपरा को अन्नप्राशन कहा जाता है| भारतीय मान्यताओं के अनुसार अन्नप्राशन की परंपरा के लिए Basant Panchami का दिन सबसे खास दिन होता है|
  • विवाह :-  भारतीय परम्पराओं और ग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन विवाह के लिए सबसे श्रेष्ठतम दिनों में से एक है| इस दिन को परिणय सूत्र में बंधने के लिए सबसे खास दिनों में से एक माना गया है|

इनके साथ-साथ गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी बसंत पंचमी के दिन को श्रेष्ठ माना गया है|


विभिन्न राज्यों में बसंत पंचमी 

कहते हैं की भारत में हर सौ किलोमीटर पर भाषा और खान-पान बदल जाता है| शायद इसीलिए यहाँ की मान्यताएं भी भाषा की तरह अलग-अलग है| खैर, भारत में हर राज्य में मान्यताएं चाहे अलग-अलग हो लेकिन त्योहारों का महत्त्व एक सा है| Basant Panchami उत्सव को लेकर भी भारत में हर राज्य में अपनी अलग-अलग परम्पराएं है! आइये जानते हैं भारत के विभिन्न राज्यों में बसंत पंचमी का महत्त्व…

मध्य प्रदेश व् राजस्थान :-  मध्य प्रदेश व् राजस्थान में इस दिन को विद्यालयों में खास तौर पर मनाया जाता है| इस दिन बच्चों को पीले कपडे पहनने, पीले फूलों की माला या फिर फुल लाने को कहा जाता है और फिर विधि विधान के साथ देवी सरस्वती की पूजा की जाती है| संस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके तहत कई प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती है|

बिहार :- बिहार में बसंत पंचमी के दिन पीले कपडे पहनने के साथ साथ माथे पर पीले रंग का हल्दी का टिका लगाने का भी रिवाज है| इस पर्व को बिहार में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है| इस दिन मिठाई के रूप में हर घर में केसरिया खीर बनाई जाती है| खीर के साथ साथ बूंदी व् बेसन के लड्डू बनाने का रिवाज भी काफी लोकप्रिय है| आज भी बिहार में बसंत पंचमी के दिन मंदिरों में मालपुए का प्रशाद वितरित किया जाता है|

 बंगाल :- बंगाल की बोली और यहाँ की मिठाइयों के चर्चे देश-विदेश में होते हैं| बंगाल में नवरात्री उत्सव को देखने देश-विदेश से पर्यटक भारत आते हैं| लेकिन बंगाल में केवल नवरात्री ही धूमधाम से नहीं मनाई जाती वरन बंगाल में हर त्यौहार को अपने अनूठे तरीके में मानाने का रिवाज है| दुर्गा पूजा की तर्ज पर ही बंगाल में सरस्वती पूजा को भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है| इस दिन भी दुर्गा पूजा की तरह ही पंडाल सजाकर देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और प्रसाद का वितरण किया जाता है| प्रसाद के रूप में इस दिन बंगाल में बूंदी के लड्डू, खिचड़ी व् केसरी राजभोग बांटा जाता है|

उत्तरकाशी :- उत्तरकाशी में इस दिन घर के मुख्य द्वार पर पीले फुल बांधने का रिवाज है| साथ ही साथ पीले वस्त्र पहन कर, पीले मिष्ठान के साथ माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है| इस दिन घर से सभी सदस्य नहां धोकर माँ सरस्वती की पूजा अर्चना कर बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं|

पंजाब-हरियाणा :- देश के इन दो प्रमुख राज्यों में बसंत पंचमी को मानाने का अपना एक अनूठा रिवाज है| यहाँ बसंत पंचमी के दीन पतंगे उड़ाई जाती है और नृत्य संगीत का आयोजन किया जाता है|


चारों और ख़ुशी और उल्लास का माहोल

बसंत ऋतू में खेतों में फसलें लहलहा उठती है और फुल खिलने लगते हैं| जब खेतों में फासले लहलहा उठती है तो चारों और पीले रंग की बयार छा जाती है| खासतौर पर इस समय सरसों की फसल पर फुल आने लगते हैं|

सरसों के पीले रंगों से छठा निखरती है, जो वसंत शब्द को चरितार्थ करती है| खास तौर पर बसंत पंचमी फूलों के खिलने और फसल के आने का त्यौहार है| बसंत ऋतू सर्दी ख़त्म होने के बाद आती है और इस मोसम में प्रकृति की छठा देखते ही बनती है|

