Tag Archives: हिंदी कविता

Hindi Poem on Single | हम सिंगल है

साथियों नमस्कार, आज का हमारा यह आर्टिकल “Hindi Poem on Single | हम सिंगल है” हम खास तौर पर उन युवाओं के लिए लेकर आएं हैं जो सिंगल हैं| आशा है आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आएगा|


Hindi Poem on Single | हम सिंगल है

हम सिंगल है,
ऐसा नहीं कि हमें प्यार नहीं हुआ…
हुआ और ना जाने कितनी बार हुआ,
पर उनकी कसम कभी ऐतबार ना हुआ!!
एक तरफा रह गया कभी तीर उनके दिल के पार ना हुआ,
हम सिंगल है,
ऐसा नहीं कि हमें प्यार नहीं हुआ…
प्यार की लत हमें बहुत बचपन में  लग गई,
और डर की लत उससे भी पहले लग गई!!
ओ हमारे नाम से बदनाम भी हो गई,
पर डर के आगे जीत है मेरे जीवन में बस कहनाम रह गई!!
हम सिंगल है,
ऐसा नहीं कि हमें प्यार नहीं हुआ…
उनके हमारे मोहब्बत के किस्से सरेआम हो गए,
हम छोटे से गांव में भी रहकर बदनाम हो गए!!
जब दौर आया मोहब्बत के इजहार का,
तब हम उनके लिए आम हो गए!!
हम सिंगल है,
ऐसा नहीं कि हमें प्यार नहीं हुआ….
कसूर मेरा मै लड़का हूं रोजी रोटी भी कमाना था,
उनकी याद मिटाने के लिए गांव छोड़ शहर भी जाना था!!
शहर की चकाचौंध ने उन्हें भुला दिया,
लेकिन ये दिल है उनसे कोई अच्छी मिली अब दिल उनका दीवाना था!!
हम सिंगल है,
ऐसा नहीं कि हमें प्यार नहीं हुआ…
Anand Maurya

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Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए “Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता“लेकर आएं हैं आशा है आप सभी अपने-अपने घरों में सुरक्षित होंगे|


Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता

हर रोज़ सन्नाटा यहाँ हर रोज बढ़ते हैं फासले,
रोज मोतें हो रही, हर रोज़ बढ़ते मामले!
वो वक़्त के मजदुर है साहब पर वक़्त से मजबूर है
सभी जगह लग गए ताले, वो जाएं कहाँ जो मीलों दूर है!!

जीवन की गति अवरुद्ध है, गतिरुद्ध है सारा शहर…
हर रोज बेबसी है, हर रोज़ बस है कोरोना का कहर!!
आना जाना हुआ बंद, बंद हुई सारी यात्राएं,
घरों में कैद होकर यह व्यथा अब किसे सुनाएं!!

पहले सी दिखती नहीं अब रौनकें बाज़ार की,
हर जगह मंदी पड़ी है व्यापै की!!

Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता


सन्नाटे का शोर है

सन्नाटे का शोर है
कोरोना का जोर है

धरती सूनी ,सूना अंबर , मानव है कैद घरों के अंदर ।
लॉकडाउन का जोर है

सन्नाटे का शोर है ।

लॉकडाउन का पालन कर हंसते – हंसते
हाथ किसी से ना मिला करले नमस्ते ।

दूर . दूर रहकर भी निभाओ रिश्ते
इस चुनौती को स्वीकार करो हंसते – हंसते ।

सन्नाटे का शोर इक दिन मिट जाएगा
जब विश्व से कोरोना का कहर हट जाएगा ।

Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता


“प्रभु और मानव संवाद “

प्रभु आई तेरे द्वार करो स्वीकार अरज है हमारी,
प्रभु दूर करो महामारी।।

चारों ओर हाहाकार मचा,
कोरोना का तांडव है मचा।।

प्रभु वायरस से मुक्त कराओ,
हमे इससे बचाओ, अरज है हमारी प्रभु राखो लाज हमारी।।

प्रभु मानव हैलाचार पडा,
सबका व्यापार है ठप्प पडा।।

प्रभु दूर करो ये तबाही,
प्रभु मिटाओ ये महामारी।।

प्रभु सूनी धरती सूना अंबर,
मानव है कैद घरो के अंदर।।

अब हम है लाचार,
आप ही करो उद्धार।।

प्रभु दूर करो महामारी

तब प्रभु ने कहा – हे मानव !!

