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children story in hindi | कहानी बच्चों की

children story in hindi | कहानी बच्चों की

साथियों नमस्कार, हम सभी जीवन में कभी न कभी किसी न किसी काम को लेकर आलस कर जाते हैं| लेकिन किसी काम में किया गया आलस उस काम को हमेशा ख़राब कर देता है| आज हम आपके लिए ऐसी ही “children story in hindi | कहानी बच्चों की”  लेकर आएं हैं जो आपको आलस में किए गए कार्य के दुष्परिणामों से अवगत करवाएगी! आइये इन कहानियों के माध्यम से ज़िन्दगी के एक नए पहलु को जानते हैं…

                     Children Story in Hindi | आलस्य

यह एक ऐसे किसान की कहानी है जो अपने पुरखों की दी हुई ज़मीन-जायदाद के कारण था तो काफी धनि लेकिन उसमें एक कमी थी, और वह थी आलस करना| जीवन के शुरूआती दिनों से ही वह आलसी बनता गया| पहले तो उसने कई कामों को टालना शुरू कर दिया लेकिन ज़िन्दगी के सफ़र में जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था ठीक वैसे-वैसे वह और भी आलसी होता चला जा रहा था| अब तो आलम यह था की आलस में उसने खेतों पर जाना तक छोड़ दिया|

अब तो आलस में उसे अपने घर-परिवार तक की सुध न थी| अपने गाय-भेंसों की भी सुध न लेता| उसका सारा काम अब नोंकरों के भरोसे चलने लगा| उसके आलस से अब पुरे घर की व्यवस्था बिगड़ने लगी| खेती में ध्यान न देने के कारण अब उसको खेती में नुकसान होने लगा| उसके पालतू पशुओं ने भी धीरे-धीरे अब दूध देना बंद कर दिया|

एक दिन उस किसान का दोस्त उससे मिलने उसके गाँव आया| उसने गाँव में जैसे ही अपने किसान के घर जाने का रास्ता पूछा गाँव वालों ने उसे उसके घर की पूरी दशा बता दी| खैर, अब था तो उसका ही मित्र… सौ उसने उस किसान के घर जाने और उसे समझाने का मन बनाया| वह जैसे ही अपने मित्र किसान के घर पहुंचा उसे अपने मित्र के घर की दशा देखकर बहुत दुःख हुआ|

उसे पता था की अब आलस ने उसके मित्र को इस कदर जकड लिया था की अब उसे समझाने में भी कोई लाभ न था| उसने अपने मित्र की दशा पर चिंतित होते हुए अपने मित्र से कहा –  मित्र, तुम्हारी परेशानियाँ देखकर मेरे ह्रदय को काफी दुःख पहुंचा हैं| लेकिन मेरे पास तुम्हारी इन साडी परेशानियों को दूर करने का एक ऐसा उपाय है जिसे करके तुम फिर से धनि व् खुश्हर जीवन जी सकते हो|

किसान अपनी दशा से खुद बड़ा परेशान था लेकिन उसे अपने आलसीपन का आभास तक न था| उसने अपने मित्र से कहा – मित्र मेरी इस दशा के कारण धन, वैभव और सम्मान सब कुछ मेरे हाथ से चला गया है| तुम तो मेरे प्रिय मित्र हो में तुम्हारे बताए हुए उपाय पर अमल जरुर करूँगा|

किसान के मित्र ने कहा – मित्र, सुबह-सुबह दिन दिकलने से पहले एक देवदूत प्रथ्वी पर आता है| जो कोई भी उस देवदूत का सर्वप्रथम दर्शन कर लेता है उसे जीवन में सब कुछ मिल जाता है| अगर तुम उस देव्देत के दर्शन कर लो तो तुम्हारा खोया हुआ धन, वैभव और सम्मान  तुम्हें वापस मिल सकता है|

किसान अपने जीवन से अब काफी परेशान हो चूका था| गाँव में भी उसकी अब कोई इज्ज़त नहीं करता था| उसने अपने मिटा की बात मानने का फैसला किया| अगले ही दिन वह सवेरे-सवेरे उठकर देवलोक से आए देवदूत की खोज में निकल पड़ा| चलते-चलते वह अपने खेतों के पास पहुँच गया था| अगले ही पल उसने देखा की एक आदमी उसके खेत में पड़े गेहूं के ढेर से गेहूं की चौरी कर रहा है| किसान को आते देख चोर वहां से भाग खड़ा हुआ|

