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Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


साथियों नमस्कार, Hindi Short Stories के इस अंक में हम आपके लिए लेकर आएं हैं “Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में” जहाँ आप मुहोब्बत के उन नगमों को पढेंगे जो किसी बड़े शायर ने नहीं लिखे हैं, बल्कि हम और आप ही की तरह मुहोब्बत के परवानों ने लिखें हैं! और किसी शायर ने भी खूब कहा है की, “मुहोब्बत के परवाने जब कलम पकड़ते हैं तो कत्ले आम हो जाते हैं”

पढ़िए हमारी खास पेशकश Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


Love Poem in Hindi | प्यार

क्या गिले-शिकवे रखते हो, आज़ाद करो मुझे…२
क्या कंजूसी करते हो, दिल खोल कर बर्बाद करो मुझे!

में वक्त नहीं जो गुज़र जाऊंगा, दिन ढलने के बाद…२
खोलो सारे दरवाज़े और आबाद करो मुझे!

मुहोब्बत एक दरिया है, डूबना सभी को है जिसमें…२
क्यों डरते हो मुझसे, कूदो और पार करो मुझे!

छोड़ो सारी दुनिया को पीछे, दुनिया ज़ालिम है…२
में वफादार हूँ, आओ और प्यार करो मुझे!

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में

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Love Poem in Hindi | मुहोब्बत

कैसी उठी है दिल में, शरारत नई-नई…२
दिल चाहता है अब करना, मुहोब्बत नई-नई!

हो दिल से निकली हर बात, जो सुने कोई दिल से…२
दिल चाहता है अब करना, इबादत नई-नई!

उसके चहरे की अलकों में, छिपा हो कोई नग्मा…२
पढ़ ले जिसे कोई, तो आए क़यामत नई-नई!

मुक्कदर में मेरे, लिखी है खुशियाँ तुझसे ही…२
शायद खुदा की है तू कोई रहमत नई-नई

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


Love Poem in Hindi | धड़क

थोडा मुश्किल है हमारा सुधर जाना…
हर शाम की तरह हम ढलते नहीं!

पढ़ सके कोई हमारे दिल की महरूम धड़कने…
इस कदर भी हम कभी मचलते नहीं!

है प्यार हमें भी किसी से बेइंतहा, बेधड़क…
नशे के आलम में भी हम कभी बहकते नहीं!

ना खौफ है हमें, ना शिकवा है किसी का…
इस दिल्लगी के सिवा हम किसी से डरते नहीं…

आरज़ू है हमारी, कोई करे मोहब्बत हमसे भी…
पर उस कदर भी हम किसी पे मरते नहीं!

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद, फ़ोन  पर हम दोनों देर तक खामोश रहे..
लफ्ज़ सरे गायब थे, पर बातें हजारों हो गई!

बड़े दिनों बाद, बाँहों में एक दुसरे की,हम मदहोश रहे…
नशे का आलम ना था,  पर होंश हम खो बेठे!

बड़े दिनों बाद, आँखों में हम एक दुसरे की देखते रहे..
बात एक ना हुई, पर दिल के हाल बयां कर बेठे!

बड़े दिनों बाद कहा एक दुसरे से हमने, कि जीना है साथ…
पता ही ना चला, कब जान हम गवां बेठे!

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


किसी और से

क्यों कहू तुझसे की ना करूँगा मुहोब्बत अब किसी और से ,
कहने को वेसे भी अब क्या रहा,जो बात करूँगा किसी और से
वक्त दर वक्त, लम्हा दर लम्हा गुज़रे जो ज़िन्दगी…
तेरी तरह, तेरे जैसे कोई लगा ले मुझे गले, क्या खुद जा के कह सकूँगा किसी और से ?

जा कह भी दू वैसा, जैसा तू करती थी मेरे लिए…
पर जो प्यार भरी बाते मेरे लब पे थी तेरे लिये, क्या वो जा के कह सकूँगा किसी और से ?

ना कर उम्मीद मेरे रोने और हसने की तेरे जाने के बाद,
तेरी बेवफाई की बाते क्या अब कर सकूँगा किसी और से ?

में जानता हु तू अब भी प्यार करती हे मुझसे …
मेरे दिल की बाते क्या तेरे सिवा कह सकूँगा किसी और से ?

इंतजार हे उस वक्त का जब तू लौट आएगी…
तू लौट आएगी मेरी ज़िन्दगी मे फिर से क्या ये जा के कह सकूँगा किसी और से ?


Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में

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Love Poem in Hindi | हम तो नशे में है

परवाह है किसे ज़माने की, हम तो नशे में है,
आदत है किसे निभाने की, हम तो नशे में है!
है हम आदि, ज़िल्लत और ज़ुल्म के…
हसरत है किसे कमाने की, हम तो नशे में है!

बेअसर है हम, अब शराब और शवाब से…२
ख्वाबों से रूबरू, हर रात हम नशे में है!
हैं हम नशे में उन रास्तों के दरमियाँ,
लबों से निकली हर बात अब नशे में है!

रोकेंगे अब हमें ये दुनिया वाले हरदम हर घडी…
नफरत की दुनिया का हर ज़ल्लाद अब नशे में है!

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


“ना ही मेरे ज़ज्बात बदले हैं”

ना ही दिल बदला है मेरा,
ना ही मेरे ज़ज्बात बदले हैं!!
कुछ ऐसा शुरू हुआ ग़मों का दौर,
आज मेरे ये जो हालात बदलें हैं!!

एक रोज उनको सराहा था मेने,
चाहतों की हद से भी ज्यादा!
जिनको चाहा था मैंने,
मौसम के जैसे आज उनके खयालात बदले हैं||
ना ही दिल बदला है मेरा,
ना ही मेरे ज़ज्बात बदले हैं!!

निभाई है मेने रस्में कसमें वादे वफ़ा,
ना जाने फिर भी क्यों है वो मुझसे खफा!
किस-किस को दूँ में अपनी बेगुनाही,
हर रोज़ यहाँ उनके जो सवालात बदलें हैं!!
ना ही दिल बदला है मेरा,
ना ही मेरे ज़ज्बात बदले हैं!!

@ Naresh Kumar Gujarwasia


“मुझे पता न चला”

हम मिले बेशक डो अजनबियों की तरह थे,
मगर तुम दिल में कब आ बसे मुझे पता न चला!

अपनी आँखों में राखी थी मेने इज्जत तुम्हारे लिए,
इसमें प्यार कब उमड़ आया मुझे पता न चला!

यूँ तो शराफत और सादगी लुभाती थी मुझको,
तेरी शरारतों पर कब फिसल गया पता न चला!

खुली जुल्फों से आती थी जो तुम्हारी भीनी-भीनी खुशबु,
जाने कब खामोश जंगल सी हुई मुझे पता न चला!

अधरों पर चमकती थी जो सूरज की लालिमा,
वो मदहोश लैब बेसुध क्यों हुए मुझे पता न चला!

वजह चाहे जो हो तेरे इस घुट-घुट के जीने की,
मेरे जीने की वजह अब तुम हो शायद तुम्हें पता न चला!!


“बात सिर्फ इतनी सी है”

बात सिर्फ इतनी सी है तो क्यूँ है
उसे नहीं मुझसे मुहब्बत, मुझे अब तक क्यूँ है ।।

हज़ारो जख्म है मुझमे जो उसकी निशानी है,
मुझे उसकी फिर भी ज़रुरत क्यूँ है
बात सिर्फ इतनी सी है तो क्यूँ है
उसे नहीं मुझसे मुहब्बत, मुझे अब तक क्यूँ है ।।

वो जहाँ है वहां खुश है,
मुझे फिर भी उसकी इतनी फिकर क्यूँ है ।।
बात सिर्फ इतनी सी है तो क्यूँ है
उसे नहीं मुझसे मुहब्बत, मुझे अब तक क्यूँ है ।।

नहीं शामिल मैं उसकी आरजू में,
मेरे हाँथो में फिर उसकी लकीर क्यूँ है ।।
बात सिर्फ इतनी सी है तो क्यूँ है
उसे नहीं मुझसे मुहब्बत, मुझे अब तक क्यूँ है ।।

Love Poem in Hindi | शायरी हिंदी में


इश्क बेहिसाब होने दीजिए

पहले इश्क को राख होने दीजिए,
फिर दिल को राख होने दीजिए!
तब जा कर पनपेगी मुहोब्बत,
जो भी हो बेहिसाब होने दीजिए!!

सजाएं मुक़र्रर करना इत्मिनान से,
मगर पहले कोई गुनाह होने दीजिए!
में भुला नहीं बस थोडा थक गया था,
लौट आऊंगा घर…शाम होने दीजिए!!