मैने धरती पर तुम्हें भेजा था,
पर सेवा का उपदेश दिया।।

तूने मानी ना बात हमारी
मै कैसे करूं मदद तुम्हारी।।

तूने धरती पर अत्याचार किया,
भ्रष्टाचार किया दुराचार किया।।

अब दंड की पारी तुम्हारी,
मै कैसे करूं मदद तुम्हारी।।

नारी का तूने अपमान किया,
कन्याओं से दुराचार किया।।

बढ गई थी ताकत तुम्हारी,
इसलिये औकात दिखाई तुम्हारी ।

मैने मानवता का तुम्हें ज्ञान दिया
तुमने जात-पात मे बांट दिया।।

मानव ने मानव पर अत्याचार किया,
सारी प्रकृति को तूने वीरान किया।।

तूने किसी की ना देखी लाचारी,
अब भुगतने की तेरी बारी।।

मैने पहले भी तुम्हें चेताया था,
बद्रीनाथ मे तांडव मचाया था।।

पर तूने ना दिखाई समझदारी,
तू भी समझ मेरी लाचारी।।

अंबर मे तूने छेद किया,
धरती को भी तूने भेद दिया।।

मैने लाख तुम्हें सचेत किया,
पर तूने मुझे ही चुनौती दे डाली।।

अब जात-पात का भेद मिटा,
मानवता के गुण मन मे जगा।।

माता-पिता का मान बढा,
मातृभूमि का सम्मान बढा।।

मुझसे टकराने की तू मत कर तैयारी,
तभी मदद करुंगा तुम्हारी।।

Poem on Lockdown | लॉकडाउन पर कविता


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Poem on Life in Hindi | जिंदगी से क्यूँ डरना

जिंदगी से क्यूँ डरना

साथियों नमस्कार, आज के अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं Hindi Short Stories की लेखिका “रुपाली सिंह” द्वारा लिखी ज़िन्दगी से जुडी एक ऐसी कविता “जिंदगी से क्यूँ डरना | Poem on Life in Hindi” जो आपको ज़िन्दगी जीने के नए आयामों से अवगत करवाएगी| इस कविता को पढने के बाद आप ज़िन्दगी  को एक नए सिरे से देखना शुरू करेंगे| आशा है आपको हमारा यह संकलन ज़रूर पसंद आएगा|


जिंदगी से क्यूँ डरना | Poem on Life in Hindi

क्यूँ डरना की जिंदगी में क्या होगा…
क्यूँ डरना की किसी खास व्यक्ति को खोने से क्या होगा.. जीवन तो बदलाव का रूप हैं..
प्यार का पैगाम हैं.. मिलने – बिछड़ने का पयाम हैं..
ये काफिलों का सिलसिला नए – पुराने मुसाफिरों के साथ तय होता रहेगा…

जब पता हैं, जिंदगी मिलने – बिछड़ने का पयाम हैं.. प्यार का पैगाम हैं…
तो यूँ भयभीत होकर राह तय करने से क्या होगा…
स्वाभिमान की लड़ाई नहीं होती हैं आसान….
आहे इसकी होती हैं तूफान…
सांसो मैं होती हैं घुटन..
सीने मैं होती हैं बहोत सी चुभन…

पर आज सच्चाई के लिए नहीं उठे,
तो सारी उम्र एक बात के लिए यूँ रो – रोकर क्या होगा..
रोना – हँसना, गुस्सा होना और उम्मीदों को कायम रखना…
भावनाओ के प्रकार हैं.. इन्हें प्रदर्शित करने का ज्ञान नहीं…
तो, यूँ दूसरों पर इल्जाम लगाने से क्या होगा..

Rupali Singh
MUMBAI


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Romantic Poem in Hindi – बड़े दिनों बाद

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए ऐसी दो प्रेम कविताएँ Romantic Poem in Hindi लेकर आएं हैं जिन्हें पढने के बाद आप भी प्रेम के सागर में गोते लगाने लग जाएँगे| लीजिए पेश है…


Romantic Poem in Hindi – बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद, फ़ोन  पर हम दोनों देर तक खामोश रहे..
लफ्ज़ सरे गायब थे, पर बातें हजारों हो गई!

बड़े दिनों बाद, बाँहों में एक दुसरे की,हम मदहोश रहे…

नशे का आलम ना था,  पर होंश हम खो बेठे!