चलते चलते अब वह थक चूका था| खेतों से लौटकर अब वह अपनी गोशाला की और आया तो उसने देखा की उसका एक नोकर उसकी भेंस का दूध निकालकर ले जा रहा है| किसान ने अपने नोकर को रोका और इस तरह चोरी छिपे दूध ले जाने पर अपने नोकर को फटकार लगाई|

थोड़ी देर आराम कर के वह फिर देवदूत की खोज में अपने खेतों की और निकल गया| वह अभी खेतों पर पहुंचा ही था की उसे पता चला की खेतों  पर अभी तक मजदुर नहीं आए थे| उसने रुक कर मजदूरों के आने का इंतज़ार किया, जब मजदुर खेत पर आए तो उन्हें भी देरी से आने पर डाट लगाई| अब वह सुबह से जहाँ-जहाँ भी गया वहां उसका कोई न कोई नुकसान होने से बच गया|

आप पढ़ रहें हैं Children Story in Hindi | कहानी बच्चों की

देवदूत को खोजने में अब किसान रोज़ सुबह जल्दी उठ कर देवदूत को खोजने निकलने लगा| किसान की दिनचर्या में आए इस परिवर्तन से अब उसके नोंकरों में कामचोरी के प्रति डर बेठ गया| अब उसके नोंकरों ने ठीक से काम करना शुरू कर दिया| सबेरे जल्दी उठने से चोरों को उसके आने का भय होने लगा और उसके खेतों से होने वाली चोरियां बंद हो गई|

अब खेती में उसे फायदा होने लगा| दूध की होने वाली चोरियों के बंद हो जाने से उसकी गोशाला से भी उसे फायदा होने लगा| सुबह सुबह की सेर से उसकी सेहत भी ठीक होने लगी|

कुछ ही दिनों में किसान का मित्र फिर अपने मित्र के पास आया| अपने मित्र को मिलकर किसान बहुत खुश हुआ और उस से उस के बताए उपाय से होने वाले फायदों के बारे में बताया और कहा – मित्र! देवदूत की खोज में, मुझे सबेरे जल्दी उठने से काफी फायदा हुआ| देवदूत से में जो कुछ भी मांगने वाला था वह मुझे मिल गया है लेकिन देवदूत के दर्शन मुझे अभी तक नहीं हो पाए हैं|

किसान की बात सुनकर उसका मित्र मुस्कुराया और बोला – मित्र! वह देवदूत तुम स्वयं हो| तुम आलस्य में खुद को ही भूल गए थे| सुबह जल्दी उठकर देवदूत की खोज में तुम खुद से मिले और तुमने अपने कमों पर ध्यान देना शुरू कर दिया जिससे तुम्हें खेती में भी फायदा होने लगा और तुम्हारा खोया हुआ धन, सम्पदा और सम्मान तुम्हें वापस मिल गया|

अपने मित्र की बात सुनकर किसान ने उसे गले से लगा लिया….

तो साथियों इस कहानी Children Story in Hindi | कहानी बच्चों की से हमें एक नहीं दो-दो बातें सिखने को मिलती है| पहली तो यह की हमें कभी आलस्य नहीं करना चाहिए और अपने काम को कभी भी कल के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए| और दूसरी यह की हमेशा अपने किसी भी मित्र को परेशानी में देखकर उसकी सहायता करना चाहिए| संकट के समय काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है|


साथियों इसी कहानी के साथ हम आपको एकता के सूत्र में पिरोने वाली एक और कहानी children story in hindi | एकता में शक्ति बताने जा रहें हैं जिसे पढ़कर अप यह जानेंगे की जीवन में संगठित रहना क्यों आवश्यक है|

Children Story in Hindi | एकता में शक्ति

एक पिता के चार पुत्र थे| पिता ने अपने चारों पुत्रों को सामान शिक्षा और संस्कार दीए| चारों पुत्र बड़े हुए और अपने माता-पिता का सम्मान करते हुए जीवन यापन करने लगे| पूरा गाँव उन चारों पुत्रों का सम्मान करता था|

