माता पिता की कहानी – कद्र | New Best 100 Hindi Stories

माता पिता की कहानी
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आदरणीय पाठकों, आज हम आपके लिए एक ऐसी “माता पिता की कहानी | कद्र” लेकर आएं हैं जिसे पढ़कर आपको समाज की एक और नई जटिलता को अनुभव करने का मौका मिलेगा| आशा है आपको हमारा यह संकलन बहुत पसंद आएगा|

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माता पिता की कहानी | कद्र

काशीनाथ जी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनका एक पुत्र है अरुण ओर एक पुत्री। काशीनाथ जी कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती है काफी बीमार चल रहे थे कुछ दिनों से। पुत्र अरुण जो एक कंपनी में कार्यरत है उनकी सेवा में लगा हुआ है।

कुछ ही दिनों पहले अरुण की कंपनी से फ़ोन आया वे कह रहे हैं कि जरूरी काम है आप आ जाये। अरुण ने रोष भरे स्वर में उत्तर दिया मेरे पिताजी के जीवन से ज्यादा मेरे लिए ज़रूरी कुछ भी नही है मैं नही आ सकता।

कुछ दिन बीते अरुण ने उनका खयाल रखना जारी रखा अब काशीनाथ जी काफी स्वस्थ हैं।वे एक दिन फ़ोन पर अपनी बेटी से बात कर रहे थे। उनकी पुत्री उनकी कुशलता के विषय में पूछ रही थी थी और कह रही थी जरूरी काम था इन्हें, इसीलिए आ नही पाई।

फ़ोन काट कर काशीनाथ जी अपने पास बैठे एक व्यक्ति से कहते हैं बेटियों की बात ही अलग है कितनी चिंता करती है। अरुण चुपचाप पूरा दृश्य देख रहा था । अब काशीनाथ जी पूरी तरह स्वस्थ हैं अस्पताल से घर भी जा चुके हैं ।

एक दिन एक कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया वहां का विषय समाज का सबसे चर्चित विषय था लड़के और लड़कियों की तुलना। काशीनाथ जी को भी आमंत्रित किया कि वो अपने शब्द कहें। उन्हें कहा लड़कियों का पिता होना सौभाग्य की बात है जितनी चिंता और सेवा माता पिता की एक लड़की कर सकती है लड़के कभी नही।

सारे दृश्य देख कर अरुण बस यही सोच रहा था उसकी भावना में क्या कमी रह गई।क्यों एक लड़के के कार्यों की कद्र नही की जाती,क्यूँ इस तुलना का तराजू सदा एक ही ओर झुकता है?

माता पिता की कहानी | कद्र
नटेश्वर कमलेश
चांदामेटा छिन्दवाड़ा


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