सेहत की दृष्ठि से अगर देखा जाए तो यह मोसम सबसे खास होता है| सर्दी के ख़त्म होने के बाद मोसम में आई थोड़ी सी गर्मी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा कर देती है| इसीलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर स्वास्थ और लम्बी उम्र की कामना की जाती है|


सरस्वती माता पूजन विधि :- Saraswati Puja

वैसे तो भक्ति मन के भाव से की जाती है| शुद्ध मन से आप भगवान् को जो भी अर्पण करते हैं भगवान् उसे सहज ही स्वीकार कर लेते हैं| लेकिन फिर भी हमारी भारतीय संस्कृति में हर देवी देवता की पूजा की अपनी एक अनूठी परंपरा है| माँ सरस्वती के पूजन (Saraswati Puja) के लिए पहले आप पूजा की सामग्री को एक थाल में सजा लें!

पूजन सामग्री :- बैर, शकरकंद, पिला फल या पिली मिठाई, पंचामृत, पञ्च मेवा, गुड, बताशे, लोंग, इलाइची, पान के पत्ते, कसेली,  माँ सरस्वती के लीए पीले वस्त्र, अबीर, चन्दन, अक्षत, धुप-अगरबत्ती, घी का दिया, सफ़ेद या पीले फुल

पूजन विधि :- सबसे पहले पूजन वाली जगह पर एक लाल रंग का आसन बिछा ले| माँ सरस्वती की प्रतिमा को आसन पर रखें साथ ही घर में पढने वाले बच्चों की किताबों और पैन को भी पूजन स्थल पर रख दें| इसके बाद माँ सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित करें| जिसके बाद माँ सरस्वती को श्रृंगार सामग्री अप्रीत कर माँ को कुमकुम और अक्षत अर्पित करें|

इसके बाद माँ को हल्दी लगाकर पान के पत्ते को माता के पास रख दे| भोग के प्रशाद को पान के पाते पर रख माँ को भोग लगाए| इसके बाद माता को पुष्प अर्पित करें| माँ को पंचामृत अर्पित कर दीप प्रज्वलन करें व् धुप-अगरबत्ती जलाएं| इसके बाद माँ के समक्ष हाथ जोड़कर माँ की आराधना करें और अपने व् अपने परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना करें!


सरस्वती माता की आरती :- Saraswati Mata Aarti

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता
सद्गुण वैभव शालिनी (2) , त्रिभुवन विख्याता…
जय जय सरस्वती माता!

चंद्रवादिनी पद्मसिनी, धृति मंगलकारी,
ओ मैया धृति मंगलकारी,
सोहे शुभ हंस सवारी (2) , अतुल तेजधारी
जय जय सरस्वती माता!

बाएँ कर में विणा, दाएं कर में माला
ओ मैया दाएं कर में माला
शीश मुकुट मणि सोहे (2) , गल मोतियन माला
जय जय सरस्वती माता!

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया
ओ मैया उनका उद्धार किया
पैठी मंथरा दासी (2) , रावण संहार किया…
जय जय सरस्वती माता!

विद्या ज्ञान प्रदाइनी, ज्ञान प्रकाश भरो
ओ मैया ज्ञान प्रकाश भरो,
मोह अज्ञान तिमिर का (2) , जग से नाश करो
जय जय सरस्वती माता!

धुप, दीप, फल मेवा..माता स्वीकार करो
ओ मैया स्वीकार करो,
ज्ञान चक्षु दे माता (2) , जग निस्तार करो…
जय जय सरस्वती माता!

माँ सरस्वती जी की आरती, जो कोई नर गावे..
ओ मैया जो कोई नर गावे…
हितकारी सुखकारी (2) , ज्ञान भक्ति पावे..
जय जय सरस्वती माता!

Saraswati Mata Aarti को youtube पर सुनने के लिए यहाँ लिक्क  करें! 


बसंत पंचमी पर कविता :- Basant Panchami Poem

लो बसंत का मौसम आया

लो बसंत का मौसम आया,
खुशियाँ झोली भर कर लाया!
हरियाली पेड़ों पर छाई,
खेतों में फसलें लहराई!
वन पलाश के दहक उठे हैं,
फुल बाग़ में महक उठे हैं!
मह-मह करता है जग सारा,
है बसंत हम सब का प्यारा!!