बस परेशानी इस बात की थी की चारों  लड़कों की आपस में बिलकुल भी नहीं जमती थी| चारों जब भी साथ होते किसी न किसी बात पर झगड़ पड़ते| छोटी-छोटी बातों का आए दीन बड़े झगड़ों का कारण बन जाना आम बात थी|

किसान अब अपने इन चारों पुत्रों के झगड़ों से तंग आ चूका था| इस समस्या से निजात पाने के लिए वह गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के पास पहुंचा और अपनी समस्या बताते हुए अपनी समस्या का उपाय बताने के लिए प्रार्थना की| गाँव के उस बुजुर्ग व्यक्ति ने किसान की परेशानी को बड़े ध्यान से सुना और उसे अपनी परेशानी को हल करने के लिए एक युक्ति बताई…

बुजुर्ग की सलाह लेकर किसान अपने घर लौटा और उसने अपने चारों पुत्रों को अपने पास बुलाया| किसान के चारों पुत्र बड़े ही संस्कारी और आज्ञाकारी थे| पिता के बुलाने पर चारों आगले ही पल पिता के समक्ष उपस्थित थे|

किसान ने चार सुखी लकड़ियों को इकठ्ठा कर एक गट्ठर बनाया और उसे अपने लड़कों के सामने रख कर कहा, – “तुम चारों में से जो इन लकड़ियों के गट्ठर को तौड़ देगा वह उसे इनाम में एक बैल देगा| किसान के चारों पुत्र आदतन लकड़ियों के गट्ठर को सबसे पहले तोड़ने के लिए झगडने लगे|

किसान से सबसे पहले अपने छोटे बेटे को गट्ठर तोड़ने का आदेश दिया| किसान के सबसे छोटे बेटे ने लकड़ियों के गट्ठर को तोड़ने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया लेकिन लकड़ियाँ टस से मस नहीं हुई|

इसी तरह बारी-बारी से चारों पुत्रों ने अपनी पुऋ ताकत से लकड़ियों को तोड़ने की कोशिश की लेकिन कोई भी लकड़ियों के उस गट्ठर को तौड़ नहीं पाया|

अगले ही पल किसान ने अपने चारों लड़कों को गट्ठर से निकालकर एक-एक  लकड़ी दी और उसे तोड़ने को कहा| इस बार सभी लड़कों ने एक-एक लकड़ी को बड़ी आसानी से तोड़कर फेंक दिया|

यह सब देखकर किसान ने अपने चारों पुत्रों को पास बैठाया और कहा, – “जब तक यह लकड़ियाँ एक साथ थी तब तक तुममें से कोई भी इन्हें तौड़ नहीं पाया लेकिन इनके अलग-अलग होते ही तुम सबने बड़ी ही आसानी से इन लकड़ियों को तौड़ कर फेंक दिया|

बिलकुल इसी तरह यदि तुम चारों भी लकड़ियों के इस गट्ठर की तरह एक साथ मिलकर रहोगे तो कोई भी तुम्हें तोड़ने और हनी पहुँचाने की कोशिश नहीं करेगा और यदि तुम अलग-अलग टहनियों की बहती रहोगे तो कोई भी तुम्हें नुकसान पहुंचा सकता है|

किसान के चारों लड़कों को अपने पिता की बात समझ आ गई और उन्होंने आपस में झगडा छोडकर मिलकर रहना शुरू कर दिया| देखते ही देखते किसान का पूरा परिवार सबसे सम्रद्ध और वैभवशाली बन गया|

तो साथियों, इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें हमेशा मिल जुलकर एक साथ रहना चाहिए| अगर परिवार में फुट होगी तो हर कोई उसका फायदा उठाने की कोशिश करेगा|

Children Story in Hindi | कहानी बच्चों की


तो साथियों हमें आशा है की आपको हमारी इन कहानियों से ज़रूर ज़िन्दगी के एक नए पहलु को जानने का मोका मिला होगा|

संगठन और संगठन की शक्ति पर पढ़िए हमारी शानदार कहानी

संघटन की शक्ति | Sanghatan ki Shakti Moral Stories in Hindi

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Hindi Short Stories with Moral Value | प्रेरणादायक कहानियां

