Pollution Essay in Hindi | प्रदूषण

Pollution Essay in Hindi
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Pollution Essay in Hindi | प्रदूषण

साथियों नमस्कार, आज हम खास आपके लिए प्रदुषण के ऊपर एक ऐसा निबंध लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको प्रदुषण के बारे में कई बाते पता चलेंगी| आशा है आपको हमारा यह संकलन पसंद आएगा|


Pollution Essay in Hindi | प्रदूषण पर निबंध

हम सभी जानते हैं प्रदूषण का अर्थ। हवाओं में धुएँ का मिलना हो, या फिर मिट्टी में रासायनिक दवाओं और उर्वरकों का मिलना, वाहनों क तीव्र शोर हो या फिर जल में हानिकारक पदार्थ। यह सभी प्राकृतिक संसाधनों को दूषित करते हैं। इसे ही प्रदूषण कहा जाता है।

आज के समय में जहां शुद्ध हवा, शुद्ध जल आदि की कमी हो रही है। इसका मुख्य कारण इनमें प्रदूषण का बढ़ना है। अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन के लिए हमारे शरीर को पोषक तत्वों के साथ-साथ प्रदूषण रहित वातावरण भी आवश्यक है।

किंतु आज ना तो हवा शुद्ध है औंर ना पानी। एक ओर उर्वरकों से भरी फसलें हैं, तो दूसरी और कारखानों और वाहनों के शोर नें मानव स्वास्थ्य पर करारा प्रहार किया है। ऐसे में मानव जीवन की कल्पना अधिक समय तक असंभव है। क्योंकि बढ़ता प्रदूषण हमें निरंतर विनाश की ओर ले जा रहा है।

बात करें अगर प्रदूषण के प्रकारों की तो इसमें मुख्य रूप से वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण है। शुद्ध प्राकृतिक वायु में निरंतर दूषित धुआँ जो की कारखानों व वाहनों से निकलता है। और अन्य रासायनिक गैंसे जो बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से धुएँ के साथ निकलती है। और वायु को प्रदूषित करती हैं।

साथ ही जल भी अपनी प्राकृतिक अवस्था में नहीं रहा। जल प्रदूषण का मुख्य कारण है कि हम कारखानों से निकला दूषित जल नदियों में बहा रहे हैं। जिसके कारण नदियां व तालाब लगातार दूषित होते जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त घरों से निकला गंदा जल, रसोईघर का जल अन्य अपशिष्ट पदार्थ यह सभी जल प्रदूषण का कारण बन रहे हैं।

आप पढ़ रहें हैं Pollution Essay in Hindi | प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण को समाप्त करना असंभव है, किंतु कुछ प्रक्रियाओं द्वारा प्रदूषण को कम किया जा सकता है। जैसे दूषित जल को नदियों और तालाबो में बहाने से पहले उनका पुर्नचक्रण किया जाए। रसोईघर के जल को पेड़ पौधों में डाल दिया जाए।

नदियों और तालाबों पर कपड़े ना धोए। पालतू पशुओं को नदी-तालाबों में ना नहलाए आदि। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए भी सीएनजी वाहनों का प्रयोग किया जा सकता है।

मृदा प्रदूषण अर्थात मिट्टी में रासायनिक पदार्थों का मिलना। अब जब चारों और वातावरण में प्रदूषण फैला हुआ है, जो मौसम को लगातार प्रभावित कर रहा है। जिसका असर खेतों और फसलों पर हो रहा है। ऐसे में किसानों को लागत का पैसा मिलना भी मुश्किल होता है। और वह फसल गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए खेतों में रासायनिक दवाओं और उर्वरकों का प्रयोग करते हैं।

जिससे कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता क्षीण हो जाती है। लगातार इन उर्वरकों के प्रयोग से वायु भी दूषित होती है और‌ मृदा कमजोर होने लगती है। इस प्रदूषण को कम करने के लिए रासायनिक खाद का प्रयोग कम करके गोबर की खाद का प्रयोग अधिक करना चाहिए। जिससे प्रदूषण कम होगा। और मृदा उपजाऊ बनेगी।

सबसे अधिक दूषित वायु हो रही है। जिसका असर मानव स्वास्थ्य पर अधिक हो रहा है। लेकिन यहां ध्वनि प्रदूषण भी एक समस्या है। जो मानव की श्रवण क्षमता पर प्रभाव डालता है।

कारखानों में मशीनों का शोर, सड़क पर वाहनों का शोर, तेज लाउडस्पीकर का शोर यह सभी मानव की श्रवण क्षमता पर प्रभाव डालते हैं। जिससे मनुष्य की सुनने की क्षमता कम हो जाती है। साथ ही अधिक शोर से मानसिक रोग भी उत्पन्न होते हैं। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण को कम करना भी आवश्यक हो गया है।