चाँद के दीदार की चाहत दिन में जगी है,
आएगा मजार वो, रात होने दीजिए!!

जो सरिताएँ सुख गई है इंतज़ार में,
वो भी भरेगी बस बरसात होने दीजिए!!

नासमझ, पागल, आवारा, लापरवाह है जो,
सम्हाल जाएँगे वो भी बस अहसास होने दीजिए!!

@राहुल चौधरी


“Love Poem in Hindi | तो अच्छा है”

तेरा हाथ मेरे हाथों में रह जाए तो अच्छा है,
ये जीवन यूँ ही साथ गुज़र जाए तो अच्छा है!

सबको पता है की मेरी ग़ज़ल हो तुम,
पर ये खबर तुम तक पहुंच जाए तो अच्छा है!

की चल रहा है दिल मेरा, बहके हुए शराबी सा!
बस अब ये तुम्हारे ही पास रह जाए तो अच्छा है!!

की तेरा हाथ मेरे हाथों में रह जाए तो अच्छा है!!

@हरविन्दर सिंह

दोस्तों के लिए शानदार शायरियां 


“मुझे तुम याद आते हो”

जब चलती है शीतल बयार,
मुझे तुम याद आते हो!
जब बढ़ने लगता है अंधकार,
मुझे तुम याद आते हो!

स्याह रातों को तन्हाई में,
उमड़ने लगते हैं बादल घने!
अंगडाई लेता है चाँद,
तब तारों की छांव तले…
मुझे तुम याद आते हो!

परछाईयों की भीड़ में जब,
सब पय्राया लगता है!
बैगाना सा मुझको जब,
अपना ही साया लगता है!
उन सर्द अँधेरी रातों में,
मुझे तुम याद आते हो!!

@Manisha Kanthaliya


अगर मेरे बस में होता

आसमान के सारे चाँद-तारे तोड़ लाता,
दुनिया की सारी सुंदरता..
तुम्हारे बालों में सजा देता,
अगर मेरे बस में होता!!

दुनिया के सभी झरनों को ,
मैं “माही” बना देता…
आँखों से बहते आँसू,
और लबों पर मुस्कान झलकते…
दोनों को मैं संगम बना देता,
अगर मेरे बस में होता!!
रातों में भी तुम्हारे, ख्बाबों में सोता…
सपनों में तेरी यादों को संजोता,
इन सपनों को मैं शाही बनाता,
अगर मेरे बस में होता!!
हम-तुम से तुम्हारा हमसफर बन जाता,
तुमसे बात करने का बहाना मिल जाता,
मिलती तुम तो, किस्मत को खज़ाना मिल जाता,
अगर मेरे बस में होता!!
@अजय राजपूत (झाँसी)

लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है

सूरत ना देखी मैंने उसकी,
मूरत फिर भी उसकी बनने लगी है…
दिन को चैन नहीं आता,
और रातों की नींद उड़ने लगी है…
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है!!
 
 उसकी यादों में, आँखों से नीर बहते है,
अब तो आँखों को आसुओं मोहब्बत होने लगी है…
कलम लिखना चाहती है, केवल उसके बारे में,
और बातें मेरी कविताओं में ढलने लगी है…
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है!!
उसकी यादों में, रातें गुजार देता हूँ,
अपनी ही बातों में, खुद को सँवार देता हूँ…
सूनसान रातों में, मेरी बातें गहराई में उतरने लगी है,
अब तो मेरे दिल की तन्हाई मोहब्बत में बदलने लगी है!!
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है, 
सुबह सूरज की रोशनी भी अधूरी – सी लगती है,
बाजार की भरी सड़के भी सुनी – सी लगती है…
उसके आने की ये आँखें राह देखने लगी है,
अब तो माह भी सालों की राह देखने लगी है…
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है!!
 
उसके चेहरे की चमक सादी लगती है,
चाँद पूरा निकलता है पर रोशनी आधी लगती है…
बारिश की बूँदें भी अब मुझे भिगोने लगी है.,
अब तो दिल भी यादों को पिरोने लगी है…
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है!!
अभी भी घर की चौखट पर, उसकी राह तके बैठा हूँ,
सुबह से शाम और शाम से सुबह, उसकी राह में गुजार देता हूँ…
कब आओगी ये मेरी तन्हाई कहने लगी है,
तन्हाई की बातें दिल को झूठी लगने लगी है…
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है!!
       @अजय राजपूत(झाँसी)

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