प्रेरणादायक कहानियां | Hindi Short Stories with Moral Value


हिंदी कहानियों का हमारी ज़िन्दगी में एक खासा महत्व है| हमारी ज़िन्दगी की कई परेशानियों का हल हमें पोराणिक कहानियों ( Hindi Short Stories with Moral Value ) में मिल जाता है| इसलिए परिवार के बड़े बुजुर्ग हमें बचपन में कई कहानियां और किस्से सुनाया करते थे|

लेकिन आज भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में वह सारी कहानियां, किस्से पीछे छुट गए हैं| इसीलिए आज हम आपके लिए प्रेरणादायक कहानियां लेकर आएं हैं जहाँ आप कभी भी कहानियां पढ़ कर कुछ नया सीख सकते हैं|


               साधना | Hindi Short Stories with Moral Value

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में नदी के किनारे पर एक साधू की कुटीया थी| एक दिन साधू ने देखा की उनकी कुटिया के सामने वाली नदी में एक सेब तेरता हुआ आ रहा है|

साधू ने सेब को नदी से निकाला और अपनी कुटिया में ले आए| महात्मा सेब को खाने ही वाले थे की तभी उनके अंतरमन से एक आवाज आई – “क्या यह तेरी सम्पति है ? यदि तुमने इसे अपने परिश्रम से पैदा नहीं किया है तो क्या इस सेब पर तुम्हारा अधिकार है ?

अपने अंतर्मन कि आवाज सुन साधू को आभास हुआ की उसे इस फल को रखने और खाने का कोई अधिकार नहीं है| इतना सोचकर साधू सेब को अपने झोले में डाककर सेब के असली स्वामी की खोज में निकल पड़े|

थोड़ी दूर जाने पर साधू को एक सेब का बाग़ दिखाई दिया| उन्होंने बाग के स्वामी से जाकर कहा – “आपके पेड से यह सेब गिरकर नदी में बहते-बहते मेरी कुटिया तक आ गया था, इसलिए में आपकी संपत्ति लौटाने आया हूँ|”

वह बोला, “महात्मा, में तो इस बाग़ का रखवाला मात्र हूँ! इस बाग़ की स्वामी राज्य की रानी है|” बाग़ के रखवाले की बात सुनकर साधू महात्मा सेब को देने रानी के पास पहुंचे| रानी को जब साधू के सेब को यहाँ तक पहुँचाने के लिए लम्बी यात्रा की बात पता चली तो वह बहुत आश्चर्यचकित हुई|

उन्होंने एक छोटे से सेब के लिए इतनी लम्बी यात्रा का कारण साधू से पूछा| साधू बोले, “महारानी साहिबा! यह यात्रा मैंने सेब के लिए नहीं बल्कि अपने ज़मीर के लिए की है| यदि मेरा ज़मीर भ्रष्ट होई जाता तो मेरी जीवन भर की तपस्या नष्ट हो जाती|

साधू की ईमानदारी से महारानी बड़ी प्रसन्न हुई और उन्होंने साधू महात्मा को राजगुरु की उपाधि से सम्मानित कर उन्हें अपने राज घराने में रहने का निमंत्रण दिया|

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें हर परिस्थिथि में इमानदार रहना चाहिए क्योंकि इमानदार व्यक्ति हमेशा सम्मान पाता है|

किसी से मुहोब्बत करते हो तो यह कहानी ज़रूर पढ़ें…

एक नई ज़िन्दगी | True Love Stories in Real Life in Hindi

               गीता का रहस्य | Hindi Short Stories with Moral Value

एक बार महात्मा गाँधी के पास एक व्यक्ति गीता का रहस्य जानने के लिए आया| उसने महात्मा गाँधी से गीता के रहस्य के बारे में पुछा| गाँधी जी उस समय फावड़े से आश्रम की भूमि खोद रहे थे|

उन्होंने उस व्यक्ति को पास बिठाया और फिर से आश्रम की भूमि खोदने में लग गए| इसी तरह काफी समय हो गया लेकिन महात्मा गाँधी उस व्यक्ति से कुछ नहीं बोले| आखिर में अकेले बैठे-बैठे परेशान होकर वह व्यक्ति महात्मा गाँधी से बोला – “में इतनी दूर से आपकी ख्याति सुनकर गीता का मर्म जानने के लिए आपके पास आया था लेकिन आप तो केवल फावड़ा चलाने में लगे हुए हैं|