कलियों ने घूँघट है खोले,
हर फुल पर भंवरा डोले!
तोते उड़ते मैना गाती,
बुलबुल मीठी तान सुनाती!
झुमके अमलताश फूलों के,
पट पीले पुष्पित सरसों के!
फुल मटर का लगा केश में,
दुल्हन सी धरती सुवेश में!!

सबको बना रहा यह ताजा,
है बसंत ऋतुओं का राजा!!

Basant Panchami

बसंत ऋतू आई

दिन को सूरज लगा चमकने,
हवा लगी है अब सर-सर बहने!
पत्ते पीले पड़े पेड के,
झरने हवा संग है उड़ते!

ऋतू वसंत का स्वागत करने,
नई कोंकले सजी है पेड पर!
सेमल खिलता लाल फुल से,
टेसू फुला डाल-डाल पर!

कोयल पंचम सुर में गाती,
मीठा मंगल गाना सुनाती!
कुक-कुक कर डाली-डाली,
सबके कानों में कह जाती!

ऋतू वसंत छाई मतवाली,
कचनारों की छठा निराली!
सरसों फूली पिली-पिली,
बिज खिली है अलसी नीली!

सरसों खेत वसंती रंग का,
हवा चली पिला रंग लहरा!
मैला लगा रंग खुशबु का,
फागुन का है ये जादू क्या!

कड़ी ठण्ड न गर्मी ज्यादा,
तन मन फुर्ती से भर जाता!
ख़ट मिटटी पेड़ों से झाड़ी,
लड़ी फलों से झुकती डाली!

कच्ची अमिया खट्टी-खट्टी,
इमली भी अब मिलने लगती!
ठंडा शरबत आचा लगता,
मुश्किल से अब निम्बू मिलता!

घड़े सुराही अब बिकने आते,
सोंधा ठंडा पानी लाते!
पतली ककड़ी हरा पुदीना,
दही मत्ठा अब खाना पीना!

शाम खुले में अच्छा लगता,
हसना खेलकर खूब महकना!
ये सुख थोड़े दिन के आगे, गर्मी के दिन लम्बे…
अब पढाई सर पर भारी, करो परीक्षा की तैयारी!

फिर तो लम्बी छुट्टी होगी,
सरे दिन तक मौज रहेगी!

कविता :- सुभद्रा कुमारी चौहान


पढ़ें बसंत पंचमी पर हमारी कहानी “बसंत

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10 किताबें जिन्हें ज़रूर पढ़ें | Motivational Books in Hindi

10 किताबें जिन्हें ज़रूर पढ़ें | Motivational Books in Hindi


किताबें जो हमें हमेशा ज़िंदगी में कुछ ना कुछ सिखाती है। बचपन से हम किताबों के बीच ही रहें हैं। किताबों ने ही हमें किताबें पढ़ना सिखाया, किताबों में लिखी कहानियों मे ख़ुद को जीना सिखाया। सिखाया की कैसे हम दूसरों की ज़िंदगी को पढ़कर ख़ुद की ज़िंदगी में बड़े बदलाव कर सकते हैं, कैसे दुनिया का हर वो हुनर सिख सकते हैं जिसे सिखने की हम में क़ाबिलियत है। हमारे इस लेख “10 किताबें जिन्हें ज़रूर पढ़ें | Motivational Books in Hindi” मेंआज हम आपको एसी ही कुछ किताबों के बारे में बताने जा रहें हैं जिन्हें पढ़कर आप ख़ुद को बुलंदियों की नई ऊँचाइयों पर महसूस करेंगे।

                         Top 10 Motivational Books in Hindi

1. The Secret – Rhonda Byrne

यह किताब आस्ट्रेलियन टीवी लेखक और निर्देशक “Rhonda Byrne” द्वारा साल 2006 में लिखी गई थी| इस किताब को लिखते समय “Rhonda Byrne” ने यह नहीं सोचा था की यह किताब उनकी ज़िन्दगी बदलने वाली है| इस किताब में उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में हुए कुछ अनुभवों को साझा किया है| इस किताब के मुताबिक अगर आपमें दुनियां बदलने का ज़ज्बा है और अगर आप वाकई में दुनियां बदलना चाहते है और यदि यह आपने ठान लिया है तो एक न एक दिन आप दुनियां ज़रूर बदल देंगे| इस किताब में मन की वैचारिक शक्ति पर काफी जोर दिया गया है|
इस किताब ने दुनियां भर में लगभग 30 लाख प्रतियाँ बेचीं है और इस पुस्तक का अनुवाद लगभग 50 भाषाओँ में किया गया है|

इस किताब को पढने के लिए यहाँ क्लिक करें!

