माँ की ममता पर कहानी – दूसरी माँ | 100 New Best Emotional Storiees

माँ की ममता पर कहानी
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आज की कहानी “माँ की ममता पर कहानी – दूसरी माँ” आधारित है भारतीय संस्कृति की उस घटना के बारे में जिसे कई सारी महिलाऐं अपनी पूरी उम्र झेलती रहती है| एक सोतैली माँ शायद किसी और की औलाद को अपना मान भी ले लेकिन हमारा समाज जभी भी उसे एक माँ का दर्जा नहीं देता|
दोस्तों, आज की हमारी कहानी एक ऐसी माँ के इर्द गिर्द घुमती है जिसने किसी और के पुत्र को हमेशा अपना समझा लेकिन समाज उसे कभी भी एक माँ का दर्जा नहीं दे पाया| क्या उस माँ को अपनी पुत्र से वही सम्मान वही प्रेम मिलेगा जिसका वह हमेशा से ताउम्र इंतजार करती रही है| जानने के लिए पढ़िए एक माँ की कहानी “दूसरी माँ

माँ की ममता पर कहानी – दूसरी माँ

आज ससुराल में पहला दिन था। मगर कोई खुशी नही थी चेहरे पर होती भी कैसे, सुमन जिसकी पत्नी बनी उसका पहले से ही एक पांच वर्ष का बेटा था पहली पत्नी का स्वर्गवास कुछ ही दिन पहले हुआ था ।
वह इस शादी के लिए तैयार भी नही थी। परिवार गरीब था इसलिए अच्छा घर है ये सोच कर उसकी शादी कर दी गई। वह घर में दुल्हन बनी वह बैठी थी सब के पास अच्छी कामनाएं नहीं थी उसे देने के लिए थी, बस तो बस एक ही सलाह की दूसरी माँ हो अपने बेटे का अच्छे से ध्यान रखना ओर सबकी नजरों में एक शक भी था दूसरी माँ शायद अच्छे से बच्चे का ध्यान न रख पाए ।
रात हुई पति ने भी पहले बस यही बात रखी कि मुझे यह शादी नही करनी थी अपने बेटे की परवरिश  के लिए यह शादी की है मैंने, तुम बस उसका ध्यान रखना। शादी के तीन माह बीत गए मगर सलाह मिलना बंद नही हुई। वह अब यह निश्चय कर चुकी थी कि उसे अब अपनी संतान नही चाहिए , उसने अपना पूरा प्यार और ध्यान उसी बेटे पर लगाया ।
उसकी देखभाल में समय बीतता  गया , बेटा आज स्नातक हो गया वो भी बहुत अच्छे अंको से। आस पास के लोग बस यही बात कर रहे थे कि कितना अच्छा लड़का है सौतेली माँ के साथ रह कर इतना अच्छा पढ़ लिख गया।कुछ समय बाद बेटे की शादी हुई।
एक दिन अचानक माँ सीढ़ियों से फिसल गई बेटा दौड़ कर जा रहा था अचानक पत्नी ने रोक कहा क्यों इतनी चिंता करते हो कौन सी तुम्हारी सगी माँ है। यह सुनकर सुमन अपने कमरे में जाकर खुद रोई।बेटा कुछ नही कह पाया। लेकिन वह माँ के दर्द को समझ रहा था। उसे बस एक मौका चाहिए था माँ के लिए अपनी कृतज्ञता प्रगट करने का।
आज बेटे के लिए बहुत बड़ा दिन है आज उसे कंपनी के सबसे अच्छे कर्मचारी का पुरुस्कार मिल रहा है। मंच पर पहुच कर उसने कहा आज मैं जो कुछ भी हूँ बस एक महिला के कारण हुँ। वह मंच से उतर कर आगे बढ़ा,उसकी पत्नी बहुत खुश थी उसे लगा शायद वह उसकी तरफ आ रहा है।
लेकिन बेटा अपनी माँ की तरफ गया उसे उठा कर मंच पर ला कर सबके सामने गले से लगाया और थैंक्यू माँ कहा। आज दूसरी माँ होने के उसके सारे दुख खत्म हो गए। ये सब की सलाह ओर शक ही था जो लगातार उसकी आँखों से बह रहा था।
माँ की ममता पर कहानी – दूसरी माँ
नटेश्वर कमलेश
चांदामेटा छिन्दवाड़ा

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2 Comments on “माँ की ममता पर कहानी – दूसरी माँ | 100 New Best Emotional Storiees”

    1. रूचि जी, कहानी का लेखन तभी सार्थक होता है जब कहानी पढने वाले पाठक के दिल को छु जाए| आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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