गाँधी जी ने उत्तर दिया – “भाई! में आपको गीता का रहस्य ही समझा रहा था|” महात्मा गाँधी की बात सुनकर वह व्यक्ति बोला – आप कहाँ समझा रहे था आप तो अभी तक एक शब्द भी नहीं बोले| गाँधी जी बोले – “बोलने की आवश्यकता नहीं है| गीता का मर्म यही है कि व्यक्ति को कर्मयोगी होना चाहिए| बस फल की आशा किए बगेर निरंतर कर्म करते चलो| यही गीता का मर्म है|”

गाँधी जी के इस उत्तर को सुनकर व्यक्ति को गीता का रहस्य समझ में आ गया|

तो दोस्तों इस कहानी का तर्क यही है, कि “व्यक्ति को फल की चिंता किए बगेर हमेशा कर्म करते रहना चाहिए|

आप  पढ़ रहें हैं Hindi Short Stories with Moral Value


                              ठंडी रोटी | Short Story in Hindi

एक गाँव में एक लड़का अपने परिवार के साथ रहता था| सुयोग्य व् संस्कारी वह लड़का हमेशा अपनि माँ का ख्याल रखता था| बस एक बात थी जो उस लड़के में सबसे बुरी थी, वह यह की वह कुछ कमाता-धमाता नहीं था| लड़के के थोडा और बड़ा होने पर माँ ने उसका यह सोचकर विवाह कर दिया की विवाह के बाद जिम्मेदारियां आने पर लड़का खुद ही कमाने लगेगा|

परन्तु विवाह के बाद भी लड़के की दिनचर्या में कोई फर्क नहीं पड़ा| अब भी लड़का दिन भर बस घर में बता रहता| माँ जब भी लड़के को रोटी परोसती थी, तब वह यही कहती थी, “बेटा, ठंडी रोटी खा लो|” लड़का रोज़ यही सोचता की माँ ऐसा क्यों कहती है! लेकिन फिर भी वह चुप रहता|

एक दिन माँ किसी काम से घर से बहार गई तो जाते समय अपनी बहु को लड़के को रोटी परोसने का कहकर गई और साथ में यह भी कहा की रोटी परोसते समय कहना की “ठंडी रोटी खा लो”| बहु ने ठीक वैसा ही किया, जब लड़का आया तो उसे रोटी परोसते समय ठंडी रोटी खाने को कहा|

जैसे ही लड़के की पत्नी ने ठंडी रोटी खाने को कहा लड़के को गुस्सा आ गया| उसने सोचा पहले तो सिर्फ माँ ठंडी रोटी खाने कोकहती थी लेकिन अब तो मेरी पत्नी भी यह कहना सिख गई है|

उसने अपनी पत्नी से पुछा “आखिर रोटी गरम है, साग गरम है तो फिर तुम लोग मुझे ठंडी रोटी खाने को क्यों कहते हो? लड़के की पत्नी ने कहा, “,मुझे तो आपकी माताजी ने ऐसा कहने को कहा था, आप उनसे पूछिए आखिर वह आपको ऐसा क्यों कहती है| पत्नी की बात सुनकर लड़का गुस्सा हो गया और बोला, “अब जब तक माँ मुझे इस तरह से कहने का उत्तर नहीं देगी में खाना नहीं खाऊंगा|

शाम को जब माँ घर आई तो माँ ने बहु से पूछा कि क्या लड़के ने भोजन कर लिया| बहु नें लड़के के नाराज होने और भोजन ना करने की पूरी बात माँ को बता दी|

थोड़ी देर बाद लड़के ने माँ से पुछा, “माँ! पहले तो सिर्फ तू मुझे ठंडी रोटी खाने का कहती थी लेकिन में तेरी बातों का बुरान्हीं मानता था लेकिन अब तो मेरी पत्नी ने भी मुझे यही कहा, आखिर तुम सब मुझे गरम रोटी को ठंडी रोटी खाने को क्यों कहते हो| माँ ने लड़के को पुछा, “बेटा..ठंडी रोटी किसे कहते हैं|” लड़के ने कहा “सुबह या कल की बनाई हुई रोटी ठंडी रोटी होती है”