Romantic Poem in Hindi

बड़े दिनों बाद, आँखों में हम एक दुसरे की देखते रहे..
बात एक ना हुई, पर दिल के हाल बयां कर बेठे!

बड़े दिनों बाद कहा एक दुसरे से हमने, कि जीना है साथ…
पता ही ना चला, कब जान हम गवां बेठे!

बड़े दिनों बाद…..


चाहत | हिंदी कविता

तेरा साथ होकर भी ना होने को महसूस कर पा रहा हूं।

तेरे प्यार को अपनी सांसों में निभाता सा जा रहा हूं

है तेरा वजूद मेरे पास बस इसे दिल में समां पा रहा हूं।

तुझे खुद में बसाने की बस चाहत कर पा रहा हूं।।

.

तेरा प्यार है मेरे पास बस ये जान पा रहा हूं

इस प्यार को में ख्वाब समझ ना भूल पा रहा हूं

ना दिल की ना खुद की में सुन पा रहा हूं

तुझ में ही बस तुझ में, मै खोता जा रहा हूं

.

तेरी आवाज की मिठास को ना पी पा रहा हूं

हूं पास या हू तेरे मै ना जान पा रहा हूं

चाह कर भी तेरा मैं ना हो पा रहा हूं

यही हालत है तेरी भी ये भी मैं जान पा रहा हूं

.

आखें बंद कर के भी तुझको में देख पा रहा हूं

एक अजीब सा अहसास दिल में गुदगुदा पा रहा हूं

आखें बंद करके भी तुझको मै देख पा रहा हूं

तेरा ही बस तेरा मै होता जा रहा हूं।।


एक अंजना सा अहसास | Heart Touching Love Poems in Hindi

एक अन्जाना सा एहसास हो तुम,
क्या मेरे लिए कुछ खास हो तुम…
रहते हो हमारे आस -पास,
फ़िर भी ना जान पाये….
क्या कोई अनदेखा सा ख्वाब हो तुम!!
खुशबू रहती है हवाओ में तुम्हारी,
हवा भी कहती हैं मेरे लिए वरदान हो तुम…
एक अन्जाना सा अहसास हो तुम!
बारिश कि टप -टपाती बून्दो में,
बोली सुनाई देती हैं तुम्हारी…
क्या सावन में गाये गीतो कि फ़ुहार हो तुम,
एक अन्जाना सा अहसास हो तुम!
जब भी निगाहे उठती है.. दर्पण देखने को
क्यूँ सूरत तुम्हारी नज़र आती हैं..
क्या कोई दर्पण या मुझ मे समाई मेरी आस हो तुम..
एक अन्जाना सा अहसास हो तुम!
  अनीता दयाल 

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Hindi Kavita | भूख

साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए एक ऐसी करुणादायक “Hindi Kavita | भूख” लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको समाज के एक ऐसे वर्ग को जानने का मौका मिलेगा जो सारी बिनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है पढ़ें


Hindi Kavita | भूख 

वो खड़ी थी दरवाज़े पर, अकेले कब से…
चूल्हे से रोटी की भीनी खुशबु आई थी शायद जब से..

या शायद तब से जब माँ ने पंडित के कहने पर एक रोटी कुत्ते को डाली
या शायद तब से जब हम सब ने अपने हिस्से की रोटी खा ली..

वो खड़ी रही तब तक, जब तक बर्तनों के खड़कने की आवाज़ नहीं आई…
वो कड़ी रही तब तक, जब तक माँ उसके लिए रोटी नही लाई!

शायद इंतजार था उसे हम सब का पेट भर जाने का…
या शायद इंतजार था बची हुई रोटी अपने घर ले जाने का!

वो जानती थी की इस दरवाज़े के भीतर भी एक माँ है…
वो जानती थी की उसकी भूख का इलाज है तो सिर्फ यहाँ है!

भूख सिर्फ रोटी की नहीं थी उसे जो कहीं से मिल जाए और मिट जाए…
भूख उस ममता की थी जिस से रोटी के लालच में वो लिपट जाए!

भूख थी की कोई एक निवाला भी उसे अपने  हाथो से खिलाए…
नए फैशन की फ्राक कोई उसे भी प्यार से दिलाए!

यही सब सोचती वो कड़ी थी अब भी बहार…
भूखी ही चली गई आज फिर किसी को अपना ना पाकर!

भूख – Hindi Kavita


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