2. Meri Jeevan Yatra – Dr. APJ Abdul Kalam

रामेश्वरम जैसी छोटी सी जगह पर जन्म लेकर भारत के राष्ट्रपति बनने तक का सफ़र अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है| लेकिन राष्ट्रपति बनने तक का सफ़र इतना आसान भी नहीं था| डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन असाधारण संकल्प शक्‍त‌ि, साहस, लगन और श्रेष्‍ठता की प्रेरणाप्रद कहानी है जिसके बारे में आज हर एक युवा जानना चाहता है| डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन को उनसे बहतर शायद ही और कोई जान सकता हो, इसीलिए अपने अंतिम दिनों में डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपने संघर्ष की कहानी को शब्दों के रूप में पिरोकर एक किताब का रूप देकर देश के युवाओं को एक अमूल्य उपहार दिया है| इस किताब में डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अपने जीवन के खास पलों को लिखते है और बतातें हैं की किस तरह उन पलों ने ने उन्हें लगातार कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित किया| बंगाल की खाड़ी के पास स्थित छोटे से गाँव में बिताए बचपन से वैज्ञानिक बनने और फिर देश के राष्ट्रपति बनने तक के सफर में आई बाधाओं, संघर्ष, उनपर विजय पाने आदि अनेक तेजस्वी बातें उन्होंने अपनि इस किताब में बताई हैं। ‘मेरी जीवन-यात्रा’ अतीत की यादों से भरी, बेहद निजी अनुभवों की ईमानदार कहानी है, जो जितनी असाधारण है, उतनी ही अधिक प्रेरक, आनंददायक और उत्साह से भर देनेवाली है।

 

3. You Can Win | जीत आपकी Motivational Books in Hindi

जीत आपकी : यह किताब प्रख्यात लेखक “शिव खेडा” की किताब “You Can Win” का हिंदी रूपांतरण हैं| यह किताब हिंदी पाठकों के में और खासकर विद्यार्थियों के बिच काफी लोकप्रिय है| इस किताब में शिव खेडा ने हर चीज को देखने के “नज़रिये” पर खासा जोर दिया है| किताब में एक जगह लेखक ने यह भी लिखा है, कि “सफ़र लोग असाधारण काम नहीं करते, वे हर काम को असाधारण तरीके से करते हैं| इस किताब में हर बात को जीवन में आने वाले किसी न किसी पहलु से जोड़कर कई उधारहण के साथ बताया गया है| इस किताब में कई ऐसे लोगों के बारे में भी बताया गया है जिन्होंने दुनियां की भीड़ से अलग सोचकर आज अपनि एक अलग जगह बनाई है| इस किताब को 16 से अधिक भाषाओँ में पब्लिश किया गया है और इस किताब की अभी तक 26 लाख से अधिक प्रतियाँ बेचीं जा चुकी है|

शिव खेडा ने प्रेरक  लेखक बनने से पहले एक कार वॉशर, एक जीवन बीमा एजेंट और एक फ्रेंचाइजी ऑपरेटर के रूप में काम किया है!

4. Rich Dad Poor Dad (Hindi)

“रिच डेड-पुअर डेड” यानि की “अमीर पिता-गरीब पिता”  में लेखक ने समाज के दो अलग-अलग विचारधारा के लोगों के विचारों को पाठकों के बिच लाने का प्रयास किया है| यह कहानी एक ऐसे लड़के की है जीसके दो पिता एक जो उसके सगे पिता हैं और एक उसके सबसे अच्छे दोस्त माइक के पिता हैं कैसे उसे जीवन में सफलता प्राप्त करने के दो अलग-अलग तरीके सिखाते हैं| लेखक इस कहानी में लड़के के दोनों पिता के विचारों की तुलना करता है| लेखक अपने अमीर पिता से पेशेवर समझ और ताकत में अपने गरीब, अत्यधिक शिक्षित और संघर्षशील पिता की तुलना करता है| गरीब पिता को इस नजरिये से देखा जाता है की वह चूहों की दौड़ में कैसे संघर्शिशील है और कैसे अपने सपनों और धन को पाने में असमर्थ है क्यों की उसे व्यवसाय ज्ञान की कमी है| यह किताब संघर्ष और व्यवसायीक सोच के कई उदारहण प्रस्तुत करती है| यह किताब खासकर उन युवाओं के लिए है जो मध्यम वर्ग से हैं और अपने संघर्ष सेअपने सपनों को पाने के लिए प्रयासरत है| यह किताब 1 सितम्बर 2002 को प्रकाशित हुई थी और अब तक इस किताब की लगभग 2.5 करोड़ से ज्यादा प्रतियाँ बेचीं जा चुकी है|