लड़के की बात सुनकर माँ ने कहा, “बेटा! अब तू ही देख, तेरे पिताजी का कमाया गया जो धन है वो ठंडी रोटी है| गरम, ताज़ी रोटी तो तब होगी जब तू कमाकर लाएगा| माँ की बात सुनकर लड़का माँ की बात समझ गया और बोला. “माँ! अब में समझ गया हूँ की जो व्यक्ति खुद धन कमाने के लायाक्ल नहीं होता उसका कहीं भी सम्मान नहीं होता| आज से में खुद कमाकर लूँगा और पुरे परिवार को ताज़ी रोटी खिलाऊंगा||

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, कि विवाह होने के बाद ठंडी रोटी नहीं खानी चाहिए, अपने कमाए हुए धन से रोटी खाना चाहिए|

अब आप ही सोचिये  भगवान राम के वनवास के दौरान जब रावन माँ सीता को छल से ले गया| किसी भी रामायण में यह नहीं लिखा हुआ है की भगवान् राम ने अपने भाई भरत को यह समाचार दिया हो की “भरत, रावण मेरी पत्नी को छल पूर्वक ले गया है तुम आकर मेरी सहायता करो|

क्यों की मर्यादापुरुषोत्तम राम यह समझते थे कि विवाह किया है तो अपनी स्त्री की रक्षा करना, अपने करताय का पालन करना उनका धर्म है| उन्होंने अपनी भुजाओं के बल से पहले सुग्रीव की सहायता की उसके बाद सुग्रीव से सहायता मांग कर माँ सीता की रक्षा की| इसीलिए विवाह तभी करना चाहिए, जब स्त्री और बच्चों का पालन पोषण करने की क्षमता हो| अगर यह ताकत न हो तो विवाह नहीं करना चाहिए|

पढ़ें मुहोब्बत में डूबी एक और कहानी….

कोरा कागज़ | Real Love Story in Hindi


                         संतों की शरण | Hindi Short Story

एक गाँव में एक ठाकुर थे| ठाकुर की सेवा में उनके कुटुंब में एक परिवार रहा करता था| लेकिन एक महामारी में कुटुंब में एक लड़के के सिवा कोई न बचा| अब वह लड़का ठाकुर की सेवा में दिन रात लगा रहता| रोज घर के काम करता, ठाकुर के बछड़े चराने जाता और जब जंगल से लौटकर आता तो रोटी खाकर सो जाता|

अब उस लड़के की रोजाना यही दिनचर्या बन गई थी| ऐसे ही समय बीतता गया| एक दिन शाम के समय जब वह लड़का बछड़े चराकर घर आया तो ठाकुर की नोकरानी ने उसे ठंडी रोटी खाने को दी| बाजरे की ठंडी रोटी देखकर उस लड़के ने नोकरानी से छाछ या राबड़ी के लिए प्रार्थना की|

नोकरानी ने कहा. “जा…जा… तेरे लिए बनाइ है राबड़ी!” जा, खाना हो तो ऐसे ही खा ले नहीं तो भूखा ही रह| नोकरानी की बात सुनकर लड़के के मन में गुस्सा आया, “उसने सोचा में इतनी धुप में बछड़े चराकर आया और मुझे खाने के लिए बाजरे की सुखी रोटी दे दी और जब राबड़ी के लिए बोला तो अपमान किया”! यह बात लड़के के मन में घर कर गई और अगले ही दिन वह ठाकुर के घर को छोड़ कर चला गया|

गाँव के पास ही शहर था| उस शहर में संतों की एक टोली सत्संग के लिए आई हुई थी| लड़का दो दिन से भूखा था, प्रशाद के लालच में वह भी सत्संग् सुनने बेठ गया| संतों की वाणी को सुनकर वह संतों की टोली में शामिल हो गया और साधू बन गया|

कुछ समय संतों के साथ रहने के पश्च्यात वह पढने के लिए काशी चला गया और विद्वान बन गया| फिर समय के साथ वह मंडलेश्वर बन गया| मंडलेश्वर बन्ने के कुछ दिन बाद एक दिन उनको उसी गाँव में आने का न्योता मिला जहाँ वे बचपन में काम किया करते थे| वे अपनी मण्डली को लेकर उस गाँव में आए|

ठाकुर, जिनके यहाँ वे काम किया करते थे वे अब बूढ़े हो चुके थे| ठाकुर उनके पास गए, उनका सत्संग किया और उनको अपने घर पर भोजन के लिए आने कला निमंत्रण दिया| मंडलेश्वर मन ही मन मुस्काए और ठाकुर के घर भोजन का निमंत्रण स्वीकार कर लिया|

