संघर्ष-Struggle|Moral Story in Hindi

संघर्ष-Moral Story

संघर्ष-Struggle|Moral Story in Hindi


एक बार एक मूर्तिकार (मूर्ति बनाने वाला) जंगल की और जा रहा था, मूर्तिकार ने देखा की रास्ते में एक पत्थर पड़ा हुआ है ! मूर्तिकार ने सोचा की यह पत्थर मूर्ति बनाने के लिए सबसे अच्छा है| मूर्तिकार ने जैसे ही उस पत्थर पर मूर्ति बनाने के लिए अपना पहला प्रहार किया, पत्थर से आवाज़ आई “नहीं-नहीं मुझे मत काटो मुझे छोड़ दो, मुझ पर इन औजारों से प्रहार मत करो”| मूर्तिकार ने सोचा, चलो इस पत्थर को छोड़ देते हैं  और वो आगे बढ़ गया| आगे मूर्तिकार को एक बड़ा सा पत्थर मिला, मूर्तिकार ने सोचा यह पत्थर मूर्ति बनाने के लिए अच्छा है, मूर्तिकार ने लगभग एक महीने की लगन और  मेंहनत से एक बड़ी ही खुबसूरत मूर्ति बनाई| लेकिन जब वह उस मूर्ति को ले जाने लगा तो वह बहुत भारी थी, मूर्तिकार ने सोचा क्यों ना पास के गाँव से 4-5 लोगों को बुला कर लाया जाए | मूर्तिकार जब पास के गाँव में गया, तो लोगों ने

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उससे एक मूर्ति बनाने का आग्रह किया | मूर्तिकार ने कहा की मूर्ति तो तैयार है, जंगल में पड़ी है| गाँव के लौग मूर्तिकार के साथ गए और मूर्ति को ससम्मान ले आए और बड़े ही धूम-धाम के साथ गाँव के मंदिर में उस मूर्ति की स्थापना की| जब मूर्तिकार जाने लगा तो गाँव वालों ने मुतिकर से एक आग्रह और किया, की हमें मंदिर के बहार नारियल फोड़ने के लिए एक पत्थर की और ज़रूरत है| मूर्तिकार को उस पत्थर की याद आई जिसे वो जंगल में ही छोड़ आया था, मूर्तिकार ने गाँव वालो को उस पत्थर के बारे में बताया और गाँव वालों ने उस पत्थर को नारियल फोड़ने के लिए मन्दिर के सामने रख दिया|

एक दिन उस पत्थर ने मूर्ति से पूछा की हम दोनों एक ही जंगल में थे पर फिर भी क्यों लोग तुम्हारी पूजा करते हैं और मैरा उपयोग नारियल फोड़ने के लिए करते हैं! मूर्ति ने कहा की उस दिन अगर तुम मूर्तिकार का पहला प्रहार सह लेते तो आज तुम्हारी भी यहीं पूजा हो रही होती|

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कहानी का तर्क यही है, की उस पत्थर की तरह ही हम भी ज़िन्दगी में कुछ बनना तो चाहते हैं लेकिन उसके लिए संघर्ष (Struggle) नहीं करते! ज़िन्दगी में सफल होने के लिए संघर्ष करना बहुत ज़रूरी है!

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