5. Safal Vakta Safal Vyakti | सफल वक्ता सफल व्यक्ति 

डॉ उज्जवल पाटनी की किताब “Communication Skill” पर आधारित है| कई बार हम समाज में, किसी प्रतिष्ठान में या फिर किसी कार्यक्रम में मंच पर जाना चाहते हैं या मंच सञ्चालन करना चाहते हैं लैकिन भय आपको रोक देता है| आप एक लीडर के रूप में खुद को साबित करने के लिए कड़ी मेंहनत कर देते हैं लेकिन लोग आपके नेतृत्व को सिरे से नकार देते हैं| इस परिस्थिथि में कई बार आप अपने आप को ही गलत समझने लगते हैं, कई बार लोग आपकी बातों को समझ नहीं पाते और आपकी बातों का गलत मतलब नीकाल लेते हैं| आपके आत्मविश्वाश की कमी से खुद को साबित करने का एक बहतरीन मौका हाथ से निकल जाता है और आपको उतनी तरक्की और प्रसिद्धि नहीं मिल पति जिसके आप हक़दार है| सफल वक्‍ता, सफल व्‍यक्ति  किताब आपको शत-प्रतिशत प्रैक्टिकल तरीके बताएगी जिससे आप अपनी बातों से दूसरों का दिल जीत सकेंगे, मंच और माइक का बिना किसी भय के सामना कर सकेंगे, आपकी बातों को दूसरे महत्‍व देंगे एवं आप आत्‍मविश्‍वास से समूह और भीड में अपनी बात रख सकेंगे। यह किताब खासकर उन युवाओं के लिए है जिहें मंच पर जाने और सो लोगों के बिच अपने  रखने में डर लगता है| साथ ही यह किताब उन युवाओं के लिए भी है जो मंच सञ्चालन के खास पहलुओं को सीखकर मंच के बादशाह बनना चाहते हैं|

Motivational Books in Hindi

6. Time Management (Hindi)

“टाइम मैनेजमेंट” यानि की “समय प्रबंधन” किताब एक शिक्षाप्रद किताब है| जिसमें समय प्रबंधन यानि की समय का सही जगह और सही तरीके से उपयोग कैसे किया जाए समझाया गया है| यह किताब योजनाबद्ध तरीके से समय प्रबंधन को सिखाने का एक अनूठा प्रयास है जिसे किताब के लेखक “सुधीर दीक्षित” ने बखूभी समझाया है| यदि समय प्रबंधन के साथ किसी भी कार्य को किया जाए तो कार्य के होने के संभावना कई गुना बढ़ जाती है| इस किताब में समय प्रबंधन के लिए कई तकनीकों, तरीकों व् कोशल को बताया गया है| पहले समय प्रबंधन की तकनीकों का उपयोग केवल व्यावसायिक उपयोग क लिए ही किया जाता था लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में समय की कमी के कारण समय प्रब्नंधन की तकनीकों का रोज मर्रा की ज़िन्दगी में उपयोग करना ज़रूरी हो गया है| अगर आपको भी लगता है की आप कापके महत्वपूर्ण काम समय पर पूरा नहीं कर पाते तो यकीं मानिये यह किताब आपके लिए है|

7. Body Language (Hindi)

यह किताब बताती है कि सफल होने के लिए सिर्फ शब्द ही नहीं, चेहरे के हाव-भाव और मुद्राएँ भी सही होनी चाहिए। कई बार आप बाडी लैंग्वेज के प्रयोग द्वारा लोगों के दिलों की बात जान सकते हैं और अपनी सफलता एवं लोकप्रियता को बढ़ा सकते हैं। कई बार आपको किसी जगह बोलने का मोका नहीं मिल पता ईएसआई जगह आप आपकी “बाडी लैंग्वेज” का उपयोग कर लोगों के दिलों में राज कर सकते हैं| अग आप विधार्थी जीवन में है तो यह किताब आपके लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है| विधार्थी इस किताब को पढ़कर इंटरव्यू के समय अपनी एक अलग छाप छोड सकते हैं| इस किताब में लेखक ने बोलने के तरीके, शरीर के हाव भाव, चहरे और आत्मविश्वाश पर बात की है|