मंडलेश्वर जी अपनी पूरी टोली के साथ ठाकुर के घर भोजन को पधारे और भोजन के लिए पंक्ति बेठी| गीता के पंद्रहवे अध्याय के बाद सबने भोजन करना आरम्भ किया| महाराज के सामने तख्ता लगा हुआ था जिस पर तरह-तरह के व्यंजन रखे हुए थे|

कुछ ही देर में ठाकुर महाराज के पास आए! उनके साथ में एक नोकर था, जिसके हाथ में एक पात्र में हलवा था| ठाकुर जी ने महाराज से प्रार्थना की. “की महाराज कृपा कर के मेरे हाथ से थोडा सा हलवा ग्रहण करें|” ठाकुर की बात सुनकर महाराज हसने लगे|

ठाकुर ने महाराज से इस हसी का कारण पूछा तो महाराज ने मुस्कुराते हुए ठाकुर से पुछा “आपने कुटुंब में आपकी सेवा में कई सालों पहले एक परिवार रहता था उस परिवार में से अब कोई जीवित है क्या|”

ठाकुर ने हाथ जोड़ते हुए जवाब दिया. “महाराज! महामारी के बाद उस परिवार में एक बालक बचा था जो कुछ दिन तक हमारी सेवा में इसी घर में रहा और फिर अचानक कहीं चला गया| बहुत साल हो गए उसके बाद उसे कभी देखा नहीं”

महाराज मुस्कुराते हुए बोले, “में वही लड़का हूँ…गाँव के पास ही संतों की एक टोली में चला गया था| पीछे कशी चला गया वहां शिक्षा ग्रहण की और मंडलेश्वर बन गया| संतों की शरण में रहने से आपके घर में काम करके रुखी सुखी रोटी खाने वाला वही बालक आज आपके हाथ से हलवा पूरी ग्रहण कर रहा है|

यह कहते हुए मंडलेश्वर मुस्कुराते हुए बोले,

मांगे मिले न राबड़ी, करू कहाँ लगी वरण…मोहनभोग गले में अटक्या, आ संतों की शरण||

दो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है की “हमेशा अच्छे लोगों की सांगत में रहना चाहिए. अच्छे लोगों की सांगत में रहने का परिणाम भी अच्छा ही होता है”|

Hindi Short Stories with Moral Value


जगत की प्रीत | Short Stories in Hindi with Moral

एक आश्रम में एक बहुत ही पहुंचे हुए संत रहते थे| संत के पास कई लोग आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए आते थे| उन्हीं लोगों में एक व्यक्ति का संत पर गहरा विश्वास था|

समय के साथ उस व्यक्ति का विवाह हो गया तो उसका सत्संग में आना कम हो गया| जब संतान हो गई तो उसका सत्संग में आना और भी कम हो गया|

अपने शिष्य की धर्म-कर्म के प्रति कमी को देखते हुए संत ने एक दिन उससे कहा की तू कुछ दीनों के लिए मेरे पास आ जा और सत्संग कर| संत की बात सुनकर व्यक्ति बोला, “भगवन! मेरी स्त्री को मुझसे बड़ा प्रेम है भला में उसे छोड़कर कैसे आऊ ? वह मेरे बिना एक दिन भी नहीं रह सकती”

व्यक्ति की बात सुनकर साधू महात्मा ने व्यक्ति को समझाया की यह सब तेरा वहम है, ऐसी बात है नहीं| यह सब सांसारिक मोह माया है| लेकिन वह व्यक्ति नहीं माना|

संत ने कहा की अगर तुझे मेरी बात पर वुश्वास नहीं हे तो तू परीक्षा कर के देख ले| संत की बात मानकर वह व्यक्ति परीक्षा लेने के लिए तैयार हो गया|

संत ने उसको प्राणायाम के द्वारा साँस रोकना सिखा दिया और सारी बात समझा दी|

अगले दिन ही व्यक्ति ने अपनी पत्नी से कहा की आज घर में खीर और लड्डू बनाओ| आज हम सब खीर और लड्डू खाएँगे| व्थोयक्ड़ीति की पत्नी ने स्वादिष्ट खीर और लड्डू बना दिए|

कुछ ही देर में व्यक्ति ने साधू महात्मा के कहे अनुसार पेट  में पीड़ा होने की बात पत्नी से कही| पत्नी ने कहा की आप लेट जाओ|

थोड़ी ही देर में उसने प्राणायाम के द्वारा साँस रोक ली| स्त्री ने देखा की उसके पति का तो शारीर शांत हो गया है! अब क्या करे ?