जहां एक और भारत की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं दूसरी ओर संसाधनों की कमी हो रही है। पूरी पृथ्वी पर पीने योग्य जल केवल 0.0001% है, वह भी दूषित हो रहा है। बड़ती टेक्नोलॉजी ने जहां जीवन को सुगम बनाया हैं, वहीं इसके दुष्प्रभावों ने काफी समस्याएं भी बढ़ाई है।

भूतकाल का मानव कम संसाधनों में भी गुजारा कर लेता था। किंतु वर्तमान मानव सर्वसुविधा युक्त वातावरण होने के बावजूद उसकी महत्ता नहीं समझता। औंर लगातार उसे दूषित करता जा रहा है। बढ़ते वायु प्रदूषण का मुख्य कारण वनों की कटाई है।

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हम सभी जानते हैं, कि वृक्ष एकमात्र प्राकृतिक सजीव है। जो कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं। और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। लगातार वनों की कटाई जहां मानसून को प्रभावित कर रही है। वहीं दूसरी ओर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ा रही है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए वनों का होना अत्यधिक आवश्यक है।

वन बादलों को आकर्षित करते हैं, जिससे वर्षा होती है। साथ ही मिट्टी को बांधे रखते हैं। जिससे बाढ़ जैसी प्रकृति आपदा में उसका दोहन नहीं होता। वन वायुमंडल की कार्बन डाईआॅक्साइड को ग्रहण करते है। और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। जिससे मानव जीवन सुगमता से चलता है।

वर्तमान में संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है। जिस दौरान ऑक्सीजन की कमी की वजह से कई जीवन समाप्त हो गए। यदि अभी भी हम वनों के महत्व को ना समझे तो डर है, कि कहीं भविष्य का मानव इसी तरह की परेशानियों का सामना हर दिन ना करें।

एक और जहां वन लगाना आवश्यक है। वही मृदा का संरक्षण भी आवश्यक होता जा रहा है। हम वनों को काटकर खनिजों की तलाश करते करते उपजाऊ मृदा को भी बंजर बनाते जा रहे हैं। खनिजों की तलाश में कई बस्तियों की जनसंख्या को अपने निवास स्थान से पलायन करना पड़ता है।

“झारखंड” भारत का एकमात्र राज्य है। जहां सर्वाधिक खनिज पाए जाते हैं। देश को आर्थिक मजबूत करने के लिए खनिजों की तलाश में यहां कई फैक्ट्रियाँ व कारखाने खोले गए हैं। जिससे वनों की कटाई बड़ी, साथ ही वहां की जनसंख्या को भी वह स्थान छोड़ना पड़ा। इसका प्रभाव प्रकृति पर विषम रुप से पड़ता है।

हम आज शायद यह महसूस ना कर पाए। लेकिन निकट भविष्य में यह एक गंभीर समस्या बन जाएगी। पर्यावरण को बचाना मानव का प्रथम कर्तव्य हैं। यदि मानव जाति अपने सुख सुविधा के लिए पर्यावरण का अनुचित प्रयोग करेगी तो प्रकृति का प्रकोप उन्हें स्वीकार करना ही पड़ेगा।

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पर्यावरण बचाने और प्रदूषण कम करने के लिए सबसे आवश्यक है, वनों की कटाई रोकना और अधिक वृक्ष लगाना। हम प्रदूषण को रोक नहीं सकते किंतु प्रदूषण को कम कर सकते हैं। जितना अधिक हो सके पेड़ लगाएं और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। प्लास्टिक का उपयोग ना करें, और देश को स्वच्छ बनाने में सहायता करें।

वर्तमान में भारत की राजधानी दिल्ली सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। यहाँ प्रदूषण कम करने के लिए सीएनजी वाहनों का प्रयोग किया जा रहा है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वाहनों में पेट्रोल डीजल की जगह सीएनजी गैंस का प्रयोग किया जाता है।

यह पर्यावरण हमारा है। इसकी आवश्यकता हमें है। तो इसके संरक्षण का दायित्व भी हमारा है। इसके लिए हमें हर संभव प्रयास करना होगा। नदियों को दूषित होने से बचाना होगा। वनों की कटाई रोकने होगी। मृदा को संरक्षित करना होगा, और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग कम करना होगा।

अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर संसाधनों का उचित रूप से प्रयोग करें ताकि हमारे साथ भविष्य की पीढ़ीयाँ भी इस सुंदर वातावरण का लाभ उठा सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें।

Pollution Essay in Hindi | प्रदूषण पर निबंध


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