8. अति प्रभावकारी लोगों की 7 आदतें |Ati Prabhavkari Logon ki 7 Aadtein

कुछ तो फर्क है सफल और असफल लोगों के बिच और वह फर्क है सोच और आदतों का| सफल व्यक्ति कुछ ऐसे काम करते हैं जो असफल लोग नहीं करते| यह किताब सफल लोगों की सात ऐसी आदतों के बारे में बताती है जिन्हें अपनाकर हम भी सफलता के परचम लहरा सकते हैं| यह बेस्टसेलिंग पुस्तक सफल व्यक्‍तियों की उन सात आदतों का वर्णन करती है, जिनकी बदौलत वे सफल होते हैं। इन आदतों को अपनाकर कोई भी सफल बन सकता है। सफलता की चाह रखने वालों के लिए यह किताब बहोत ही खास है|

9. आपका भविष्य आपके हाथ में | Forge your Future (Hindi)

यह किताब डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपने जीवन के सबसे खास सालों में लिखी जब वे भारत के राष्ट्रपति पद पर विधमान थे| इस किताब में अपने जीवन के खास पलों को साझा करते हुए डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम लिखते हैं की मेरा जन्म दक्षिण भारत के एक छोटे से द्वीप रामेश्वरम में हुआ मेने अच्छी शिक्षा ग्रहण की, नोकरी ढूंढने के लिए शहर आया, नोकरी की और भारत के राष्ट्रपति बनने तक जीवन की कई बाधाओं को दूर किया| अगर मेरे जैसा छोटी सी जगह से निकला हुआ व्यक्ति सारी कठिनाइयों दूर को दूर करके यह सब हांसिल कर सकता है तो फिर यकीन मानिये कोई भी कर सकता है| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है की आप कहाँ से शुरू करते हैं, फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है की आप कहाँ पहुंचना चाहते हैं| पिछले 16 सालों में मैंने लाखों छात्र-छात्राओं से बातचीत की है, मुझसे हर रोज लगभग 300 ईमेल प्राप्त होते हैं, स्कूलों कॉलेजों के कार्यक्रमों में मुझसे कई प्रश्न पूछे जाते हैं| इस किताब को लिखने का मेरा उद्देश्य यही है की इस किताब से अगर में किसी एक युवा का भविष्य निखार पाउ तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा|

डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यह किताब खास तौर पर उन युवाओं के लिए है जो अपने भविष्य के लिए चिंतित है और संघर्ष कर रहें हैं| अगर आप अपने जीवन में डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सिद्धांतों का पालन करके कुछ अलग करना चाहते हैं तो यह किताब आपके लिए है|

10. पढो तो ऐसे पढो | Pado To Aise Pado Motivational Books in Hindi

यह किताब खास तौर पर विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लिखी गई है| डॉ. विजय अग्रवाल द्वारा लिखी गई इस किताब में अध्ययन के कई तरीकों और पद्धतियों के बारे में बताया गया है| यह किताब पढने के बारे में विधार्थियों के नज़रिए को पूरी तरह बदल देती है| इस किताब में कई ऐसी तकनीकों, पद्धतियों और सुझाओं के बारे में बताया जिन्हें अपनाकर आप अच्छे अंको से परीक्षा उत्तीर्ण कर सकते हैं| यह किताब छात्रों की को उनकी एकाग्रता और सिखने की क्षमताओं में सुधार करने में सक्षम बनाता है| इस किताब में लेखक ने काफी सरल शब्दों में बताया है की कैसे सोचने का तरीका हमारे काम पर प्रभाव डालता है| पुस्तक में दिए गए दिशानिर्देशों और सुझावों के बाद, कोई भी अपने दिमाग को नियंत्रित करना सीख सकता है | अगर आप विधार्थी हैं तो इस किताब को जरुर पढ़ें…


तो दोस्तों ये थी 10 ऐसी Motivational Books in Hindi  जिन्हें आपको जरुर पढना चाहिए| यह किताबें आपके व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ आपको आपके लक्ष्य प्राप्ति में भी सहयोग करेगी|

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