उसने विचार किया की घर में खीर और लड्डू पड़े हैं| लड्डू तो कई दिन तक रह जाएँगे लेकिन खीर ख़राब हो जाएगी| अगर में अभी रोना चिल्लाना शुरू कर दूँ तो आस पड़ोस के लोग इकठ्ठा हो जाएँगे| फिर खीर यूँ ही पड़ी रह जाएगी|

यही सोचकर उसने दरवाजा बंद कर लिया और बच्चों को लेकर जल्दी-जल्दी खीर खा ली और लड्डू डिब्बे में बंद कर के रख दी| फिर उसने दरवाजा खोल दिया और पति के पास में बैठकर रोने लगी|

और रोते हुए बोली:-

साईं स्वर्ग पधारया, कुछ मने भी तो आखो! (पतिदेव स्वर्ग पधार गए, कुछ मेरसे तो बोलो)

इतने में व्यक्ति उठा और बोला:-

खीर लबालब पा गई, कुछ पिन्नी वि चक्खो! (खीर तो लबालब पि गई अब कुछ लड्डू भी तो चक्खो)

Hindi Short Stories with Moral Value


बोनिफेस झरना | हिंदी कहानी

संत बेनिफेस ने अपना पूरा जीवन औरों की सेवा और समाज सेवा में लगा दिया| सम्पूर्ण जीवन उन्होंने लोगों की सेवा की लेकिन कभी किसी से कुछ नहीं माँगा, चाहे उन्हें पूरा-पूरा दिन भूका रहकर उपवास ही क्यों न करना पड़ा हो|

ऐसे ही एक बार कई दिन निकल गए उन्हें खाने को कुछ भी न मिला| एक बार एक गाँव में विचरण करते हुए उन्होंने देखा की एक स्त्री गाय का दूध निकाल रही है| लेकिन वे स्त्री से दूध न मांग कर आगे बढ़ने लगे|

तभी उन्हें लगा की उनके अन्दर किसी से कुछ न मांगने का अहंकार उठ रहा है, सो उन्होंने तुर्कंत ही बिना कुछ सोचे उस स्त्री से थोडा सा दूध  माँगा|

तभी उस स्त्री के पति नें बिच में ही स्त्री को टक्कर उन्हें दूध देने से मना कर दिया| संत बिना किसी दुर्भाव से आगे बढे लेकिन भाख सहन न कर पाने और कमजोरी के कारन थोड़ी ही दूर चलकर गिर पड़े|

तभी वहां एक झरना फुट पड़ा जो आज निर्झर झरने के नाम से जाना जाता है|


 जो होता है अच्छे के लिए होता है | Story of moral

एक बार एक सिपाही छुट्टी लेकर अपने गाँव अपने परिवार से मिलने जा रहा था| तभी रास्ते में वर्षा होने लगी| बिन मोसम बरसात से उनसे पास रखी कच्चे रंग की चुनरी, कागज़ के खिलोने, बताशे सब गलकर खराब हो गए|

सिपाही इस बिन मोसम बरसात के लिए इश्वर को बुरा भला कहने लगा| सिपाही आगे चला तो कुछ डाकू लुट के उद्देश्य से घात लगे बेठे थे| सिपाही को देख उन्होंने सिपाही के ऊपर बन्दुक तान दी|

लेकिन बरसात की वजह से बन्दुक में भरे कारतूस में सीलन आ गई और कारतूस चले ही नही और सिपाही ने भागकर अपने प्राण बचा लिये| अब सिपाही बरसात के लिए भगवान् का धन्यवाद करने लगा और अपने किए पर पश्च्याताप करने लगा|

इसीलिए कहा गया है इश्वर जो कुछ भी करता है अच्छे के लिए करता है|

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हिंदी कहानी “संघठन” 
Very Short Stories in Hindi | भले आदमी की खोज

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