3 Best Life Story in Hindi | कांच के टुकड़े

Life Story in Hindi
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दोस्तों, आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में इन्सान रिश्तों की अहमियत ही भूल गया है| आज की हमारी कहानी ” Life Story in Hindi | कांच के टुकड़े ”  इसी पर आधारित है| यह कहानी है दो जुड़वाँ बहनों साक्षी और श्वेता की|

दो बहने जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन को साथ-साथ शुरू किया था दोनों अपने-अपने जीवन में बहुत ख़ुश थी| शादी के कुछ सालों बाद कैसे एक दुसरे से मिलने के बाद दोनों की ज़िन्दगी में उतर चढ़ाव आते हैं जानने के लिए पढ़िए पूरी कहानी…


Life Story in Hindi | कांच के टुकड़े

श्वेता और साक्षी दो जुड़वा बहने लेकिन रंग रुप चाल ढाल में बिल्कुल विपरीत, जहां श्वेता गोरा रंग गोल चहरा व्यवहार में बहुत तेज़ और बहुत महत्वाकांक्षी। महंगी चीज़ों को ही अपनी दुनिया मानती थी। बोलचाल में भी इतनी तेज की अपनी की भाषा में उसका कोई काबू नहीं था, मगर घर वालों की सबसे चहेती भी वही थी।

वहीं साक्षी छोटे कद की सांवली सी लेकिन किसी का भी मन मोह ले ऐसी बातें, व्यवहार में सिर्फ मधुरता, सादगी से जीवन व्यतीत करती थी और वैसे ही रहना चाहती थी। दोनो साथ मे बड़ी हुई जहां श्वेता एमबीए कर एक बड़ी कंपनी में जॉब करती थी वहीं साक्षी एक विद्यालय में शिक्षिका का कार्य करने लगी।

जब दोनों के विवाह का समय आया तो सबसे पहले श्वेता के लिए रिश्तों की तो जैसे बाढ़ सी आ गई।पढ़ी लिखी और सुंदरता लिए थी वह। माता पिता ने एक बहुत ही बड़े बिज़नेस मेन से श्वेता की शादी कर थी शुरुवात से ही श्वेता का पति उसे बहुत ही ऐश ओर आराम से रखता था।

वहीं साक्षी जो एक शिक्षिका थी उसने अपने ही एक सह कर्मी से विवाह कर लिया।घर वाले इस विवाह के लिए सहमत नही थे क्योंकि श्वेता के पति से स्तर में वह बहुत छोटा था। काफी समय गुजरा इस बीच श्वेता का घर आना जाना काफी लगा हुआ था।

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वहीं साक्षी अपनी गृहस्ती में व्यस्त हो गई।लगभग एक वर्ष बाद श्वेता अपनी विवाह की वर्षगांठ के आस-पास घर आई उसने घर वालों से कहा साक्षी की बहुत याद आ रही है उसे भी घर बुलाये घर मे भी सबको यह अहसास हुआ कि साक्षी की कमी है उसे बुलाया गया।

कई दिनों बाद पूरा परिवार साथ था फिर से वही हंसी ठहाके ओर मौज मस्ती होने लगी। श्वेता ओर साक्षी दोनो के चेहरे पर खुशी झलक रही थी दोनो अपनी दुनियां में बहुत प्रसन्न थी।

श्वेता की बात उसके पति से कम ही होती थी, शायद वह अपने व्यापार में कुछ ज्यादा ही व्यस्त थे वहीं साक्षी के पास दिन में कई बार उसके पति का फ़ोन आता था, रात में देर तक बातें भी होती थी।

श्वेता के विवाह की वर्षगांठ पर उसने अपने पति को फ़ोन कर घर आने का आमंत्रण दिया लेकिन अपने व्यस्त समय के कारण उसने आने से मना कर दिया उसने बस सुबह उसे फ़ोन कर वर्षगांठ की बधाई दी लेकिन उसे शायद दोबारा समय ही नही मिला आने का।

आप पढ़ रहें हैं Life Story in Hindi | कांच के टुकड़े

श्वेता इस बात से बहुत आहत हुई। वही साक्षी के पास उसके पति का मैसेज आया इतने दिनों बाद तुमसे अलग रह रहा हूँ जल्दी आ जाओ न प्लीज बडा मुश्किल है ऐसे रहना।

आज श्वेता ओर साक्षी दोनो की आंखों में आंसू थे लेकिन उन आंसुओ की वजह अलग अलग थी। दोनो जुड़वा बहनों का जन्म दिन अब नजदीक ही था। बीते इन दिनों में श्वेता के पास मूर्त चीज़े तो बहुत थी पर भावनाओं की कमी उसी हमेशा रहती थी वहीं साक्षी कम चीज़ों में भी खुश थी अपने पति के साथ।

जब दोनों का जन्मदिन आया तो श्वेता ने अपने पति को पुनः बुलाया लेकिन उसने कहा कि वो आज सुबह ही शहर से बाहर जा रहा है दोपहर में जब श्वेता घर के बाहर थी तो उसने अपने पति को आफिस की एक महिला के साथ घूमते हुए देखा।

वह स्तब्ध थी ये सब देख कर कई सवाल उसके मन मे घूम रहे थे। सब कुछ जान कर भी वह अपने मन को तसल्ली दे रही थी, कि नही ऐसा कुछ नही है उसके पति किसी ओर महिला के साथ नही जा सकते, उससे झूठ नही बोल सकते, कोई मजबूरी रही होगी तभी उसके जन्म दिन पर उससे मिले नही।

जबकि वह सब कुछ समझ चुकी थी। रुआंसे मन से वह घर आई । घर आने पर उसने देखा कि उसके पति ने हीरों का एक हार तोहफे में उसके लिए भेजा था। कुछ ही समय बाद साक्षी के पति का फोन आया वह कह रहे थे आज का दिन ओ साक्षी से दूर नही रह सकते वो उसे ले जाने आ रहे हैं।

साक्षी बहुत खुश थी व तैयार हो कर घर से जाने के लिए निकल गई। श्वेता उसे खड़े हो बस देख रही थी वह समझ चुकी थी चीज़ों की कोई अहमियत भावनाओ के आगे नही होती। उसे हार के हीरे बस कांच के टुकड़े की तरह प्रतीत हो रहे थे।

Life Story in Hindi | कांच के टुकड़े
नटेश्वर कमलेश
चांदामेटा छिंदवाड़ा


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